बिहार नालंदा में शीतला माता मंदिर में भगदड़ से 8 महिलाएं मिला कर 9 लोग मर गये , पिछले एक साल में ही मंदिरों या पाखंडी बाबाओं के सत्संग में सैकड़ों घोर अज्ञानी श्रद्धालु बेमौत मर गये, हाथरस मे एक पाखंडी नारायण साकार हरि (भोले बाबा) के पाखंड में 120 महिलाओ की बलि चढ़ गयी , प्रयागराज के कुम्भ में 30 श्रद्धालु मारे गये , बालाजी तिरुपति में 6 लोग मर गये, शिरगांव में, पुरी रथ यात्रा में भी दर्जनों श्रद्धालु मौत के घाट उतर गये ! हिंदुस्तान एक अजीब किस्म का स्वयंभू विश्व गुरु है, मान्यताओं, रूढ़िवादिता, जादू – टोना, कुरुतियों, धार्मिक आस्थाओं, अंधविश्वास का विश्व गुरु है और अनपढ़ों, बलात्कारियों, बेईमानों, भृष्टाचारियों, लालचियों, चाटुकारों एवं माथे पे टीका लगाए अधर्मियों का विश्वगुरु है और हां, ढोंगियों, पाखंडियों, बाबाओं, कपटी धूर्तों और बगुला भगतों का विश्व गुरु है I
मणिपुर की सड़कों पर नग्न महिलाओं की चीखें अभी मंद भी नहीं पड़ी थीं कि नालंदा बिहार में एक महिला को सड़क पर नोचते नरबक्षियों की हृदय विदारक वीडियो वायरल है और महिला की दिल दहलाने वाली चीत्कार पूरे देश में गुंजायमान हैं, ये लोकतांत्रिक भारत है या तालिबानी तानाशाही की हुकूमत ? बुद्ध के देश में ऐसी अराजकता की कल्पना करने से भी दिलो – दिमाग सिहर उठता हो वो अब हकीकत में हो रहा है ! एक राजनीतिक रसूखदार पाखंडी ज्योतिष अशोक खरात अंधविश्वास के नाम पर सैकड़ों महिलाओं का यौन शोषण करता है , दोष अशोक खरात का नहीं, दोष मान्यताओं, परंपराओं पर टिकी हमारी संस्कृति का है , क्योंकि हम जानने में नहीं मानने में विश्वास करते हैं , फलां मंदिर, फलां दिन जाने से कामनाएं पूरी होती हैं, फलां देवी के मंदिर में चिंदी बांध के आने से फलां इच्छा पूरी होती है, क्या बकवास हैं ? हमारी धार्मिक आस्थाओं को कामनाओं से जोड़ दिया गया है ! अशोक खरात ने महिलाओं की इसी आस्था को तो अपनी कामना पूर्ति का साधन बनाया और तरह तरह से शोषण किया और अंधविश्वासी मूर्ख महिलाओं के साथ शारीरिक संबंध बनाये I
कामुक पाखंडी बाबाओं और धार्मिक कथावाचकों के घिनौने किस्से तो हिंदुस्तान में बिखरे पड़े हैं , फिर भी जनता क्यों इनके आश्रम में, इनकी कथाओं में जाती है ? क्यों धार्मिक श्रद्धालु अपने घर की महिलाओं को इन कपटी, धूर्त पाखंडियों को इनकी काम वासना शांत करने के लिये सौंप देते है ? क्यों सरकार इन वासनाओं में लिप्त कथित बाबाओं के आश्रम पर छापा नहीं मारती, कोई भी मुंह उठाकर भविष्य दृष्टा बन जाता है, कोई भी अनपढ़ धार्मिक कथाएँ सुनाने लगता है, कोई भी जीभ निकाल के खुद को भगवान का अवतार बताने लगता है, सरकार को बाबागिरी के लिये लाइसेंस प्रक्रिया बनानी चाहिए, कुछ नियम कायदे बनाने चाहिए, न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता, पुलिस वेरिफिकेशन , धार्मिक कथा करने के लिये योग्यता का पैमाना बनाना होगा !
लेकिन इसके उलट हमारे नेता अंधविश्वास फैला रहे तथाकथित धार्मिक गुरुओं के पैरों में दंडवत हैं, चाहे वो बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री हो या कुबेरेश्वर धाम के प्रदीप मिश्रा हों या छुटभइये धर्म के कथावाचक हों या घटिया धार्मिक बाबा , सब वोटों का खेल है, फेसबुक पर नेताओं के फोटो मिल जायेंगे कि फला मंदिर में माथा टेका , नदी किनारे फलां देवी के नाम पर नारियल फोड़ा, विदेश में हमारे नेता फाइटर प्लैन में नींबू – मिर्ची लटका रहे हैं , नेता क्या , ISRO के वैज्ञानिक भी अंधविश्वास को बढ़ावा दे रहे हैं ? तो कैसे रुकेगा धर्म के नाम पर अपराध ? रोज धर्म के नाम पर नीचता की हदें पार हो रहीं हैं, रोज महिलाओं पर अत्याचार बढ़ रहे हैं लेकिन चारों तरफ शमशान सी शांति छाई है I
नालंदा में सड़क पर एक महिला को नोचते राक्षसों की किसी ने भी निंदा की ? औरतों की आबरू लूटने वाले अपराधी अशोक खरात की किसी ने निंदा की ? किसी सामाजिक संगठन, , किसी महाराष्ट्र के नेता ने या महिला आयोग ने या किसी महिला नेता ने या कोई महिला सशक्तिकरण का ढिंढोरा पीटने वाली महिलाओं या संस्थाओं ने कोई विरोध दर्ज कराया ? सबको सांप सूंघ गया है, भारत हर क्षेत्र में पिछड़ता जा, रहा है, हम पाषाण युग की तरफ बहुत तेजी से जा रहे हैं, जंगल राज की तरह ताकतवर लोग, कमजोरों का शोषण करेंगे, भूखे – नंगे – पीड़ित – धार्मिक – कमजोर लोग अपना वोट दे देकर शोषित होते रहेंगे ! भारत को एक वृहद क्रांति की सख्त जरूरत है I
