आज समाचार पत्र में लाखों रुपए का आधे पेज का गरबा महोत्सव का विज्ञापन देखा, चैत्र नवरात्र में गरबा महोत्सव ? देवी के नाम पर मनोरंजन का उपद्रव , जीवन दायिनी के नाम पर कामना और भोगविलास का हुल्लड़, मुक्ति दायिनी के नाम पर बंधनों और अशांति का उत्पात , करो हंगामा लेकिन अध्यात्म और धर्म के नाम पर ये अय्याशी का तमाशा क्यों ? क्यों लोग अपने घर की महिलाओं को दूसरों की आँखें सेंकने के लिये गरबा डिस्को थेक में भेजते हैं , भाई , पिता , पति क्या पुरुष की लंपटता को नहीं जानते ? देवी कौन है ? देवी याने प्रकृति, देवी अपने दुश्मन असुरों को मारती है और महिषासुर, शुंभ – निशुंभ और चंड – मुंड जैसे अनेकों राक्षसों से प्रकृति की रक्षा करती हैं ! महिला क्यों सज संवर के सार्वजनिक रूप से नाचने को आतुर है ? आज महिलाओं को समान अवसर है कि वो हर क्षेत्र में काम कर सकती हैं , देश की प्रगति में बराबरी से भागीदारी कर सकती हैं तो फिर नाचने की क्या मजबूरी है ?
ये अय्याश लोग जो जगत जननी दुर्गा मां के नाम पर जाकर भक्ति के बजाए फूहड़ डांस करते हैं इनको दुर्गा सप्तशती के बारे में पता भी है ? सिर्फ अंधानुकरण के नाम पर कान फोडू संगीत पर डंडे बजाना, नचनियों की तरह बदन उघाडू कपड़े पहन कर मर्दों को आमंत्रित करना क्या धर्म है ? भक्ति है ? पूजन स्थल पर जाकर भोग विलास करना , क्या ये धर्म है ? ये धर्म नहीं बाजारवाद है, पूंजीपतियों का अपना माल बेचने का बाजारू तरीका है, हमारा सनातन धर्म तो धैर्य, शांति और मर्यादा के साथ मुक्त जीवन जीने की प्रेरणा देता है, चैत्र नवरात्र में ही मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने रावण को मारने के पहले शक्ति दायिनी देवी की पूजा अर्चना की थी, देवी के आशीर्वाद से ही तो मर्यादा पुरुषोत्तम राम को शक्ति प्राप्त हुई थी जिससे श्री राम, रावण का वध कर सके I
जब गरबा कार्यक्रम का विज्ञापन देखा तो समझ आया की सारा खेल धार्मिकता के नाम पर राजनीति सेंकने और बाजारवाद का प्रपंच है, सारा आडंबर माल बेचने का है, बाजार बढ़ेगा, GDP बढ़ेगा, बिल्डर के फ्लैट – डुप्लेक्स बिकेंगे , पूंजीपतियों के स्कूल – कॉलेज – यूनिवर्सिटी में एडमिशन बढ़ेंगे , खाना – पीने का व्यापार बढ़ेगा , पेट्रोल – डीजल बिकेगा और पूँजीपतियों की पूंजी बढ़ेगी क्योंकि पेट्रोल पंप उनके, शॉपिंग मॉल भी उनके, होटल उनके , कॉलेज, यूनिवर्सिटी भी उनके, सब कुछ उनका ही तो है, उनके जलवे बढ़ेंगे , राजनेता उनको कौड़ियों के दाम पे शिक्षण संस्थान या योगा सेंटर के नाम पर सरकारी जमीन दे देंगे ! मूर्ख भोगवादी जनता की भीड़ इकट्ठा करने के लिये धर्म का तड़का चाहिए और धार्मिक मनोरंजन के लिये संगीत के लिए इंडियन आइडोल की गायिकाओं को बुलाया ही गया है , जनता को रोशनी, चकाचौन्ध , ग्लेमर से सरोबार माहौल से लुभाया जायेगा और लूट लिया जायेगा, रियल एस्टेट के स्टाल होंगे, बैंक के स्टाल होंगे, इंस्टेंट कर्ज दिया जायेगा , मध्यमवर्गीय जनता को कंगाल किया जायेगा, स्कूल – कॉलेज – यूनिवर्सिटी में एडमिशन के लिये आकर्षक स्टाल होंगे, एजुकेशनल लोन के लिये बैंक तुरंत कर्ज मुहैया कराएंगे I
देवी के नाम पर गरबा पंडाल नहीं ये जनता के लिये कसाई खाना है , लुट पिट के बाहर आकर, कंगाल हो कर भक्त भगवान को ही कोसेगा कि हे भगवान तूने क्या किया ? धर्म की अफीम खायी बेहोश जनता को समझ नहीं आता कि गाने – डांस – तड़क – भड़क और कृत्रिम भक्ति के नाम पर बनाया गया मायाजाल उनको जिंदगी भर के लिये कर्जदार बना देगा ? क्या शारदीय नवरात्रि के हंगामे से पूंजीपतियों का पेट नहीं भरता कि अब चैत्र नवरात्र में गरबा महोत्सव आयोजित करने की योजना बना डाली, लगता है अब राम नवमी पर महिषासुर का पुतला जलाने का कार्यक्रम भी जल्द शुरू किया जायेगा और हो सकता चैत्र दिवाली भी शुरू करने की परंपरा बन जाये , बोला जायेगा फोड़ो फटाके कि आज महिषासुर का वध हुआ था I
जनता को समझना होगा कि उनको चारों तरफ से लूटा जा रहा है, राजनीतिज्ञ लूट रहे हैं , मीडिया झूठ बोल बोल के तुम्हें रोज लूट रहा है, पाखंडी धर्म गुरु तुम्हें धर्म के नाम पर लूट रहे हैं और पूंजीपतियों ने तो जनता को लूट लूट कर गुलाम ही बना लिया है, आज देश की 40% संपत्ति सिर्फ 1% पूंजीपतियों के पास है, ऐसा इसलिए है क्योंकि आम धर्मभीरु, अंधविश्वासी, हिंदुस्तानी जनता को बेवकूफ बनाना आसान है I
जब देश ईरान – इसराइल की युद्ध विभीषका से गुजर रहा है, रसोई गेस, पेट्रोल डीजल का संकट है लेकिन राजनीति को धार्मिक मनोरंजन याद आ रहा है और अमीरजादों का लालच हिचकोले मार रहा है, ये लालच कहाँ जा के रुकेगा ? जो देवी हजारों साल भोगी असुरों से प्रकृति की रक्षा करती रहीं, उसी देवी के नाम पर भोग विलास उत्सव, ये देवी की भक्ति नहीं, देवी का अपमान है I
