2024 में 97 लाख श्रद्धालु वैष्णो देवी पहुंचे और 172 करोड़ रुपया चढ़ावा आया, इससे हमारे देश की GDP बढ़ रही है, व्यापार बढ़ रहा है .. सब बाजार का खेल है I
वैष्णो देवी पर श्रद्धालुओं की मौत अनायास नहीं हुई है, ये सुनियोजित सामूहिक हत्त्या है, इसका जिम्मेदार है वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड , आश्चर्य है कि बोर्ड अपने मुनाफे के लिये पहाड़ों पर क्यों जुल्म करने को उतारू है ?
मुक्ति कि उड़ान / भोपाल
जीवनदायनी देवी मां कौन हैं ? प्रकृति ही तो मां हैं और प्रकृति का नष्ट करने की मंशा रखने वाले महिषासुर का नाश करने के लिये ही तो देवी मां ने अपना रौद्र रूप दिखाया था और महिषासुर के साथ निशुम्भ-शुम्भ , रक्तबीज जैसे कई दुर्दांत राक्षसों का जीवन दायिनी माँ ने संहार किया था और प्रकृति को नष्ट होने से बचाया था, आज फिर महिषासुरों द्वारा अपने स्वार्थ, लालच , मूर्खाताओं के लिये प्रकृति का दोहन किया जा रहा है और देवी मां ( प्रकृति ) ने अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है ! जम्मू कश्मीर , उत्तराखंड , हिमाचल प्रदेश में प्रकृति का विकराल रूप इसकी गवाही दे रहा है I
वैष्णो देवी मे 26 अगस्त 2025 को भूस्खलन हुआ, सरकारी आंकड़ों के अनुसार 35 श्रद्धालुओं की मौतें हुई हैं, 26 अगस्त से वैष्णो देवी यात्रा बंद है , कितना दुखद है ये सब ? 3 सितंबर को फिर से यात्रा मार्ग में लैंडस्लाइड हुआ, लेकिन यात्रा बंद होने से कोई भी श्रद्धालु हताहत नहीं हुआ ! हम संस्कृति वादियों ने धर्म को व्यापार बना दिया है , धर्म तो इंसान के अहंकार का खात्मा करने के लिये है लेकिन इसके उलट हमने धर्म को कामना पूर्ति का साधन बना लिया है , हमने धर्म को ही अपने अहंकार को विस्तार देने का जरिया बना लिया है, जहां अहंकार है वहीं दुख है, तनाव है , पीड़ा है और तमाम तरह के अवसाद हैं, क्लेश हैं, झगड़े हैं I
आज भोपाल में एक प्रसिद्ध मिठाई की दुकान में गया तो देखा मोदक बिक रहे थे, एक महिला आई, ऐसा लगा कि या तो खुद सरकारी मुलाजिम थी या किसी नौकर शाह की पत्नि होगी .. बोली अच्छे मोदक दिखाओ, उसने दिखाये तो मुंह बनाकर मोहतरमा बोली, अच्छे मोदक दिखाओ कि गणपति खुश हो जाएं ? दुकानदार ने शो केस के अंदर खूबसूरत पैकिंग में रखे मोदक बुलवाये, चांदी का वर्क, महंगी पैकिंग, खुले बिक रहे मोदक से 4 गुना रेट , पैकिंग देख के मोहतरमा चहक पड़ीं, दुकानदार बोला कितने पैकेट पेक कर दूं ? मैडम बोली 1 किलो रख दो, दुकानदार ने कहा कि मैडम एक पैकेट से आपके समस्त कष्ट दूर नहीं होंगे, 4 किलो लेना पड़ेंगे, 1 किलो मोदक तो आपके कष्टों को दूर करने के लिये, दूसरा आपके प्रमोशन के लिये, तीसरा आपको छापों ( RAID ) से बचाने के लिये और चौथा आपकी लड़की की शादी हो जाये इसलिए ! मैडम बोली 5 किलो दे दो, पांचवा मेरे पति को उस चुड़ैल से मुक्ति दिलाने के लिये ? ये है हमारी कर्म कांड पूजा और धर्म के नाम पर संस्कृति ? शुद्ध कामनाओं पर आधारित व्यापार ? गणेश जी को क्या लेना – देना तुम्हारे भ्रष्ट जीवन से, तुम्हारी कामनाओं से ? महंगे मोदक ( मिठाई ) , सुबह – शाम छप्पन भोग का चढ़ावा , अजीबो – गरीब कर्मकांडी पूजन .. क्या भगवान को ये सब चाहिए ? थोडा बोध , दिमाग तो लगाओ ये सब तुम्हें लूटने के लिये, धर्म को बाजारवाद से जोड़ दिया गया है !
1986 में हम 5 दोस्त कश्मीर गये थे , 20 – 22 साल के युवाओं की अज्ञानी दुनिया थी हमारी ? लौटते मे वैष्णोदेवी के दर्शन करने भी गये थे , मैं क्यों गया था मुझे नही मालूम ? कोई आस्था ? श्रद्धा ? हिंदू होने के नाते ? नहीं, बस यूं ही .. दो फिल्में जरूर आई थीं उस वक़्त , एक थी आशा ( जितेंद्र, रामेश्वरी, रीना राय ) उसमें गाना था ” तूने मुझे बुलाया शेरा वालिये ” और दूसरी थी अवतार ( राजेश खन्ना, शबाना आज़मी ) उसमें गाना था ” चलो बुलावा आया है माता ने बुलाया है ” पूरी वैष्णो देवी यात्रा इस गाने में दिखायी गयी थी और फिल्म में बताया गया था कि हीरो – हीरोइन का बच्चा बीमार था, कोई भी डॉक्टर, हकीम, पंडित, वैद्य उसको ठीक नहीं कर पाता है लेकिन वैष्णो देवी के दर्शन करने से बीमार बच्चा ठीक हो जाता है, फिर क्या था ! उसके बाद ही पूरे हिंदुस्तान से मूर्ख धर्मावलंबी जनता, दुखीहारी लोग, पीड़ित धार्मिक अंधभक्त वैष्णो देवी इस आशा से पहुंचने लगे कि देवी उनके दुख हर लेंगी , हमारे जाने का भी यही शायद सबब रहा हो ? हिंदुस्तानियों को फिल्में बहुत प्रभावित करती हैं, हमारे देश में अशिक्षा है, यही कारण है कि धार्मिक पाखंड भी बहुत है I
1986 में कच्चा रास्ता था, कटरा में कुछेक धर्मशाला थीं , कोई ताम झाम नहीं, रास्ते में कोई सुविधा नहीं , कच्चा दुर्गम रास्ता था, रास्ते में लाइट के नाम पर 100 – 100 मीटर पर लट्टू टंगे हुए थे , कोई होटल नहीं, कोई सुविधायें नहीं , आज तो बड़ी – बड़ी होटेल्स बन गयी हैं, बड़े – बड़े व्यापारी अपनी दुकान सजा के बैठ गये हैं, पक्की सड़क बन गयी हैं, कारें ऊपर तक जाने लगीं हैं, घोड़े – खच्चर, पिट्ठू सब चल रहा है, पूरे रास्ते में शेड बन गया है, टाइल्स लग गयी हैं, चमकती लाइटें लग गयी हैं, 24 घंटे यात्रा चलती है , हेलिकॉप्टर चलने लगे हैं, रोप वे चलने लगे हैं, रास्ते भर ऐसा लगता है बाजार से गुजर रहे हो ! 2024 में 97 लाख श्रद्धालु वैष्णो देवी पहुंचे और 172 करोड़ रुपया चढ़ावा आया, इससे हमारे देश की GDP बढ़ रही है, लोग ट्रेन, हवाई जहाज से पैसे खर्च करके पहुँचते हैं, वहां होटल में रुकते हैं, खाते – पीते हैं, व्यापार बढ़ता है .. सब बाजार का खेल है I
हमारे पूर्वजों ने, संतों ने पहाड़ों पर इसलिए मंदिरों का निर्माण किया था कि लोग पहाड़ों का सम्मान करें, उनकी देखभाल करें लेकिन हमने तो पहाड़ों पर ऐसे ऐसे असहनीय अत्याचार किये कि पहाड़ दर्द से कराह उठे, रोप वे, हैलिपेड, होटेल्स, रिजोर्ट का निर्माण, घरों का निर्माण, पेडों का निर्ममता से काटना , कटरा तक ट्रेन चला दी गयी, ट्रेन चलाने के लिये पहाड़ों का सीना चीर के सुरंगों का निर्माण किया गया , ट्रेन चलने से पहाड़ों में कंपन होता, पहाड़ों की मिट्टी ढीली होती है जिससे चट्टानों की पकड़ छूटती है, जनता पहाड़ों पर जाकर गंदगी करती है, बिसलेरी, चिप्स के पैकेट पहाड़ों पर बिखरे पड़े हैं, बरसात में पहाड़ों से जगह जगह झरने बहने लगते हैं, लेकिन प्लास्टिक के फेंकने के कारण झरने चोक हो जाते हैं , जो पानी बहता था वो पहाड़ों पर ही जमा रह जाता है और जमा पानी चट्टानों को घोलने लग जाता है ! यही सब कारण हैं कि लैंडस्लाइड की घटनाएं हर जगह हो रही हैं, उत्तराखंड, हिमाचल , जम्मू कश्मीर में हर साल भू स्खलन की घटनाएं बढ़ रही हैं I
हालात ये हो गये हैं की जीवदायनी मां, जीवनदायी पहाड़ सब इंसानो की जान लेने को मजबूर हो गये हैं, तीर्थ करने जाने वाले पर्यटक अपने ऐशो – आराम – मौज – मस्ती के लिये पहाड़ों के लिये, पर्यावरण के लिये दुश्मन बन गये हैं, वैष्णो देवी पर श्रद्धालुओं की मौत अनायास नहीं हुई है, ये कोई प्राकृतिक आपदा नहीं है , ये सुनियोजित सामूहिक हत्त्या है, इसकी जिम्मेदार है सरकार और वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड , जो सरकार द्वारा संचालित है, आश्चर्य है कि वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड अपने मुनाफे के लिये पहाड़ों पर क्यों जुल्म करने को उतारू है ? वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के पास 500 करोड़ की सम्पति है और हर वर्ष बोर्ड को 500 करोड़ रुपये की आय होती है जो मुख्यतः श्रद्धालुओं के चढ़ावे से होती है, क्या सरकार को मालूम नहीं कि GDP को बढ़ाने के लिये सरकार जिसे ( निर्माण कार्य, हेलिकॉप्टर, रोप वे आदि ) श्रद्धालुओं के लिये सुविधा बता रही है असल में वो उनकी दर्दनाक मौत के कारण बन रहे हैं और आगे भी ऐसी और भयावह दुर्घटनाओं को रोकना नामुमकिन होगा I
