सोचिये आप भारत की किसी एयरलाइंस में चढें और पायलट धोती डाले, पैर में खडाऊ डाले, गले में रुद्राक्ष की माला डाले, माथे पर तिलक लगाए दिखे तो क्या आप उस फ्लाइट में बैठेंगे ? क्या आपको उस पायलट पर विश्वास होगा कि वो आपको आपके गंतव्य तक सुरक्षित पहुंचा पायेगा ? प्लेन उड़ाना है कोई श्रीमद्भागवत कथा थोड़ी वाचनी है कि माथे पर चोड़ा टीका लगा के , गले में ढेर सारी माला लटका के गेहुआं कलर के धोती कुर्ता पहनकर पालती मार के घंटो बैठे रहें और अवैज्ञानिक बातें करें, और सामने बैठे अंध श्रद्धालुओं को धर्म की पौराणिक कहानियों का रसपान कराएं I अगर पायलट का ड्रेस कोड शर्ट – ट्राउसर, केप, टाई है तो ये उसके प्रोफेशन की डिमांड है ?
और अगर आप प्लेन के अंदर जाकर देखें कि एयरहास्टेस घाघरा चोली पहने हो, माथे पे बिंदी लगी हो, मांग में गाढ़ा सिंदूर लगा हो , गले में मंगलसूत्र डला हो, हाथ में डिसाइनर अंगूठियां हों, पैर में पायल हो और तो आप क्या विश्वास कर पाएंगे कि वो एयरहोस्टेस अपनी ड्यूटी निभा पायेगी ? आपको लगेगा कि कहीं में किसी पाखंडी बाबा के आश्रम में तो नहीं आ गया ? आपकी पहली प्रतिक्रिया होगी कि कहाँ की गँवार महिलाओं को प्लेन की विमान परिचारिका बना दिया है ? विमान में पानी, खाना सर्व करना होता है , अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों में तो शराब भी सर्व करना होती है, बच्चों को सम्हालना होता है, बीमारों का भी ख्याल रखना होता है बेगेज भी कैबिन में रखना होता है क्या ऐसे कपड़ों में महिला अपनी ड्यूटी निभा पायेगी ? बदन से चिपके कपड़े पहनना, किसी भी तरह का टीका या आभूषण धारण नहीं करना , उसकी ड्यूटी के प्रोटोकाल में आता है !
हर विधा, हर संस्थान का अपना ड्रेस कोड होता है, क्या मिलिट्री में महिलाओं की यूनिफॉर्म साड़ी हो सकती है ? क्या कोई महिला पुलिस अधिकारी फील्ड में सलवार सूट पहन सकती है ? क्या कोई पुरुष अधिकारी चाहे वो पुलिस में हो या एयर फोर्स में हो या नेवी में हो, क्या वो संस्था की निर्धारित की हुई ड्रेस या यूनिफॉर्म से अलग ड्रेस या यूनिफॉर्म पहन सकता है ? क्या किसी पांच सितारा होटल के रिसेप्शन पर सनातन संस्कारी बहू को बर्दाश्त कर पाओगे ? या होटल की बैंक्वेट मैनेजर अपन मंगलसूत्र, मांग और दुपट्टा सम्हालते हुए तुमसे बिसनेस डील कर सकेगी ? हर संस्थान में Do & Don’t do याने क्या करें और क्या न करें की सूचियाँ होती हैं, लेंस कार्ट में भी ड्रेस कोड होगा , Do & Don’t do की सूची होगी तो फिर लेंस कार्ट के यूनिफॉर्म कोड पर इतना हंगामा क्यों ? ये हिंदू संगठन जो देश में कुकुरमुत्तों की तरह फैले हुए हैं, उनका रोजगार ही यही है कभी किसी मॉल में पहूंच जायेंगे या किसी चूड़ी वाले के पहुँच जायेंगे या किसी इवेंट में पहुँच जायेंगे और हिंदू धर्म को खतरा बता के वसूली की कोशिश की जायेगी और अगर ‘ डील ‘ नहीं हुई तो सरकार सरंक्षित हिंदू संगठन, श्रीराम और कृष्ण के कथित भक्त रावण और कंस बन के टूट पड़ेंगे !
ये हिंदुओं के तथाकथित सरंक्षक तब कहां गायब हो जाते हैं जब उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में ‘भोले बाबा’ (सूरजपाल उर्फ नारायण साकार हरि) के सत्संग में भीषण भगदड़ मचने से 120 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी, जिसमें ज्यादातर महिलाएं एवं बच्चे थे ! क्यों नहीं पाखंडी सूरजपाल के आश्रम में जा के तथाकथित हिंदुओं ने उपद्रव किया ! महामंडलेश्वर उत्तम स्वामी पर राजस्थान की युवती ने रेप का आरोप लगाया है, क्यों नहीं हिंदू धर्म के खैरख्वाह उसके जबलपुर जाकर उसके आश्रम में हंगामा करते हैं ? नासिक के ज्योतिष अशोक खराट ने तो धार्मिक अंधविश्वास के नाम पर 100 से ज्यादा हिंदू महिलाओं का बलात्कार किया है तब कहां चले जाते हैं हिंदू धर्म के सरंक्षक ?
लेंस कार्ट को बलि का बकरा बना दिया गया है , राजनीतिक रोटियां सेंकी जा रही हैं, ये दो कौड़ी के धार्मिक पाखंड में लिप्त हिंदू कट्टरता के राजनीतिक सरंक्षक प्राप्त गुंडे और एक दबंग मुस्लिम नेत्री भी इसको हिंदू – मुस्लिम रंग देने काम कर रही हैं ? सोचो अगर लेंस कार्ट का मालिक मुसलमान होता तो ये कथित हिंदू संगठन के उपद्रवी लेंस कार्ट के शोरूम जला ही देते ? जब देश में रोजगार नहीं है, स्नातकोत्तर बेरोजगार, पी एच डी होल्डर तक भृत्य की सरकारी नौकरी को तरस रहे हैं तब लेंस कार्ट कंपनी के देश भर में 2400 आउटलेट्स में, 15000 बेरोजगारों को रोजगार देने का काम कर रही है, अगर देश में ऐसा ही धार्मिक कट्टरता का माहौल रहा तो जो कुछ प्रॉफिटेबल कॉर्पोरेट्स बचे हैं वो भी अपना बोरिया बिस्तर उठा के अमेरिका, दुबई , सिंगापुर, कनाडा शिफ्ट हो जायेंगे जहां हर धर्म के लोगों का स्वागत किया जाता है, इसलिए तो ये देश विकसित हैं ! इसके उलट हम पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान जैसे धार्मिक कट्टर देशों को टक्कर दे रहे हैं ?
जो हिंदू संगठन बिंदी, तिलक के लिये झूठा राजनीति से प्रेरित बवाल खड़ा कर रहे हैं वो क्या इन 15000 बेरोजगारों को रोजगार देने की गारंटी दे सकते हैं ? क्या जो बेरोजगार युवक लेंस कार्ट के शोरूम में तोडफोड़ करने की कोशिश कर रहे हैं उनको कोई भी कॉर्पोरेट कंपनी नौकरी देगी ? क्या इनमें कोई काबिलियत है ? इनकी काबिलियत यही है ये लोग तिलक लगा के सिर्फ पूंजीपतियों का भयादोहन कर सकते हैं या किसी नेता के रहमो – करम पर जिंदा रह सकते हैं ? या रामनवमी के जुलूस में तलवारें लहरा सकते हैं या किसी मस्जिद पर भगवा लहरा सकते हैं या काँवड़िया बन के निर्दोष ट्रक और कार वालों के साथ मारपीट और तोडफोड़ कर सकते हैं ?
हमने सनातन धर्म को संस्कृति से जोड़ दिया है, बिंदी और टीका या कलावा पहनना या मंगलसूत्र पहनना संस्कृति हैं , परंपरा है, मान्यताएँ हैं, संस्कृति का धर्म से कोई लेना देना नहीं होता है , धर्म याने सत्य एवं प्रेम और धर्म याने अहंकार से मुक्ति तक की यात्रा , धर्म याने आत्मज्ञान, समझ और बोध से जीना I ये जो कट्टर हिंदू लेंस कार्ट पर हमलावर हैं उनको क्या मालूम होगा कि हिंदू धर्म की केंद्रीय पुस्तक कौन सी है ? क्या इन्हे निर्वाण षट्कम के बारे में कुछ ज्ञान होगा ? क्या इनको रिभु गीता, अष्टावक्र गीता और श्री कृष्ण रचित भगवदगीता का तनिक भी बोध होगा ? ये जो सनातन का झंडा लिये गुंडागर्दी कर रहे हैं , अगर इनको सनातन या वेदों या उपनिषदों का ज्ञान होता तो जो कर रहे हैं वो नहीं कर रहे होते ??
