1 – 2 दिन पहले की बात है मैं भोपाल के एक प्रतिष्ठित ( सरकारी ) क्लब में बैठा था, दारू और खाना सस्ता मिलता है तो दोस्त – यार पकड़ के ले जाते हैं, बाजू वाली टेबल पर कुछ प्रशासनिक अधिकारी बैठे थे, 2 – 4 तो शायद उन 50 IAS / IPS अधिकारियों में से थे जिन्होंने भोपाल में वो विवादित जमीन खरीदी थी, उसके बाद 3000 करोड़ की सड़क मंजूर करवाई, फिर लैंड यूज बदला गया और उसके बाद कौड़ियों की जमीन करोड़ों रुपए की हो गई, संगठित सरकारी लूट का ऐसा उदाहरण आपको पूरी दुनिया में देखने का नहीं मिलेगा ? पैसे के लालची, बेईमान अफसर अहंकार के चलते अट्टाहस लगाते हुए बतिया रहे थे कि देश का नेता ऐसा होना चाहिए जो खाने दे और तिजोरी भरने के रास्ते बताये, एक अफसर बोला कि मेरा अगले महीने रिटायरमेंट है, किसी यूनिवर्सिटी या मंडल या आयोग में फिट होकर संगठन की सेवा करूँगा ? एक अफसर बोला कि हमारे अनोखे नेताओं की किसी से कोई तुलना नहीं है ?
मैं क्लब से बाहर ये सोचते हुए निकला कि क्या सही में हमारे वन एंड ओनली नेता जी का किसी से कोई मिलान नहीं , क्या नेता जी की किसी से कोई तुलना नहीं हो सकती ? डोनाल्ड ट्रंप भी हमारे नेता जी के सामने पानी भरते हैं ? डोनाल्ड ट्रंप तो रोज प्रेस से बात करते हैं , व्हाइट हाउस कवर करते पत्रकारों से डोनाल्ड ट्रंप कम से कम दो टूक बात तो करते हैं ? अपने मन की बात तो खुल के करते हैं ? देश की आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक, विदेश नीति की बाते पत्रकारों से साझा तो करते हैं ? डोनाल्ड ट्रंप जो अंदर हैं वही बाहर हैं, हमारे नेता जी से डोनाल्ड ट्रंप की कोई तुलना नहीं ?? हमारे नेता प्रेस से बात नहीं करते, बल्कि नेता जी एकतरफा ‘ मन की बात ‘ करते हैं, ‘ मन की बात ‘ में जो कहते हैं वो करते नहीं और जो करते हैं वो कहते नहीं ?
मैं सोचने लगा कि हमारे नेता फटा ढोल ले के पूरी दुनिया में घूमते हैं और अमेरिका के निर्देशों के गुलाम हैं , है ना गजब ? पूरी दुनिया में पपलू बने हुए हमारे नेता एक लालची व्यापारी का एजेंट बनकर जनता के टैक्स के पैसों से हजारों करोड़ के विमान और करोड़ों की कारों में विचरण करते हैं , साथ में पचासों अफसर को ले के चलते हैं और हर विदेश यात्रा में करोड़ों रुपए बर्बाद कर के देश को क्या हासिल होता है ? हॉर्मुज विफलता , ईरान से दोस्ती में खटास, अमेरिका का 50 परसेंट टैरिफ , रूस से घटता व्यापार, पाकिस्तान के सामने सर्रेंडर , बांग्लादेश की दो टूक , तुर्की की गद्दारी, चीन का भारत की जमीन पर लगातार अतिक्रमण और नेपाल से बेइज्जत्ती ? मैं सोच सोच के परेशान हूँ कि तानाशाह पुतिन हो या जी शीनपिंग ने अपने अपने देश को कहाँ से कहाँ पहुंचा दिया ? और लोकतांत्रिक रूप से तानाशाही करते हमारे नेता क्या कर रहे हैं ? रुपया , US डॉलर के मुकाबले 96 का हो गया ? दुनिया की सबसे तेजी से गिरती कर्रेंसी है हिंदुस्तानी रुपया ? क्यों ? शर्म की बात है कि वर्ल्ड पासपोर्ट रैंकिंग में 2025 में हम 85 वें स्थान पर थे ? शिक्षा में हम दुनिया में फिसड्डी हैं ? लोकतंत्र हमारा फ्लाड डेमोक्रेसी में आता है, प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में भारत का 180 देशों में 157वां नंबर है, प्रेस नाम की कोई चीज ही नहीं है इंडिया में ? पर कैपिटा इन्कम ( per capita income ) वर्ल्ड रैंकिंग में दुनिया के 200 देशों में हिंदुस्तान 150 वें नंबर पर है, वैश्विक भुखमरी सूचकांक (Global Hunger Index ) में भारत 123 देशों में से 102वें स्थान पर है ! हम विश्व गुरु नहीं विश्व भिखारी हैं ?
विदेशी निवेश घट रहा है, अमीर लोग देश छोड़ के भाग रहे हैं, देश पूंजीपतियों के हाथों बेचा जा रहा है, निर्यात नगण्य हो चुका है, आयात बढ़ता जा रहा है, हम फिर से गुलामी ( आर्थिक ) की ओर बढ़ रहे हैं, नौजवानों का भविष्य चौपट हो रहा है ? ना भविष्य की कोई गारंटी है ना कोई वर्ल्ड क्लास शिक्षा संस्थान ? IIT, IIM से निकलकर नौजवान विदेश भाग जाते हैं क्योंकि वहां टेक्नोलॉजी है , रिसर्च संस्थान हैं ! भारत को झूठ, दिखावे, जुमलेबाजी, तानाशाही, धर्म के नाम पर नफरत, बेरोजगारी, अनपढ़ नेतृत्व, अहंकार, अशिक्षा, देश प्रेम की कमी, भृष्टाचार, घोटालेबाजों ने बर्बाद कर दिया है ! लेकिन हमारे नेता झूठे वादों, झूठे आंकड़ों, सारे संवेधानिक संस्थानों पर कब्जा कर के देश को वहां पहुंचा रहे हैं जहां से वापिसी करना नामुमकिन होता जा रहा है ?
100 टके का सवाल है कि हमारे नेता जी की तुलना किस से करूं ? जवाहर लाल नेहरू से ? लाल बहादुर शास्त्री से या इंदिरा गाँधी से या जय प्रकाश नारायण से ? या एडोल्फ हिटलर से या जोसेफ स्टालिन से करूं या बेनितो मुसोलिनी से करूं या महात्मा गाँधी से करूं या रवींद्र नाथ टैगोर से करूं या मदर टेरेसा से करूं ? मैं बुरी तरह व्याकुल हो गया, मेरे दिमाग में मिथिलेश श्रीवास्तव उर्फ नटवरलाल की छवि भी घूमने लगी और कभी चार्ल्स शोभराज का चेहरा भी घूमने लगा ? भटकते – बहकते मेरी नजर मलाइका अरोड़ा खान के एक विज्ञापन पर पड़ी ! मलाइका अरोड़ा खान आज सोशल मीडिया और मेन स्ट्रीम मीडिया की हॉट प्रोपर्टी है, हर जगह नजर आ जाती है मीडिया उसका पीछा लगातार करता है , चाहे वो मंदिर जाये या जिम ? मलाइका अरोड़ा खान ना तो एक्ट्रेस है, ना डांसर है ना ही डायरेक्टर है, ना उसको एक्टिंग आती है ना वो बुद्धिजीवी है , वो सिर्फ अपनी मूर्खता की और जिस्म की और अपने परिधानों ( डिसाइनर कपड़ों ) की नुमाइश करती घूमती रहती है, पति को छोड़ चुकी है, अपने अमीर बॉयफ्रेंड के साथ अंतरंग संबंधों की नुमाइश करती रहती है, उन्ही दोस्तों के लिये मलाइका अरोड़ा खान काम करती है और वही दोस्त उसको लाइम लाइट में रखते हैं और उसको इंडस्ट्री में टिकाए हुए हैं अन्यथा मलाइका अरोड़ा खान का अभिनय के क्षेत्र में धेले का योगदान नहीं हैं, पूँजीपति दोस्तों को मलाइका बहुत कुछ दे रही है और मलाइका को अपने पूँजीपति दोस्तों के बदौलत वो मिल रहा है जिसकी उसके पास ना योग्यता है ना ही काबिलियत ?
