आपके घर में विपत्ति आई हो, आपके परिवार जनों पर झूठे केस लगाकर , जेल में डाल दिया गया हो और आपका एक अजीज भाई , साथी, जिसको आपने अपना मानकर पद और सम्मान दिया हो, सांसद बनाया हो , नाम और शोहरत दी हो और वो आपकी जरूरत के समय आपके साथ ना खड़ा हो और अय्याशी करने विदेश भाग जाये , साथ तो छोड़िये वो अहसान फरामोश शख्स के मुंह से आपके पक्ष में संवेदना के दो शब्द ना निकलें और ना ही शत्रु के लिये कोई चुनौतीपूर्ण विरोध के स्वर सुनाई दें तो क्या ये कृत्य क्षम्य योग्य है ? राघव चड्ढा आम आदमी पार्टी के राज्य सभा सांसद हैं, उनको राज्य सभा सांसद किसने बनाया ? अरविंद केजरीवाल ने ना और आज बिके हुए राघव चड्ढा को अरविंद केजरीवाल ने उसकी औकात बताई तो बिलबिला रहा है ?
जब पार्टी पर मुसीबत आई तो ये विरोधियों से मिलकर ( बिककर ) ऐसे अंजान बना रहा जैसे पार्टी के साथियों के जेल जाने का मतलब जॉगिंग करना हो, जेल जाने से ये डरा हुआ तथाकथित नेता राघव चड्ढा विदेश भाग गया और भगोड़ा हो गया और जब खतरा टल गया तो वापिस आकर तटस्थ ( न्यूट्रल ) होने का नाटक कर बे सिरपैर के मुद्दों पर बात करने लगा ! ये तो बात वैसे ही है जैसे आपके घर में कोई मृत्यु शैया पर लेटा हो और आपके प्रिय साथी को मालूम हो कि घर में परिस्थितियाँ गंभीर हैं और वो बात करे कि मौसम कितना सुहावना है ? ये मोबाइल वाले लूट रहे हैं या एयरपोर्ट पर समोसे – कचोड़ी कितने महंगे हैं ? अरे भाई तुझे संसद में भिजवाया है किसी हाउसिंग सोसाइटी का अध्यक्ष नहीं बनाया था !
ये तो वही बात हो गयी कि गद्दार जयचंद ने पृथ्वीराज चौहान से गद्दारी कर मोहम्मद गौरी का साथ दिया, जयचंद की गद्दारी का कारण तो संयोगिता थी ? राघव चड्ढा की गद्दारी के पीछे कौन सी संयोगिता है ? या गद्दारी का कारण जेल जाने का भय था ? आज राघव चड्ढा के राजनीतिक जीवन का रिमोट कंट्रोल किसी और के पास है और आने वाले वक़्त में निश्चित ही राघव चड्ढा सिर्फ एक मोहरा बन कर रह जायेंगे , राघव चड्ढा जैसे मौकापरस्त कितने ही लोगों ने डर या लालच के चलते अपनी पार्टी को धोख़ा दिया लेकिन वो अवसरवादी लोग कहीं के नहीं रहे ! एक वक़्त ज्योतिरादित्य सिंधिया मध्यप्रदेश के मुख्य मंत्री पद के दावेदार थे आज अपने ही लोगों को निगम – मंडलों में नियुक्ति दिलाने के लिये संघर्ष कर रहे हैं ?
आने वाले समय में राघव चड्ढा के हाल नौटंकीबाज कुमार विश्वास से भी बदतर होंगे, कुमार विश्वास के हाल तो मुरादाबादी लौटे को भी शर्मिंदा कर रहे हैं, पता नहीं कब कहां पलटी खायेगा उसको खुद को पता नहीं होता है, आत्मकेंद्रित कुमार विश्वास के ऊपर तो प्रभु श्री राम की कृपा बनी हुई है अन्यथा कुमार विश्वास अपना विश्वास पूर्णता खो चुके हैं ! राजनीति संघर्ष मांगती है, राजनीति धैर्य और संयम मांगती है, राजनीति निडरता मांगती है और जिसके पास साहस नही, संघर्ष करने की क्षमता नहीं उसके लिये तो यही कहा जा सकता है कि जो डर गया, समझो वो मर गया ! समयपरस्त लोगों को हो सकता है कुछ समय के लिये फायदा मिल जाये लेकिन वक़्त के साथ ऐसे लोग समय की धूल बन के रह जाते हैं !
