संगति कोई ऐसी चीज थोड़ी है कि कोई चीज अगर पसंद आ गयी तो उसे खरीद ली या कोई चीज इसलिए घर में ले आये की उसके दाम अच्छे मिल रहे थे I
शादी होती है तो लड़के – लड़की की ! लेकिन दोनो के मां – बाप बैठ के सौदेबाजी करते हैं, जब व्यापार में सौदेबाजी में उदासीनता आती है तो सिलिंडर फट जाता है I
मुक्ति की उड़ान / भोपाल
नोएडा ( उत्तर प्रदेश) के सिरसा गांव मे निक्की भाटी की जलने से दर्दनाक मौत हो गयी , वही दहेज की कहानी ? सिलिंडर फटने से भारत में हर साल लगभग 7000 महिलाओं की हत्त्या कर दी जाती है याने प्रतिदिन दर्जनों बहुओं की मौत होती है , हर एक घंटे में भारत में अधिकृत रूप से 1 महिला, ( बहू ) दहेज के लिये मार दी जाती है, जला दी जाती है, अनाधिकृत रूप से ये आँकड़ा कई गुना हो सकता है , ये कितना दुखद है , कितना खौफनाक है ! जब मैं ये लेख लिख रहा हूँ तब ना जाने कितने ही तथाकथित सांस्कृतिक हिंदू साधारण परिवार के विपिन ( निक्की का पति ) , दयावती ( निक्की की सास ) और सतवीर ( निक्की का ससुर ) अपनी बहुओं को दहेज के लिये जला कर मारने की कोशिश कर रहे होंगे ! रोज ही दहेज हत्याएं हो रही हैं, हमारे स्वार्थी समाज में ये सब सामान्य हो गया है लेकिन निक्की का मामला इसलिए असामान्य हो गया क्योंकि खौफनाक हादसे का वीडियो मीडिया में वायरल हो गया I
जानकारी के अनुसार निक्की के पिता ने अपनी सामर्थ्य के अनुसार दहेज दिया था, महंगी कार भी दी थी, लेकर मक्कारों , लोभियों का लालची कपटी मन कहां संतुष्टि पाता है ? जब विवाह ( संबंधों ) के केंद्र में पैसा होता है तो प्रेम और करुणा की बात करना बेमानी है ? ये बात समझ के बाहर है कि कैसे एक लड़की किसी ऐसे लड़के के घर जा के बैठ जाती है जो कहता है कि अगर लड़की इतने पैसे देगी तो वो जिंदगी भर साथ रहने को तैयार है ? कितनी भयानक और घृणित बात है ये ? एक लड़की अगर पैसे ले के संबंध बनाये तो उसे वैश्या कहते हैं और अगर एक लड़का पैसे ( दहेज ) लेकर संबंध बनाये तो उसे क्या कहेंगे ? दूल्हा ? प्रेम विहीन शादियों का अंत ऐसे ही होता है जैसे निक्की और विपिन के साथ हुआ, अगर इतना खौफनाक मंजर किसी सौदेबाजी ( लेन – देन ) वाली शादी मे बाहरी रूप से दिख भी नहीं रहा होता है तो अंदरूनी रूप से ऐसे परिवार अवसाद, क्लेश, दुख , बेचैनी में डूबे होते हैं I
दशकों पहले महिलाओं ( बहुओं ) पर अत्याचार इतने बढ़ गये थे कि सरकार को महिलाओं के पक्ष मे नये कानून बनाने पड़े थे , घरेलू हिंसा, दहेज प्रताड़ना के लिये कानून में गैर जमानती धाराएं जोड़ी गयीं लेकिन ना तो समाज से दहेज जैसी कुरुति खत्म हुई ना ही दहेज हत्याएं ? क्या कारण है कि समाज में शिक्षा का प्रचार – प्रसार हो रहा हैं, पैसा भी बढ़ रहा है फिर भी दहेज हमारे कथित संस्कृतिवादी समाज मे अंगद के पैर की तरह विद्यमान है ? इसका मुख्य कारण है हम परंपरावादी, रूढ़िवादी , मान्यतावादी लोग हैं, हम समाज में प्रचलित परंपराओं को जानना, समझना नहीं चाहते, हम अपनी बुद्धि का उपयोग नहीं करते, हम बोधहीन होकर चली आ रही मान्यताओं का सिर्फ अनुसरण करते हैं और यही हम अपने बच्चों को भी मानने के लिये विवश करते हैं I शादी हो या दहेज परंपरा ही तो हैं ? तुम्हारे पुरखे अगर दहेज लेते – देते थे तो क्या तुम भी शादी ब्याह में दहेज लोगे या दोगे ?
दरअसल बात ये है कि औसत हिंदुस्तानी कितने भी शिक्षित हों जाएं लेकिन स्वार्थ वश परंपराओं, मान्यताओं, रूढ़िवादिता में उलझे रहना चाहते हैं, हमारे देश के रक्षामंत्री रफेल जैसे उन्नत तकनीक वाले युद्धक विमान का स्वागत नींबू – मिर्ची टांगकर करते हैं ? प्रधानमंत्री पूरे महिमामंडन के साथ गंगा में मोक्ष प्राप्ति के लिये डुबकी लगाते हैं, क्या ये अंधविश्वास , मान्यताओं और रूढ़ियों का बढ़ावा देना नहीं है ? हिंदुस्तान में बिना ज्ञान के पैसा आ गया है, भले ही विदेश में रह रहे हों या लाखों रुपए महीने के कमा रहे हों लेकिन अज्ञानता के कारण अंधविश्वास, कुरुतियो और परंपराओं में अभी भी उलझे हुए हैं I प्रयागराज – महाकुंभ में हजारों – लाखों रुपए प्रतिदिन किराये पर पांच सितारा टेंट ऐसे ही अनपढ़ अमीर मूर्खो के लिये ही तो बनाये गये थे ?
चाहे लड़का हो या लड़की, संगति सोच समझ से , बोध से करनी चाहिए, संगति कोई ऐसी चीज थोड़ी है कि कोई चीज अगर पसंद आ गयी तो उसे खरीद ली या कोई चीज इसलिए घर में ले आये की उसके दाम अच्छे मिल रहे थे , दुर्भाग्य से हमारे ज्यादातर मध्यमवर्गीय हिंदी भाषी संस्कृतिवादी परिवारों में दहेज जैसी कुरुतियाँ आज भी धड़ल्ले से जारी हैं, शादी होती है तो लड़के – लड़की की ! लेकिन दोनो के मां – बाप बैठ के सौदेबाजी करते हैं, जब सौदा तय हो जाता है तो सौदागर ऐसे व्यहवार करते हैं जैसे दोनों परिवारों में अपार स्नेह हो, प्रेम हो, सत्य हो, करुणा हो लेकिन सच तो ये होता है कि उनके बीच एक प्रेमहीन, स्वार्थपूर्ण, लूटने – खसोटने वाले व्यापारिक संबध के अलावा कुछ नहीं होता और जब व्यापार में सौदेबाजी में उदासीनता आती है तो सिलिंडर फट जाता है लेकिन हर जगह कंचन ( निक्की की बहन ) नहीं होती जो दर्दनाक जलती निक्की का वीडियो बना ले और निक्की की रूह कंपा देने वाली चीखें रेकॉर्ड कर ले I
