भारत में शिक्षा को गाली समझा जाता है, मैं ऐसा इसलिए लिखने को मजबूर हूं क्योंकि भारत के एक शीर्ष न्यूज़ मीडिया की एक दलाल एंकर द्वारा शिक्षकों को दो कौड़ी का कहा गया है, यहां मैं आपको बता दूं कि कई किस्म के दलाल होते हैं लेकिन पिम्प वह व्यक्ति होता है जो कामपिपासुओं के लिये मासूम बच्चियों और गरीब महिलाओं का प्रबंध करता है और दलाली खाता है । न्यूज़ मीडिया में बैठे दलालों का काम भी मीडिया हाउस में बैठकर जनसेवकों के लिए ग्राहक ( वोट ) ढूँढना है या सत्ता को सुरक्षित रखना होता है और बदले में उनकी कमाई का एक हिस्सा या कमीशन अपने पास रखते है ! दलालों के भिन्न – भिन्न प्रकार होते हैं जैसे संपत्ति दलाल ( प्रोपर्टी ब्रोकर ) या भृष्ट दलाल जो सरकारी कार्यालयों (RTO, कोर्ट, रजिस्ट्री ऑफिस) या अन्य जगहों पर गैर-कानूनी तरीके से पैसे लेकर फाइलें पास करवाने वाले बिचौलिए ?
लेकिन सत्ता की दलाली जैसी बिलकुल नई अवधारणा का पूरी दुनिया में प्रचलन बढ़ा है , अभी कुछ दिन पहले हंगरी में ऐसी ही सत्ता को जनता ने उखाड़ फेंका है जो दलाल मीडिया के दम पर 16 साल से सत्तारूढ़ थी I भारत की दलाल मीडिया जिसे गोदी मीडिया भी कहा जाता है ने दलाली के नये कीर्तिमान बनाये हैं, देश में कई किस्म के दलाल हैं लेकिन मीडिया हाउस के माध्यम से सत्ता कि दलाली एक निकृष्टतम पेशा है, ये तो वही बात हो गयी कि मंदिर या मस्जिद या चर्च या गुरुद्वारे के अंदर वैश्यावृत्ति चल रही हो या जहरीली शराब की फैक्टरी चल रही हो जहां भारत की गरीब, अशिक्षित, अंधविश्वासी, धर्म भीरु जनता के दिलो दिमाग में नफरत और धार्मिक पाखंड का जहर घोंटकर मीडिया के माध्यम से पूरे देश में दिन रात पिलाया जा रहा हो !
गोदी मीडिया जिसको दलाल मीडिया या पूँजीपति मीडिया भी कहा जाता है का काम खबरें दिखाना नहीं है बल्कि असल खबरों को छिपाना है, हिंदुस्तान की जनता को सच्चाई से दूर रखना ही इनकी कार्यप्रणाली ( Modus operandi ) है, जनता को 24 घंटे झूठ परोसना इनका कार्य पद्धति है ! सोचिये सच को और तथ्यों को तोड़ मरोड़कर सत्ता के पक्ष में झूठ बनाकर जनता के सामने ऐसे पेश करना कि झूठ सच लगे ? ये सब देश और लोकतंत्र के प्रति कितना गंभीर अपराध है जिसके लिये अभी कानून में उपयुक्त सजा भी नहीं है I दलाल मीडिया, डाॅलर के मुकाबले रुपये की दयनीय हालत को उचित ठहराने के लिए दिन रात मेहनत करता है, महंगाई को जनहित में बताने के लिये 24 घंटे बहस करता है, बेरोजगारी को देशहित में बताने से नहीं चूकता और लेकिन दलाल मीडिया NEET पेपर लीक पर कुछ नहीं बोलता और NCERT के कॉपी चेकिंग घोटाले पर मुंह नहीं खोलता ? परंतु खान सर के खिलाफ जहर उगलता है कि 2 कौड़ी के शिक्षक कोचिंग के नाम पर छात्रों से पैसा उगाह रहे हैं क्योंकि शिक्षक देश के युवाओं के पक्ष में अपना बयान दे रहे हैं और NTA और CBSE को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं ?
अगर फैजल खान ( खान सर ) जैसे शिक्षकों को जिन्होंने लाखों युवकों का जीवन बनाया और युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता बेमिसाल है को शिक्षा का दलाल बताकर उनको नीचा दिखाने की कोशिश की जा रही है तो अंजना ओम कश्यप से पूछा जाना चाहिए कि पिछले कई सालों से वो मीडिया हाउस मे बैठकर क्या पत्रकारिता कर रही हैं ? या सत्ता के लिये अनुकूल पिच बना रही है ताकि सत्ता में बैठे अनपढ़, अपराधी नेता अपने फटे हुए बल्ले से राजनीति का खेल खेलते रहें ? और जनता की तरफ झूठ, दिखावे और जुमलों की गेंद फेंकते रहें ? और अंजना ओम कश्यप सत्ता की दलाली से मिले पैसों से पत्रकारिता को रोज बेचने का काम करती रहें ?
दरअसल हमारी शिक्षा प्रणाली ज्ञान पर आधारित नहीं है , शिक्षा का ज्ञान से कोई संबंध नहीं है , शिक्षा का संबंध पैसों से है, आज IIT, JEE, NEET में क्यों लाखों बच्चे क्यों बैठते हैं ? क्या बच्चों को इसमें कोई दिलचस्पी है ? बिलकुल नहीं, बच्चों को इससे कोई लेना देना नहीं होता है ना ही उनके मां – बाप को उनके ज्ञान अर्जित करने में कोई दिलचस्पी होती है, दिलचस्पी होती है कोर्स करने के बाद नौकरी की, प्लेसमेंट की और पैसे कमाने की ? ज्ञान , बोध, समझ और विवेक के लिये नहीं चाहिए .. ज्ञान सिर्फ पैसे के लिये चाहिए ?
आज हिंदुस्तान में शिक्षा का ये हाल है कि ज्ञान गाली बन चुका है, आज आप परिवार के बीच कोई ज्ञान की बात कर दो या किसी व्हाट्स एप ग्रुप में कोई ज्ञान, बोध की बात कर दो फिर देखिये कैसे कैसे कॉमेंट आते हैं कि ” बड़ा ज्ञान बघार रिया है दिमाग तो ठीक है ” I आज कहीं एक अशिक्षित पार्षद खड़ा हो और साथ में एक Phd किया हुआ कॉलेज का प्रोफेसर खड़ा हो तो देखिएगा जनता किस को घेर के खड़ी मिलेगी ? भारत में एक अदना सा पार्षद , प्रोफेसर पर भारी पड़ता है ? हिंदुस्तान में शिक्षा एक अभिशाप बन चुकी है I
पत्रकारिता एक कुलीन पेशा है और पत्रकारिता के माध्यम से देश और अवाम के लिये बहुत कुछ करने के मौके मिलते है लेकिन सवाल ये है कि अंजना ओम कश्यप जैसी पढ़ी लिखी महिला दलाल एंकर कैसे बन गयी ? और दलाली करते करते देश के शीर्ष चैनल पर कैसे पहुँच गयी ? क्योकि उसने बचपन से देखा है कि एक अनपढ़ नेता को IAS / IPS भी सलाम करता है क्योंकि उसके पास सत्ता का बल है और एक अशिक्षित पूँजीपति के सामने भी दुनिया झुकती है और नेता भी झुकता है क्योंकि उसके पास अथाह पूंजी होती है ? तो अंजना ओम कश्यप पैसे के लिये पूंजीपतियों के यहां नौकरी करने लगी और पॉवर के लिये अनपढ़ नेताओं की दलाली और देश के साथ गद्दारी करने लगी ? ये बिलकुल अलग विषय है कि क्या ये सब धाँधलियाँ कर के अंजना ओम कश्यप को जीवन में सुकून है ? कितने ही बेईमान पूँजीपति, भृष्ट नेता, कथित अरबपति, दलाल पत्रकार जेलों में चक्की पीस रहे हैं या विदेशों में नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं ?
अब तक हम समझते थे कि नेता लोग वो प्राणी है जिसकी चमड़ी सबसे मोटी होती है .. गैंडा हाथी मगरमच्छ सब उसके बाद के क्रम में आते है परंतु पिछले कुछेक सालों में इन गोदी एंकरों ने नेताओं को दूसरे नंबर पर ही धकेल दिया है सच में बहुत ही मोटी चमड़ी चंद सालों में इन गोदी एंकरों ने विकसित कर ली है, रोज हजारों, लाखों, करोड़ों लोग इनको धिक्कारते हैं, मुर्दाबाद के नारे लगाते हैं लेकिन ये बेशरमों की तरह रोज टी वी पर अपनी दलाली निरंतर रूप से जारी रखते हैं I
