दीपक जोशी पूर्व में शिवराज सरकार में शिक्षा एवं कौशल विकास मंत्री रहे हैं, तीन बार के विधायक रहे हैं साथ ही भाजपा के पूर्व मुख्य मंत्री कैलाश जोशी के सुपुत्र हैं, भाजपा इनके घर की पार्टी रही है, 2020 – 21 में दीपक जोशी की भाजपा से अनबन हो गयी और दीपक जोशी कांग्रेस में शामिल हो गये और उपचुनाव में कांग्रेस की टिकट से खातेगाव से चुनाव हार गये I कुल मिलाकर उसके बाद दीपक जोशी के राजनीतिक कॅरिअर पर प्रश्न चिन्ह लग गया ? उसी दौरान कोविड में उनका पत्नि का भी देहांत हो गया था ! अचानक 4 दिसंबर 2025 को सोशल मीडिया पर दीपक जोशी और कांग्रेस की पूर्व प्रदेश सचिव पल्लवी राज सक्सेना की शादी की खबरें वायरल हो गयी, उसके बाद विवाद का दौर शुरू हो गया, नम्रता जोशी और शिखा जोशी नाम की दो महिलाएं भी अपने आपको दीपक जोशी की पत्नि बताते हुए सोशल मीडिया में सामने आ गयीं !
दीपक जोशी जैसे अनेकों लोग हैं जो इन अवैध संबंधों की दलदल में गले तक फंसे हुए हैं, ज्यादातर ऐसे लोग इन चक्करों में फंसते हैं जिनके जीवन में संघर्ष नहीं होता, कोई सार्थक लक्ष्य नहीं होता, जो कुछ भी पाया होता है वो बिना किसी संघर्ष के मिला होता है, पिता की विरासत के चलते आसानी से दीपक जोशी विधायक बन गये और मंत्री पद तक पहुँच गये ! पूर्व मुख्य मंत्री के सुपुत्र थे तो उनके आसपास छुटभैये नेता, चाटुकार , चमचे रहते ही होंगे, जिसमें महिलाएं भी होती होंगी, सत्ता का, पद का, ताकत का, पैसों का अहंकार इतना प्रबल होता है कि ऐसा लगता है कि कोई भी उनका कुछ बिगाड़ नहीं सकता, फिर शुरू होता है अय्याशी और भोग विलास का दौर .. जब तक सत्ता थी तो सब कुछ ठीक था, लेकिन जब समय साथ नहीं देता तो कहते हैं ना कि अपना साया भी धोख़ा दे देता है I
मनुष्य जीवन इसलिए नहीं मिला है की पैसे के लिये अंधी दौड़ लगाओ, विपरीत लिंगी के पीछे पशुओं की तरह भागम – भाग करो , चेतना युक्त इंसान हो तो विवेक, बोध और समझ से जीवन जीना होगा, क्या दीपक जोशी पहले से ही बंधन में नहीं थे , शादी शुदा थे, बच्चे भी होंगे, फिर 63 साल की उम्र में 20 साल छोटी पल्लवी राज सक्सेना से शादी करने की क्या मजबूरी रही होगी ? दो महिलाओं और सामने आ गयीं हैं कि उनसे भी दीपक जोशी ने फेरे लिये हैं ? आदमी स्वयं के शरीर से ही परेशान होता है , खुद के मन से त्रस्त होता है, वो आदमी कैसे 3 और शरीरों को और उनके विचारों को झेल सकता है ? बूढ़े हो चुके दीपक जोशी को शांति चाहिए, एकांत चाहिए लेकिन वो तो जीवन में बवंडर ले आये, वो भी एक नहीं तीन – तीन ! याद होगा कि 5 – 7 वर्ष पहले इंदौर में भैय्यू महाराज ने इन्ही अवैद्य संबंधों के चलते अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली थी ! भोपाल विधायक रहे ध्रुवनारायण सिंह भी ऐसे ही किसी प्रकरण में फंस गये थे और उसका नुकसान उन्हें राजनीतिक रूप से उठाना पड़ा था I
जीवन में ऐसे जबरदस्ती बुलाये तनाव, बेचैनियों, भय, डर से कौसों दूर रहिये, कुछ समय का मजा या सुख , तुम्हारे लिये जीवन भर का दुख बन सकता है, ये बात जितनी पुरुषों के लिए है उतनी ही महिलाओं के लिये भी है I जीवन यापन के अलावा जीवन में बहुत कुछ है करने के लिये , गरीबी है, असहाय लोग हैं, शोषण है, क्लाइमेट चेंज है, पशुओं पर अत्याचार है, बच्चों का शोषण है ? किताबे हैं महान लोगों की जीवनी पढ़ो, कुछ लिखो ! जीवन में एक सार्थक लक्ष्य बनाओ और अपने आपको झोंक दो उसके लिये .. फिर आपके पास इन फालतू बातों के लिये समय ही नहीं बचेगा कि इधर भाग रहे हैं, उसके पीछे भाग रहे हैं .. बिना डर और भय के जीवन आपका इंतज़ार कर रहा है, असल अय्याशी यही है .. मुक्त जीवन !
