धुरंधर 2 के साथ साथ धुरंधर 94 भी देखिये , हर स्टॉक एक्सचेंज में ये फिल्म लगी है, हर उस स्टूडेंट के माथे पे देख सकते हो जो अमेरिका या विदेश पढ़ने जाना चाहता है, हर उस नागरिक के चेहरे पर नजर आ रही है जो अपनी स्कूटर, कार में ईंधन भराता है या रसोई में LPG उपयोग करता है या हर उस उद्योगपति के आँखों में दिख रही है जो क्रूड ऑइल से अपने माल का निर्माण करता है ! एक चाटुकार फिल्म निदेशक आदित्य धर क्रिएटिव फिल्म बनाने के बजाय अपनी कला – कौशल को राजनीतिज्ञों के हाथों बेचकर प्रोपेगेंडा फिल्म बनाने में लगा हुआ है, जैसे कोई व्यापारी मुनाफे के लिये अपने सिद्धांतों से समझौता कर रहा हो , ये तो ऐसी ही बात हुई कि कोई व्यापारी शाकाहारी भोजनालय बंद कर अपने सनातनी धर्म से समझौता कर ले और मासूम बकरों और मुगोँ को अपना पेट भरने के लिये काटने लग जाये ? ये करोड़ों बकरे जो खुशी खुशी सिनेमा हॉल की तरफ भाग रहे हैं ना इनको मालूम ही नहीं कि सिनेमा हॉल में इनको सफेद झूठ परोसा जा रहा है , सिनेमा हाल बकरों को हलाल करने की भट्टी है जिसमें इन मासूम बकरों को तपाया जायेगा ताकि समय के साथ और जरूरत के हिसाब से इनकी बलि ली जाये और बलि लेने के पहले इनके सोचने समझने लायक इंद्रियों को सुन्न कर दिया जायेगा और फिर धुरंधर के निर्माता – निदेशक सत्ता में बैठ के तोंद फुलायेंगे और अट्टाहस करेंगे I
मोदी जी ने ही 2013 में कहा था कि ” जिस तरह अमेरिकन डॉलर मोटा होता जा रहा है और डॉलर के मुकाबले रुपया पतला होता जा रहा है, विश्व व्यापार में भारत टिक नहीं पायेगा, व्यापारी रुपए के इस गिरावट को सह नहीं पाएंगे “, मोदी जी तत्कालीन प्रधानमंत्री को आगाह कर के कहते थे कि रुपए की गिरावट का सिर्फ आर्थिक कारण नहीं है बल्कि कांग्रेस की भृष्ट राजनीति का परिणाम है ! मोदी जी सत्ता में आने के पहले ये भी कहते थे कांग्रेस सरकार और रुपए में स्पर्धा चल रही है कि किसकी आबरू कितनी तेजी से पहले गिरती है ? मोदी जी ने 2014 में जब सत्ता सम्हाली थी तब डाॅलर का रेट 61 रुपए था और 11 साल बाद 55 प्रतिशत बढ़कर 94 रुपए हो गया है I मोदी जी दूरदर्शी हैं उन्होंने सही कहा था लेकिन उनको वो टीम नहीं मिल पायी जो रुपए को डॉलर के मुकाबले मजबूत कर सके, मोदी जी का विजन था कि भारत देश को आत्मनिर्भर और सामर्थ्यवान बनाना है लेकिन कहां चूक हुई ये शायद मोदी जी भी नहीं समझ पा रहे हैं ? उनकी नजर ना तो IFS हरदीप पूरी पर जाती है ना ही IFS एस. जयशंकर पर जाती है और ना ही अजित पवार पर गयी ना हेमंत बिस्वा शर्मा पर नजरें इनायत हुई , कौन है जो देश की आबरू को रसातल में ले जा रहा है ?
आज अमेरिकन डॉलर 94 रुपए हो गया, जी हां 94 रुपए का ! ये डॉलर बढ़ने से क्या फर्क पड़ता है ? हमारे देश के 100 करोड़ लोगों को इससे क्या लेना देना ? 100 करोड़ लोग तो बमुश्किल पेट भरने लायक कमा पाएँ ये भी उनके लिये कठिनाई भरा काम है ! मोदी जी कहते थे कि हम विश्व व्यापार में पिछड़ जायेंगे बल्कि सच तो ये है कि विश्व व्यापार में हमारा कभी कोई स्थान रहा ही नहीं , इसके अलावा फर्क उन उद्योगपति और व्यापारियों को भी पड़ता है जो विदेशों से सामान आयात – निर्यात करते हैं और फर्क उनको भी पड़ेगा जिनके बच्चे उच्च शिक्षा हेतु अमेरिका जाते हैं और फर्क कच्चे तेल की कीमतों पर भी पड़ेगा क्योंकि भारत 90% प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है और दुनिया को US डॉलर में भुगतान करना होता है I शर्मनाक बात है कि भारत में दुनिया की 17% जनसंख्या रहती है और हम दुनिया को सिर्फ बमुश्किल 3% सामान निर्यात करते है वहीं बराबरी की जनसंख्या वाला चीन दुनिया को 20% माल निर्यात करता है, जब हमारा निर्यात ही नहीं है तो डाॅलर कहाँ से आयेगा ? यही कारण है कि रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया सोना बेच के डॉलर खरीद खरीद कर रुपए को डूबने से बचा रहा है , लेकिन स्थिति बद से बदतर होती जा रही है, ये स्थिति इसलिए है कि भारत ऐसा कुछ भी निर्माण ही नहीं करता जिसकी वैश्विक मांग हो ? हम दुनिया को कुछ कच्चा माल , मिनेरल्स और टेक्सटाइल आदि निर्यात करते हैं जिसमें भी हमारा कोई एकाधिकार नहीं है , बांग्लादेश, वियतनाम भी टेक्सटाइल निर्यात में हमें टक्कर दे रहे हैं !
आज अमेरिकन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप क्यों तब जब हमारे आंतरिक मामलों में दखल देता है ? ऊलजलूल टेरिफ लगा रहा है, क्रूड ऑयल हम कहाँ से खरीदें या ना खरीदें इसका हुक्म देने वाला डोनाल्ड ट्रंप कौन होता है ? क्या हमको अमेरिका ने आर्थिक गुलाम बना लिया है ? भारत झुकने को इसलिए मजबूर है क्योंकि भारत में कोई सामर्थ्य ही नहीं ? अमेरिका जो H1B वीसा आवंटित करता है उसमें से 75% हिंदुस्तानियों को आवंटित किया जाता है, और डोनाल्ड ट्रंप ने H1B वीसा की फीस 100 गुना बढ़ा दी है क्योंकि अमेरिका जानता है कि भारतीय युवाओं का भविष्य भारत में नहीं है, वो कितनी भी फीस बढ़ा दे हिंदुस्तानी झक मार के ट्रंप के सामने दुम हिलायेंगे I भारत में ना तो सुरक्षा है ना रोजगार है, ना शिक्षा है, घटिया जीवन स्तर है और शून्य सिविक सेंस है I दूसरी तरफ भारतीयों के अलावा दुनिया का कोई भी देश अमेरिका जाने के लिये पागल नहीं है, चीन ने तो अपनी शिक्षा व्यवस्था को विश्वस्तर का बना लिया है, अब बुद्धिमान , तकनीकी और प्रौद्योगिकी में निपुण चीनी युवा देश में ही ए. आई और सामरिक हथियारों के विकास में आपने देश में बेहतरीन योगदान दे रहे हैं एवं चीन के विकास में सहयोग कर रहे हैं ?
हमारे पास हमारा कुछ नहीं, सामरिक क्षेत्र में भी हम सब कुछ बाहर से खरीदते हैं, भारत ने एक तेजस फाइटर प्लेन बनाया था उसका भी इंजिन हमने अमेरिका से आयात किया है, कल अमेरिका तेजस के इंजिन देने से मना कर सकता है ? क्यों नहीं कर सकता ? पाकिस्तान हमसे जनसंख्या में 7 गुना छोटा है और आर्थिक रूप से 8 गुना कमजोर है लेकिन फाइटर प्लेन पाकिस्तान के पास 26 हैं और भारत के पास 29 ? यही कारण है कि छोटे छोटे देश भारत को आँख दिखा रहे हैं भारत अपनी साख खोते जा रहा है, जब अमेरिका हमें आँख दिखाता है तो हम चीन की गोद में बैठने की कोशिश करते हैं, जबकि भारत को मालूम है ” ऑपरेशन सिंदूर ” के पीछे कौन पाकिस्तान को शय दे रहा था ?
भारत कोई निर्माण करे ना करे , कोई अनुसंधान या अन्वेषण करे ना करे लेकिन भारत में रोज नये नये पाखंडी बाबा जरूर पैदा हो रहे हैं, नये मंदिर, नये नये महालोक, कृष्ण पथ, राम पथ का निर्माण किया जा रहा है, रोज कोई ना कोई बाबा या पाखंडी कथा वाचक बलात्कार या यौन शोषण में फंस रहा हैं, नेता भी रोज किसी ना किसी पाखंडी के पूज रहे होते है या अंधविश्वास, रूढ़िवादिता या संस्कृति के नाम पर कुरुतियों , परंपराओं को बढ़ावा देने मे लगे रहते हैं I मोदी जी को समझना चाहिए कि भारत को विश्वस्तरीय शिक्षा चाहिए, वैज्ञानिक सोच चाहिए, युवाओं को देश में रोक के रखना होगा , हम देश को सामर्थ्यवान तब तक नहीं बना सकते जब तक देश के प्रबुद्ध नौजवानों को देश में अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनुसंधान, अन्वेषण का माहौल ना मिले, पूरी दुनिया हमारे दिमाग का इस्तेमाल हमारे ही खिलाफ कर रहे हैं इसको समझना होगा I
