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धर्म के व्यापारियों की दुकान चलती रहना चाहिए .. देश की आन – बान – शान से सौदागरों का क्या सरोकार ?

वरिष्ठ पत्रकार संदीप चौधरी ने कथावाचक ( कहानीकार ) देवकी नंदन ठाकुर को आईना दिखाते हुए कहा है कि ये कथावाचक देवकी नंदन ठाकुर जो खुद को संत कहता है, आश्चर्य की बात है कि कथावाचक कब से संत हो गये ? संदीप चौधरी कहते हैं कि देवकी नंदन ठाकुर ना तो संत है और ना ही कथावाचक हैं, ये तो एक रंगदार हैं जिस पर आरोप है कि 2020 में देवकी नंदन ठाकुर ने एक दलित के घर में घुसकर मारपीट की और वहां एक महिला के साथ बदसलूकी की थी ! संदीप चौधरी आगे बताते हैं कि देवकी नंदन ठाकुर के ऊपर 6 मुकदमे चल रहे हैं और ये आदमी जो दूसरों को गद्दार कहता हैं जबकि सनातनियों का विश्वासघाती तो वो खुद हैं I जिसे तुम धर्म का रक्षक समझ रहे हो वो दरअसल वो धर्म विरोधी है , धर्म तो अहंकार का सत्य में विलीनीकरण की प्रक्रिया है, धर्म का मतलब ही सत्य है, प्रेम है और ईमानदारी है !

अहंकार में गले तक डूबे देवकी नंदन ठाकुर तो अधर्म की बात करते हैं, प्रेम नहीं नफरत की बात करते हैं, अध्यात्म ( धर्म ) किसी दूसरे के धर्म और जाति का विषय नहीं हैं , बल्कि अध्यात्म तो इंसान की बात करता हैं, अध्यात्म याने शरीर, मन और आत्मा के विषय को जानना है, अध्यात्म तो आत्मज्ञान की बात करता है , खुद को जानने की बात करता हैं I अध्यात्म याने आंतरिक संसार को समझने का विज्ञान ! धर्म का नकली चोला पहन कर देवकी नंदन ठाकुर तो इंसान की नहीं बल्कि इंसान के धर्म की बातें कर रहे हैं, धर्म के नाम पर इंसानों के बीच नफरत फैला रहे हैं, देवकी नंदन ठाकुर को बड़ी चिंता है कि बांग्लादेश में हिंदू लड़कियों का बलात्कार हो रहा हैं, वहां हिंदुओं को मारा जा रहा है ! ये चिंता नहीं है , ये कथावाचक अपनी दुकान का प्रमोशन रहा है, हिंदू – मुस्लिम करने से अधर्म के ठेकेदारों की सजी हुई दुकानों का व्यापार खूब फलता फूलता है , सच तो ये है कि एक धार्मिक व्यापारी को धर्म ( सत्य ) से क्या सरोकार ?

देवकी नंदन ठाकुर को कृष्ण से ज्यादा शाहरुख खान में दिलचस्पी है क्योंकि उसका धर्म दूसरा है, देवकी नंदन ठाकुर को ना तो क्रिकेट जैसे खेल से कोई वास्ता है ना ही बांग्लादेश के क्रिकेटर मुस्तफ़िज़ुर रहमान से भी ना तो कोई दुश्मनी है ना कोई हमदर्दी है , देवकी नंदन ठाकुर को रुचि अपने धंधे से है ताकि वो अपने मूढ़ भक्तों के बीच ये साबित कर सके कि वो कितना बड़ा धर्म का व्यापारी है , ताकि कथावाचक को दलाली के ज्यादा नंबर मिल सकें I देवकी नंदन ठाकुर जैसे लोग दोगले हैं, स्वार्थवश ये बयानबाजी करते है, इनके अंदर किसी इंसान के लिए कोई संवेदनशीलता नहीं है I ऐसे हृदयहीन सौदागर , इंसान को नहीं बल्कि इंसान का धर्म देखते हैं, किसी ‘ सधर्मी ‘ के साथ अगर कोई ‘ परधर्मी ‘ अन्याय करता है तभी इन्हें दर्द होता है , क्या करुणा , दया का संबंध धर्म से हो सकता है ? कोई सधर्मी जब परधर्मी के साथ अन्याय करता है तो इन्हे आनंद का अनुभव होता है ? क्या नफरत, घृणा और जुल्म का संबंध धर्म से हो सकता है ?

देवकी नंदन ठाकुर जैसे धर्म के व्यापारी कहीं रावण, कंस और हिरण्यकश्यप जैसे अहंकारियों को अत्याचारी मानने से इंकार ना कर दें क्योंकि वो सधर्मी थे ? देवकी नंदन ठाकुर अगर मूढ़ भक्तों को ये समझा दें कि रावण सधर्मी था इसलिए उससे घृणा करना, उसका पुतला जलाना उचित नहीं है ! तो हिंदुस्तान में बहुतायत में पाये जाने वाले अज्ञानी भक्त मान भी लेंगे ! धार्मिक कहानी सुनाने के व्यापार के व्यापारी सधर्मी महिला के बलात्कार होने पर क्यों नही व्यथित होते ? मणिपुर में जब सधर्मी महिलाओं को नग्न घुमाते हैं तो धर्म के नकली रहनुमाओं को द्वेष क्यों नहीं आता ? तब इन धार्मिक दलालों को क्यों सांप सूंघ जाता है ? इस भृष्ट देश भारत में सधर्मियों के लालच, बेईमानी से मध्य प्रदेश में सधर्मी मासूम 26 बच्चे मर भी जाएं तो इनके कान में जूं नहीं रेंगती, 17 सधर्मी निर्दोष लोग मल मूत्र मिले पानी पीने से मर जाएं तो भी इनके मुंह से करुणा के दो शब्द नहीं निकलते क्योंकि वहां बोलने से इन कथावचकों को उनकी दुकानदारी में कोई फायदा नहीं दिखता !

ऐसे फर्जी संत, कथावाचक, धर्म गुरु भारत में बारिश में कुकुरमुत्ते की तरफ फैल गये हैं, इनका बहिष्कार करिये ! अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों में अज्ञानियों की तरह टांग अड़ाना भारत की विदेश नीति के लिए अशुभ हो सकता है और हिंदुस्तान को इसका खामियाजा भुगतना भी पड़ रहा है !

श्री कृष्ण के अनुसार दो ही तरह के धर्म होते हैं ‘ स्वधर्मी ‘ और ‘ परधर्मी ‘ ! स्वधर्मी याने जिसकी संगति करनी है और परधर्मी याने जिस पर करुणा बरसानी है ! परधर्मी का मतलब विधर्मी थोड़ी है कि गला काट दो ! याद रखिये अध्यात्म अहंकार को मुक्त करने का विज्ञान है !

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