हले पार्ट में आपने मेरे इंटरव्यू लेटर की कहानी अवश्य ही पढ़ी होगी , अब आगे पढ़िये …
लिफ्ट से बाहर निकला तो जो नजारा देखा वो मेरी सारी कल्पनाओं से परे था, ब्रांडेड कपड़े पहने दर्जनों केंडिडेट एक लंबे से कॉर्रिडोर में बैठे थे, सभी वही इंटरव्यू देने आये थे जो शायद मैं देने आया था, चमकते जूते, हाथ में बड़ी बड़ी कारों की चाबियाँ घुमाते युवाओं का आत्मविश्वास देखते ही बनता था, मैं डरता हुआ, सकुचाता हुआ एक खाली कुर्सी देख के बैठ गया और अपने बुझते विश्वास को उठाने की कोशिश करने लगा, कुछ समय बाद जब मेरा थोड़ा विश्वास जागा तो मैंने एक उम्मीदवार से पूछा कि इंटरव्यू देने आये हो ? वो बोला जी, मैने पूछा किस पोस्ट के लिये ? वो बोला सीनियर जर्नलिस्ट के लिये, मैने फिर हिम्मत कर पूछा , कौन से कॉलेज से पढाई की है ? वो बोला गलगोटिया यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में स्नातक किया है I
गलगोटिया यूनिवर्सिटी से ? वही रोबोट वाली ? उसने मुझे घूर के देखा और बोला और तुमने ? मैने कहा माखनलाल यूनिवर्सिटी से मास्टर इन जर्नलिस्म किया है, अभी मजबूरी में फ्रीलांसर हूं और किसी ब्रांड से जुड़ना चाहता हूं ! कैसी मजबूरी ? उसने जिज्ञासा से पूछा ? मैंने कहा कि अपने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया तो कहीं टिक नहीं पाया, लेकिन जिम्मेदारियों के बोझ तले ऐसा दबा की स्वतंत्र पत्रकारिता करते करते कब मेरे उसूल मेरी मजबूरियों के आगे शहीद हो गये पता ही नहीं चला और पूरी तरह शहीद उसूलों को लाचारी की जमीन में गाड़ के आज सिद्धांतहीन और चाटुकार पत्रकारिता की दुनिया से जुड़ने आ गया हूं I आगे बढ़ा तो मालूम चला कि देश की नामचीन यूनिवर्सिटी और कॉलेज से नहीं विदेशों से जर्नलिस्म का कोर्स किये हुए युवा इंटरव्यू देने आये थे !
कोई बड़े नौकरशाह का बेटा था , कोई बड़े अधिकारी का बेटा था तो कोई प्रोफेसर का, मैंने सोचा कि इनके सामने मैं कहां टिक पाऊंगा ? निराशा से भरा हुआ मैं अपनी बारी का इंतज़ार करने लगा ! मेरा नाम पुकारा गया तो मैं अपना 3 पीस सूट को ठीक करता हुआ इंटरव्यू रूम में पहुंचा तो देखा 3 लोग बैठे थे , आवाज सुनाई दी ” आइये मिस्टर सोनी, have a seat ! मैं बैठ गया, कुछ औपचारिक बातों के बाद नीली टाई वाला बोला , कितनी सैलरी की उम्मीद कर रहे हैं आप ? मैंने डरते हुए बोला सर तीस हजार, वो चमकती हुई आँखों से बोला ज्यादा नहीं है ? मैंने कहा कम कर दीजिये, पच्चीस फाइनल ! नीली टाई वाला जोर से हंसा और बोला done ! लेकिन हमारे चैनल की कुछ modus operandi याने विशेष कार्य प्रणाली है , जिनको आपको फॉलो करना पड़ेगा ! मैंने जिज्ञासा वश पूछा कैसी कार्यप्रणाली ?
नीली टाई के बगल में बैठा लाल कोट वाला बोला, देखिये ये तो आप जानते ही हैं कि हमारा चैनल देश का नंबर 1 न्यूज़ चैनल है , लेकिन हमारा काम देश के लोगों को देश के सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक हालात की सही और ताजा जानकारी देना नहीं है और ना ही शिक्षा , स्वास्थ्य, रोजगार की स्थिति की सत्य सूचना देने की जिम्मेदारी है, ये समझ लीजिये हमारा काम लोगों को असल खबर देना नहीं बल्कि इसके उलट हमारा काम असल खबरों को छुपाना है लोगों का ध्यान वास्तविक खबरों और सूचनाओं से भटकाना है, समझ रहे हैं ना मिस्टर सोनी ? मुझे थोड़ा विचलित देख कर लाल टाई वाला बोला ठीक है हम आपको 30000 देंगे ? अब तो खुश हो ना मिस्टर सोनी, मैंने कहा जी, कब से आना है ? वो बोले कल से आ जाओ, 15 दिन की ट्रेनिंग होगी उसके बाद आपके लिये खुला आसमान होगा !
मैं बाहर निकला, कॉर्रिडोर में आवाज आई कि कोई 1 लाख की नौकरी को तीस हजार में करने को तैयार हो गया ? कैसे कैसे भिखमंगे आ गये हैं पत्रकारिता में .. मैं मन ही मन बुदबुदाया कि इनको कौन समझाए कि भिखमंगा मैं नहीं , वो पूँजीपति हैं जिनकी पैसों की भीख कम ही नही होती जो करोडो लोगों के भविष्य के साथ खिलवाड कर रहे हैं , देश और समाज को भ्रमित कर रहे हैं ! इनके लालच ने सत्य और ईमानदारी के लिये कोई जगह ही नहीं छोड़ी है , इन्होेंने ही तो मेरी और मेरे जैसे ना जाने कितने पत्रकारों की देश और समाज में बदलाव लाने की सोच को पराधीनता और चाटुकारिता मैं बदल दिया है, मैं भारी कदमों से उस आलीशान मीडिया हाउस से बाहर निकल रहा था, पीछे मुड़कर देखा तो मुझे वो बिल्डिंग नहीं बल्कि पीतल का पिंजरा दिखाई दे रही थी, घुटन, बेचैनी, परतंत्रता मेरा इंतज़ार कर रही थी, कुछ पाने की खुशी गायब हो चुकी थी और जो खो के आया था उसका दुख असीम था I
