देवी ही प्रकृति हैं, प्रकृति ही देवी है , देवी ही जीवन दायिनी है, देवी ही मुक्ति दायिनी है, इस सत्य से परे हिंदुस्तान के तथाकथित धार्मिक लोग, डांडिया नाच करने में व्यस्त है, दुर्गा पूजा का पूरी तरह से व्यवसायीकरण कर दिया गया है , टिकट कटा के डांडिया नाच के बड़े बड़े आयोजन होते हैं, म्युज़िक, खाने पीने के भव्य स्टाल, डी जे, भद्दे डांस, अश्लीलता, वासना, विलासिता का उत्सव बन गया है, भोंडे भौंडे लोग अजीब सी पोशाकें पहनकर जोकर बन कर डांडिया खेलते हैं, सिर्फ आँखे सेंकने और रिझाने का उत्सव बन कर रह गया है दुर्गोत्सव ! ये नौ दिन तो देवी ( प्रकृति ) को नमन करने का पर्व है, लेकिन पूरे पर्व में धार्मिकता , सत्य, करुणा , प्रेम , ईमानदारी का दूर दूर तक कोई सरोकार नहीं , देवी ( प्रकृति ) के इस धार्मिक आयोजन को हमने लालच, भोग और लाभ का उत्सव बना कर प्रकृति को ही नाश करने का उत्सव बना दिया है I
देवी तो मुक्ति देती है तुम्हें तुम्हारे अहंकार से , लालच से, क्रोध से, वासना से, देहभाव से, देवी तुम्हें मुक्ति देती है तुम्हारे अंदर बैठे महिषासुर से, शुम्भ निशुंभ से और रक्त बीज जैसे राक्षसों से जो प्रकृति को अपने लालच और स्वार्थ के लिये नष्ट करना चाहते है, जो लगातार रूप बदलते है, और ताकत के बल पर और षड्यंत्र कर के जनता का शोषण करना चाहते हैं, देवी मां महिषासुर का वध कर के तुम्हें मुक्ति देती है, जीवन देती हैं, ये है सप्तशती ग्रंथ का मर्म ! और हम क्या कर रहे हैं ? हम भोगोत्सव मनाकर और महिषासुरों को नाश करने के बजाए, राक्षसों को ताकत दे रहे हैं, प्रश्रय दे रहे हैं I
कितनी ही राक्षसी ताकतें हमारे देश के लिये चुनौती बनी हुई हैं लेकिन हम संघर्ष करने के बजाए डंडे लेकर नाच गाना कर रहे हैं ? क्या हमारा धर्म नचईयों का धर्म बन कर रह गया है ? तुम्हारे हाथ में खल्लास डंडा देकर करोड़ों – अरबों का व्यापार करने वाले पूँजीपति और भी ताकतवर बनते जा रहे हैं , मूर्खो से लूटकर ही तो महामूर्ख हजारों बिलियन डॉलर के मालिक बने बैठे हैं और तुम बस विदूषक बनकर भौन्डा नाच नाच रहे रहो I जंगल क्यों काटे जा रहे हैं ? क्यों पहाड़ खोदे जा रहे हैं ? मध्य प्रदेश का एक नेता खनिज खनन करके कैसे हजार करोड़ रुपयों का मालिक बन गया ? कैसे एक नेता का 29 साल का लड़का म. प्र. क्रिकेट अकेडमी का अध्यक्ष बन गया ? कुछ पता है या बस डांडिया ही करना है ?
क्यों एक शिक्षाविद्, पर्यावरणविद् , देशप्रेमी सोनम वांगचुक को देश द्रोह के आरोप में गिरफ्तार कर लिया जाता है ? कुछ मालूम है या धर्म की अफीम खाये बेहोश पड़े हो ? मध्यप्रदेश में उभरते क्रिकेट के खिलाडियों को अगर रणजी ट्रॉफी में खेलना है तो 20 – 25 लाख रुपयों की रिश्वत लगती है ? मालूम है ? तुम्हारे होनहार बच्चे से भी पैसे मांगे जायेंगे तब क्या करोगे ? विरोध करोगे या बस डांडिया का ही रस लेते रहोगे ? यौन उत्पीड़न से गुस्साई, क्षोभित ओलिंपियन महिला खिलाडियों की कोई सुनवाई नहीं होती , जब तुम्हारी लड़की यौन शोषण के खिलाफ आवाज उठायेगी तो तुम भी डांडिया रास में व्यस्त रहना I
उतराखंड में युवाओं ने पेपर लीक होने पर आंदोलन छेड़ रखा है, पूरे देश के युवा शिक्षा और बेरोजगारी को लेकर कुंठित हैं और तुम्हें नाचने – गाने से फुर्सत नहीं ? धराली, वैष्णो देवी, हिमाचल प्रदेश , उतराखंड में क्लाईमेट चेंज के चलते भूस्खलन और अतिवृष्टि से हजारो लोग मर रहे हैं क्योंकि पूँजीपति वहां रिज़ॉर्ट बना रहे हैं, रोप वे बना रहे हैं, हेलिपेड बना रहे हैं , पहाड़ों पर अपना व्यापार बढ़ाने के लिये प्रकृति का दोहन कर रहे हैं लेकिन तुम गुलामों की तरह प्रकृति के साथ खिलवाड करने वालों के खिलाफ आवाज़ उठाने के बजाए डांडिया धुन पर नाच गा रहे हो ? जब तुम्हारे परिजन भूस्खलन की चपेट में आयेंगे तब भी तुम डांडिया ही खेलते रहना I चुनाव के पहले बिहार में 75 लाख महिलाओं को दस – दस हजार रुपए खैरात में बांटे जा रहे हैं ? कुछ मालूम है ? वोट खरीदे जा रहे हैं 7500 करोड़ रुपए बिहार के सरकारी खजाने से जनता के टेक्स के पैसे लुटाकर ? फिर क्या होगा, महिषासुर बिहार आयेंगे , कौड़ियों के दाम में 1000 एकड़ जमीन लीज पर लेंगे और उद्योग लगाएंगे, फिर जनता को बिजली महंगे दामों में बेचेंगे ? तुम्हारे पैसे से ही तुमको लूटा जा रहा है और तुम डांडिया रास में व्यस्त हो ?
भगत सिंह या चंद्रशेखर आजाद भी स्वार्थ के चलते आँख मूंद कर डांडिया रास ही करते रहते तो आज भी तुम गौरों की गुलामी कर रहे होते ? अब भूरों की गुलामी से आजाद होने का वक्त है I गीता में श्री कृष्ण अर्जुन से कुरुक्षेत्र के रण में बोलते हैं अर्जुन उठ, संघर्ष कर, अपने दुश्मन पर टूट पड़, सवाल देश का था, प्रजा के शोषण का था, कृष्ण अर्जुन को रण भूमि में डांडिया खेलने या नाचने को थोड़े ही कह रहे थे I अर्जुन की तरह संघर्ष करो अपनी गुलामी और शोषण से, छोड़ो ये सस्ती मौज मस्ती धर्म के नाम पर I
