हिंदुस्तान के नेता क्यों देश में शिक्षा को बढ़ावा देंगे ? शिक्षा से ज्ञान, बोध और समझ आती है और अगर मतदाता शिक्षित हो गया तो नेता वोटर्स को झूठ के झांसे में कैसे फंसायेंगे ? बात झूठ की है तो बात गलगोटिया यूनिवर्सिटी की तो आयेगी ही, बताया जा रहा है कि गलगोटिया यूनिवर्सिटी नोएडा द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विकास के लिये 350 करोड़ रुपए का निवेश किया गया है और सैकड़ों करोड़ के निवेश से 2800 US डॉलर याने 2.50 लाख रुपए का एक ओरियोन याने AI डॉग रोबोट चीन से खरीदा गया और उसे भारत मंडपम में चल रही AI समिट दिल्ली में गलगोटिया की ब्रॅैंडिंग कर के सजा – धजा कर पेश किया गया ! गजब बेशर्मी है, नेता झूठ बोल रहे, मंत्री झूठ बोल रहे, नौकर शाह हां में हां मिला रहे, सारा पूँजीपति मीडिया झूठ बोल रहा है, सारे पाखंडी धर्मगुरु अधर्म की बातें कर रहे हैं तो गलगोटिया यूनिवर्सिटी भला क्यों पीछे रहती ? उन्होंने तो सफेद झूठ नहीं बल्कि कुत्ता टाइप झूठ बोला है जिससे पूरी दुनिया को पहले शक था लेकिन अब यकीन हो गया है कि पूरा हिंदुस्तान जुगाड़ और खोखले झूठे दावों का मसखरा बन के रह गया है I
हम तो स्वयं भू विश्व गुरु हैं, AI आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तो चीन और अमेरिका जैसे मरियल देशों का शगूफा है हम तो NI नेचरली इंटेलिजेंट हैं, हम को AI से क्या लेना देना ? चीन बनाये आर्टिफिशियल कुत्ता, हमने तो हजारों साल पहले ही महाभारत में इंटेलिजेंट कुत्ते का कांसेप्ट दुनिया को बता दिया था I हमें रिसर्च या अनुसंधान से क्या लेना देना ? हमारे बाबा तो ओम भूर भुवा स्वाहा कर के सारे अनुसंधान मिनटों में पूरा कर देते हैं I पश्चिम में एस्ट्रोनॉट होता है जो अंतरिक्ष में अनुसंधान करता है और हिंदुस्तान में एस्ट्रोटॉक होता है जिसके दुनिया भर के ग्रहों से अंतरंग संबंध होते हैं I भारत में शिक्षा व्यवस्था जर्जर है, पूरी दुनिया में टॉप 200 यूनिवर्सिटीज में भारत की एक भी यूनिवर्सिटी नहीं है, 140 करोड़ के देश में ऐसी दयनीय हालत है, ना नेताओं को शर्म आती है ना अशिक्षित जनता को लज्जा आती है I दुनिया को सामरिक हथियारों जैसे मिसाइल, युद्धक विमान का ज्ञान तो हमने हजारों साल पहले ही दे दिया था जब चंद्रहास, अग्निबाण नाम के मिसाइल श्री राम और रावण ने चलाये थे और पुष्पक विमान को दुनिया कैसे भुला सकती है ? आज पूरी दुनिया हमारी ही तो नकल कर रही है ?
अमेरिका, रूस, चीन , फ्रांस, जर्मनी विश्व के अग्रणी हथियार निर्माता और निर्यातक देश हैं और एक छोटा सा देश इसरायल विश्व का 8 वां सबसे बड़ा हथियारों का निर्माता और निर्यातक देश है और भारत क्या करता है ? भारत इन देशों को टेक्नोलॉजी देता है , प्रेरणा देता है लेकिन ये बात अलग है कि भारत इन्हीं देशों से हथियार खरीदता है, हमारे सारे दावे खोखले हैं, हमारे साथ आजाद हुए छोटे छोटे देश सिंगापुर, मलेशिया, साउथ कोरिया, वियतनाम और चीन भी हमसे बहुत आगे निकल गये क्योंकि उन्होंने शिक्षा को महत्व दिया और हम गलगोटिया यूनिवर्सिटी जैसे घटिया शिक्षा संस्थानों के झूठे दावों में अटके हुए हैं I ज्ञान तो हमारे देश में गाली है, ज्ञान छोड़कर भारत भृष्टाचार में, भुखमरी में, बलात्कार में, प्रदूषण में, गंदगी में, जुगाड़ में , झूठ बोलने में पूरी दुनिया में अग्रणी देश है I
ज्ञान, शिक्षा, रिसर्च से हमारा कोई सरोकार नहीं है तभी तो गलगोटिया यूनिवर्सिटी जैसी थर्ड क्लास यूनिवर्सिटी हमारे नेताओं के रहमों करम पर स्थापित हो रही हैं , पूरा हिंदुस्तान जाति, ऊंच – नीच, परंपराओं, रूढ़िवादिता, लोकधर्म और अंधविश्वास मे डूबा हुआ है, हमे क्या जरूरत है अनुसंधान की ? हमारी सभ्यता तो करोड़ों साल पुरानी है, हम तो हर तरह की रिसर्च कर के छोड़ चुके हैं ? यही तो कारण है कि 125 साल पुराने नोबेल प्राइज़ अभी तक लगभग 1000 विभूतियों को दिया जा चुका है लेकिन भारत को मिले हैं सिर्फ 9 , उसमें से आधे तो अनिवासी भारतीय थे I क्या करता था अल्फ्रेड नोबेल ? डायनामाइट लगा के पहाड़ ही तो तोड़ता था, अरे हमारे पुरखे तो फूंक के ही पहाड़ तोड़ देते थे ? नोबेल प्राइज़ अनुसंधान के लिये दिया जाता है , अनुसंधान कौन करता है ? जो जानना चाहता है, लेकिन हम तो सब जानते हैं, हमारा समाज तो मान्यता, श्रद्धा, आस्था, परंपरा और रूढ़ियों पर चलता है, हमेँ क्या जरूरत है रिसर्च की ? नोबेल प्राइज़ मिलता है यूनिवर्सिटी को, अमेरिका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी को अभी तक लगभग, 170 नोबेल प्राइज़ मिल चुके हैं और हमारी गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने तो बेशर्मी की सारी हदें पार कर के चीन से आयातित AI मॉडल का प्रदर्शन ही कर डाला, ऐसे शिक्षा संस्थानों को, इनसे जुड़े लोग को गंभीर अपराध में जेल के सीखचों के पीछे डालना चाहिए , शिक्षा के साथ बेईमानी देश द्रोह की श्रेणी में आना चाहिए .. सोनम वांगचुक जैसे शिक्षाविद , वैज्ञानिक को जेल और फर्जी गलगोटिया यूनिवर्सिटी को सैकड़ों करोड़ रुपए .. बहुत नाइंसाफी है ये I
