मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में AQI ( Air Quality Index ) रीडिंग को कम दिखाने के लिये AQI मॉनीटर सिस्टम के आसपास पानी का छिड़काव किया जा रहा है ताकि AQI रीडिंग को नियंत्रित दिखाया जा सके ! इससे खतरनाक और निकृष्ट बात नहीं हो सकती कि सरकार का एक जिम्मेदार विभाग, जहरीली हवा को जमीनी स्तर पर नियंत्रित करने के बजाए, जहरीली हवा को ही बेईमानी कर के शुद्ध बताने की कोशिश करे ! ये तो ऐसी ही बात है कि डॉक्टर आपकी कैंसर की जांच कराये और आप पैथोलॉजी विभाग में बेईमानी कर के अपनी रिपोर्ट बदलवा दें ? क्या आप कैंसर से बच पाएंगे ? भले ही कुछ समय के लिये आप कृत्रिम ख़ुशी पा लें लेकिन निकट भविष्य में आपने अपनी दर्दनाक मौत की कहानी पर खुद ही हस्ताक्षर नहीं कर दिये ? कैंसर को उचित इलाज चाहिए , धोख़ा नहीं ! अपने आप का धोख़ा कब तक देते रहेंगे हम ? जनता को समझना चाहिए कि जब तक जनता जागरूक नहीं होगी तब तक छली जाती रहेगी ! अगर आपके इतना बोध नहीं कि आप जिम्मेदारों से सवाल नही कर सकते तो आपमें और चेतनाहीन पशु में कोई फर्क नहीं !
जब मैं पहले पहली बार हिंदुस्तान से बाहर गया और विदेशी धरती पर कदम रखा तो ऐसा लगा था जैसे मुझे मछली बाजार से उठा के किसी शांत द्वीप पर पहुंचा दिया हो, ना सड़क पर कोई शोर, ना गाड़ियों के चीखते हॉर्न, ना कहीं से लाउड स्पीकर की कर्कश आवाज, ना कोई गंधाती नाली मुझे नजर आई ना ही कोई सड़क किनारे शौच करता नजर आया , ना कोई मुझे सड़क पर थूकता नजर आया और ना ही कोई गाय – भैंस सड़क पर नजर आई ना ही कोई बेलगाड़ी ! शांत – साफ हवा, हवा में ना धूल ना जहर, साफ सुथरी गड्ढों रहित सड़क, माकूल सीवेज ट्रीटमेंट, बाजारों में उचित पार्किंग, सड़क पर ऐसा कोई नहीं दिखा जा घूर रहा हो, किसी से आँख मिल भी जाती जाती थी तो वो मुस्कुरा के अभिवादन करते हैं I टेक्सी ड्राइवर से बात हुई तो उसने बताया कि वहां होर्न बजाना बदतमीजी माना जाता है, पैदल सड़क पार कर रहे लोगों को प्राथमिकता दी जाती है ! वहां होटल में मिनरल वाटर या आर.ओ. के पानी जैसा कोई अवधारणा नहीं है, वहां नहाने, धोने और पीने का पानी अलग नहीं होता ! Tap Water ( नल का पानी ) ही potable water ( पेयजल ) ही होता है I
सोचिये हमारी जीवन रेखा, हमारी गंगा माँ, जिसको हम नदी नहीं मानते, अपनी माता मानते हैं उसका हमने क्या हाल कर रखा है ? शहर, गांव अपना मलमूत्र और उद्योग अपना कचरा सब गंगा में ही तो फेंकते हैं ? हमारे अंधविश्वास ने भी गंगा माँ को दुनिया की सबसे प्रदूषित और गंदी नदी बना दिया है I हमने तो हमारी पवित्र गंगा के पानी को भी पीने लायक नहीं छोड़ा I
रूस के राष्ट्रपति दिल्ली आये तो क्या उनको नहीं मालूम था किसी वो दुनिया के सबसे प्रदूषित शहर में जा रहे हैं ? पुतिन जिस देश से आ रहे हैं वहां AQI समान्यतः 50 के अंदर ही होता है , WHO के अनुसार AQI 50 से कम होना चाहिए लेकिन दिल्ली का AQI आज भी 300 से ऊपर है और ठंड में 600 – 700 तक चला जाना आम बात है , जो कि इंसानो के लिये अति गंभीर है, दिल्ली के रहवासियों की औसत उम्र 10 – 12 साल घट चुकी है I क्या आपको मालूम है कि दुनिया के सबसे गंदे और प्रदूषित 100 शहरों में भारत के 94 देश हैं ! जी हां 94 देश, और बाकी के जो 6 सबसे गंदे शहर हैं वो भी हमारी संस्कृति से निकले हुए पड़ोसी हैं.. पाकिस्तान और बंगलादेश के शहर हैं ! क्यों यूरोप, अमेरिका, साउथ ईस्ट एशिया के देश इतने साफ सुथरे हैं ? क्योंकि वहां की जनता और सरकारें जागरूक हैं , वहां भ्रष्टाचार से उद्योग का लाइसेंस नहीं मिलता, वहां जुगाड़ नहीं हैं, वहां ज्ञान है ! अमेरिका और यूरोप के कुछ शहर तो ऐसे हैं कि वहां AQI 1 – 2 रहता है और अगर AQI 10 हो जाये तो मेयर बदल दिया जाता है I अधिकांश विकसित देशों में AQI 50 से कम ही रहता है और अगर बढ़ता है तो जनता सरकार से सवाल करती है I
भारत में तो हाल ये है कि सरकार चाहती है कि कैसे भी AQI मॉनीटर सिस्टम को मेनेज किया जाये ताकि रीडिंग 300 से कम रहे ताकि सरकार को कंस्ट्रक्शन के कामों पर रोक नहीं लगानी पड़े , स्कूलों की छुट्टी ना करने पड़े , यानी जो 500 AQI था उसे 300 से कम बताया जाता है, बच्चों को और जनता को जहरीली हवा में मरने को छोड़ दिया जाता है , सिर्फ लालच, जुगाड़, अहंकार, बेईमानी से देश को शमशान बनाने की तैयारी है, लेकिन मजाल है कि जनता में कोई बेचैनी हो ! कोई विरोध नहीं, कोई आवाज नहीं, हम पशु हो चुके हैं बोध रहित, चेतनाविहीन, हर सांस के साथ हमारी जिंदगी कम हो रही है लेकिन ना तो हमारे पास कोई सवाल है , ना तनाव है , ना कोई घबराहट I
हम जोम्बी ( चलती फिरती लाश ) हो चुके हैं, मृत्यु धर्मा हो चुके हैं, हमारी जीने की इच्छा खत्म हो चुकी है .. गरिमा से जीने की शक्ति पैदा कीजिये, आप पशु ( गुलाम ) नहीं हैं, बोध और चेतना जागृत कीजिये, अपना विवेक इस्तेमाल कीजिये .. अपनी नहीं तो अपनी आनी वाली पीढी के बारे में सोचिये , विरोध करिये, आवाज बुलंद कीजिये, सत्य के साथ खड़े रहिये, आप बेहतर जीवन जीने के लिये मनुष्य रूप में इस संसार में आये हैं I
