नोएडा की रहने वाली ट्विशा शर्मा की शादी सेवानिवृत्त जज गिरीबाला सिंह के पुत्र वकील समर्थ सिंह से मात्र 6 महीने पहले हुई थी , ट्विशा शर्मा के पिता, भाई, मां, बहन का आरोप है कि उनकी 31 वर्षीय मासूम, हंसमुख लड़की की नृशंस हत्त्या की गयी है ? कानून के रखवाले ही कानून की धज्जियां उड़ाते नजर आ रहे हैं , ट्विशा शर्मा के परिजनों का ये भी आरोप है कि भोपाल पुलिस पूरी तरह से सेवानिवृत्त जज गिरीबाला सिंह के प्रभाव में काम कर रही है और आरोपियों के लिये सुरक्षित रास्ता बनाने की कोशिश कर रही है !
खैर शर्मा परिवार के पुरजोर विरोध, उनका संकल्प और शर्मा परिवार का अपनी बेटी की असमय मौत का गुस्सा इतना तीखा था कि पुलिस FIR लिखने को मजबूर हुई और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिये पुलिस सक्रिय हुई है I भारत में दहेज हत्या एक सामाजिक और आपराधिक समस्या है, NCRB के आंकड़ों के अनुसार, भारत में हर साल 6,000 से 7,000 के बीच दहेज हत्याएं दर्ज की जाती हैं। याने हर दिन देश मे 20 महिलाएं दहेज से जुड़ी हिंसा का शिकार होती हैं। ये तो वो आंकड़े हैं जो मामले पुलिस ने दर्ज किये है और इससे कई गुना महिलाएं तो यूं ही मार दी जाती हैं या आत्महत्या कर लेती हैं जिनका पुलिस में मामला दर्ज ही नहीं होता ? सबसे ज्यादा हिंदी प्रदेशों में दहेज हत्याएं दर्ज की जाती हैं, ये वही हिंदी प्रदेश हैं जहां धर्म , संस्कृति और संस्कार की बातें बहुत की जाती हैं ? क्या सनातन धर्म यही शिक्षा देता है कि दहेज जैसी कुरुति और लालच के चलते एक महिला को जान से मार दो ?
दहेज हत्या एक गंभीर अपराध है इसमें 7 वर्ष या आजीवन सजा का प्रावधान है, अपराध गैर जमानती है I लेकिन लालच, अहंकार, स्वार्थ के चलते कानूनविद् न्यायाधीश गिरीबाला सिंह और वकील समर्थ सिंह पर आरोप है कि वे एक जवान पढ़ी लिखी लड़की को दहेज के लिये परेशान करते थे और एक निर्दोष लड़की से उसकी जिंदगी असमय छीन लेते हैं , ये अक्षम्य अपराध है , ऐसे आरोपियों पर फास्ट ट्रैक कोर्ट में मामला चलना चाहिए और अपराध सिद्ध होने पर सार्वजनिक रूप से फांसी पर लटकाना चाहिए ? भारत में शिक्षा के प्रसार के साथ साथ दहेज जैसी कुरुतियाँ परवान चढ़ रही हैं, धार्मिक पाखंड बढ़ रहा है, मध्यम वर्गीय परिवारों के साथ साथ उच्च मध्यम परिवार भी लालच, बेईमानी, भृष्टता के नये आयाम स्थापित कर रहे हैं ? रुपया – पैसा – संपत्ति आ जाने से लालच नहीं चला जाता है, भारत में ना जाने कितने ही अरबपति जेल में सड़ रहे हैं या विदेश में नारकीय जीवन जी रहे हैं I
लड़कियों को दहेज जैसी कुप्रथा से बचाना है तो लड़कियों के मां – बाप को बेटियों को शिक्षित करना होगा, उनका कौशल विकास करना होगा, उनको स्वावलंबी बनाना होगा, उनको निडर और साहसी बनाना होगा, हमारे समाज की समस्या है कि हम बेटियों को दबने का प्रशिक्षण देते हैं, हमेशा समझौता करने की समझाइश देते हैं, पति पर्मेश्वर नहीं होता, वो एक हाड़ माँस का पुतला होता है, उसको उसकी जगह पर रखना सीखना होगा, बेटी के मां – बाप की गंभीर समस्या है कि वो हमेशा बेटी को ससुराल में ‘ एडजस्ट ‘ करने की सलाह देते हैं, बेटी ससुराल से कोई समस्या बताना भी चाहती है लेकिन मां – बाप की यही हिदायत होती है कि समय के साथ सब ठीक हो जायेगा ! ऐसा व्यहवार अनुचित है, बेटी की शिकायतों को गंभीरता से लें अन्यथा शर्मा परिवार की तरह रोने के अलावा कुछ नहीं रह जायेगा ?
बेटी को बोझ और पराया समझने वाले मां – बाप भी बेटी के दुश्मन ही होते हैं ? लड़की को जल्द से जल्द ‘ अपने ‘ घर भेजने वाले भी दहेज हत्त्या के दोषी हैं और जो लालची लड़के दहेज ले के शादी करते हैं वो क्या वैश्या की श्रेणी में नहीं आते उन औरतों की तरह जो पैसे लेकर शारीरिक संबंध बनाती हैं ? पहले अपनी बेटी को इंसान समझें, बेटी का भेड़ – बकरी की तरह सौदेबाजी करना बंद करें !
हिंदुस्तान में शादी – ब्याह को सामाजिक, धार्मिक और कानूनी रूप से इतना जटिल बना दिया गया है कि लड़के या लड़की के लिये इससे बाहर निकलना असंभव लगता है, अदालतों के चक्कर, वकीलों के दांव – पेंच, लंबी कानूनी प्रक्रियाएं लड़के और लड़की को अपराध करने पर मजबूर करते हैं, तभी तो कभी लड़की को नीला ड्रम दिखता है या कभी लड़के को फांसी का फंदा दिखता है ? अमेरिका में तलाक़ दर भले ही 50 प्रतिशत हों परंतु वहां महिला या पुरुष की निजी प्राथमिकताओं को तरजीह दी जाती है लेकिन इसके उलट भारत में भले ही तलाक़ दर 1% है लेकिन भारत में असफल विवाह अमेरिका से ज्यादा हैं , हिंदुस्तान में पाखंड से भरे संस्कारी लोग समाज के डर से प्रेमहीन विवाह में मजबूरी में रहने को विवश हैं और खुश दिखने का दिखावा करते फिरते हैं I
