मेरे पड़ोस में एक निवृत राजनेता रहते हैं, वैसे तो राजनेता कभी रिटायर नहीं होते, नेताओं को जनसेवा का ऐसी लत ( addiction ) होती है कि आखिरी सांस तक वो जनसेवा में लगे रहते हैं , नेता जनसेवा से मिल रहे मेवे को तब नहीं छोड़ते जब तक या तो उनकी सांस धोख़ा नहीं दे जाती है या जनता ही उनको सेवा से पदच्युत नहीं कर देती है , याद है ना बांग्लादेश की शेख हसीना को कैसे देश से जान बचा कर भागना पड़ा था और नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली जेल की सींखचों के पीछे सालों साल खाये मेवे को पचा रहे हैं और श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे की सत्ता को जनता ने ऐसा उखाड़ के फेंका था कि राष्ट्रपति को जान बचाकर देश छोड़ना पड़ा था I
सेवानिवृत्ति उनकी होती है जिन्होंने सेवा दी हो इसलिए राजनीति में सेवानिवृत्ति नहीं होती सिर्फ निवृत्ति होती है हमारे पड़ोसी को जब भी देखता हूं तो पड़ोसी जैसे जबरन निवृत्त नेताओं की बरबस याद आ जाती है , कई वरिष्ठ नेताओं को निठल्ले देख के ये भी समझ आता है कि नेता की निवृत्ति तब भी होती है जब राजनीति की बिसात में कोई पैदल प्यादा उन पर भारी पड़ जाता है ! खैर राजनीति में तो मौकापरस्ती , छल, स्वार्थ आम बात है , तो हमारे पड़ोसी भी शायद किसी प्यादे की अति महत्वाकांक्षाओं का शिकार हैं पर ठसक वो ही है, घर के पोर्च में 10 – 15 कुर्सियां लगी रहती हैं और 2 – 4 बेरोजगार टीका लगाए, हाथ में रंग – बिरंगे धागे बांधे, नेता जी के सम्मान में हमेशा बैठे ही रहते हैं, नेता जी कलफ लगे कुर्ते – पजामा पहने, कैनवास के जूते पहने सुबह से सक्रिय हो जाते हैं , पालतू पत्रकारों को बुलाकर प्रेस वार्ता भी करते रहते हैं I सफेद यूनिफॉर्म में ड्रायवर और नीली यूनिफॉर्म में राइफल लिये गार्ड हमेशा उनकी सेवा में रहते हैं और नेता जी के अहंकार की सुरक्षा करते रहते हैं I
नेताओं का स्वयं का USP ( विशिष्ट विक्रय बिंदु ) होता है की चाहे उनके परिवार में, मोहल्ले में, राज्य में, देश में कैसे भी दयनीय हालात हों लेकिन मजाल है कि उनके माथे पर एक शिकन भी आ जाये, बस शर्त है कि सत्ता उनकी होनी चाहिए , जबरन सत्ता के सुख से धकियाये गये हमारे पड़ोसी निवृत्त नेता के दो जवान लड़के हैं दोनों बेरोजगार बैठे हैं लेकिन मजाल है कि वो इसके लिये सरकार को दोष दें, दोनों लड़के 4 बार व्यापार खोल के बंद कर चुके लेकिन मुश्किल है कि नेता जी सरकार की नीतियों को दोष दें , दोनों लड़के कई प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठ चुके लेकिन हर बार पेपर लीक हो जाता है लेकिन नेता जी बतायेंगे कि ये सब विपक्ष का किया धरा है I
नेता जी की लड़की के साथ 4 गुंडों ने सड़क पर छेड़खानी की लेकिन नेता जी कहते हैं कि सरकार की कानून व्यवस्था तो चाक चोबंद है बस लड़कियों का चाल चलन ही ठीक नहीं है ! नेता जी की पत्नि ज्योतिषों के चक्कर में फंसी है लेकिन नेता जी दिन रात ऐसे ही बाबाओं की कथा का आयोजन करवाते रहते हैं और घर में पाखंडियों का स्वागत करते हैं और सोशल मीडिया पर गर्व से फोटोस पोस्ट करते हैं ! निवृत नेता जी के मोहल्ले में भले ही जहरीला पेय जल आ रहा हो , लोग मर रहे हों लेकिन नेता जी शिव बारात निकालने में व्यस्त रहते हैं, भले ही पूरा मोहल्ला LPG सिलिंडर नहीं मिलने को लेकर परेशान हो लेकिन नेता जी कवि सम्मेलन का आयोजन करवाने में लगे रहते हैं I उनका खुद का मोहल्ला परेशान है कि नकली दवाई से बच्चे मारे जा रहे हैं लेकिन नेता जी चैत्र नवरात्रि में गरबा के आयोजन में लगे हैं, नेता जी के मोहल्ले के अस्पताल में नवजात शिशुओं को चूहे कुतर रहे हैं लेकिन नेता जी किसी अंधविश्वासी बाबा के कैंसर हॉस्पिटल का उद्घाटन करने में लगे हैं !
नेता जी के मोहल्ले की महिलाओं की आर्थिक और मानसिक स्थिति शोचनीय है लेकिन नेता जी 1000 महीने की विशाल मदद ( खैरात ) दे के महिलाओं की दयनीय स्थिति को उभारने के असंभव काम करने में लगे हैं ? नेता जी के मोहल्ले के पुल टूट रहे हैं, भृष्टाचार का बोलबाला है लेकिन नेता जी चुनाव के दौरान ये बताने में व्यस्त हैं कि उन्होंने मोहल्ले से भृष्टाचारियों और भृष्टाचार को खत्म कर दिया है ? भले ही नेता जी मोहल्ले से टनों गाय का माँस बरामद होता हो लेकिन नेता जी गाय के साथ रील बनाने में व्यस्त हैं , भले ही उनके मोहल्ले की बच्चियाँ कुपोषण से ग्रस्त हैं लेकिन नेता जी अपने घर में देवी जी के नाम पर बच्चियों को खाना खिलाने का इवेंट कर रहे हैं और उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित कर रहे हैं I मोहल्ले के दलित के सिर पर गुंडे पेशाब कर रहे हैं और नेता जी दलित के पैर धोने का लाइव प्रसारण करवाने में व्यस्त है I नेता जी के मोहल्ले में 60% प्रतिशत लोगों के पास खाने को पैसे नहीं है लेकिन नेता जी दूसरे मोहल्ले को खाना भिजवाने के दिखावे में व्यस्त हैं ! नेता जी के मोहल्ले के निठल्ले युवा मस्जिद में भगवा फहरा रहे हैं , धर्म के नाम पर मारापीटी कर रहे हैं और नेता जी बेरोजगार युवा कांवडियों के ऊपर हेलिकॉप्टर से फूल बरसवा रहे हैं I
नेता जी के मोहल्ले में ना तो कोई विश्व स्तर का खिलाडी है, ना कोई यूनिवर्सिटी है , ना विज्ञान है, गिनती के नोबेलिस्ट है, शिक्षा का अभाव है, ना कोई ऐसा उद्योग है कि निर्यात और रोजगार बढे, ना तो कोई टेक्नोलॉजी है, काबिल युवा विदेश भाग रहे हैं , हमारा मोहल्ले का पासपोर्ट दुनिया से रहम की भीख मांग रहा है लेकिन नेता जी दूसरे मोहल्ले में जाकर कहते है कि उनका मोहल्ला विश्व गुरु है ? कैसे ? दुनिया हंस रही है लेकिन नेता जी किसी मंदिर में जाकर डमरू बजा रहे हैं …. सब गोलमाल है भई सब गोलमाल है !
