इंदौर में दशहरे के रात को महिलाओं से पीड़ित पुरुष समाज ने उन औरतों के पुतलों को रावण के साथ जलाने की कोशिश की थी जिन्होंने पुरुषों को मार ही नही डाला वरन पुरुष के टुकड़े कर के कहीं ड्रम में सीमेंट में जमा डाला था I क्या भारतीय जनता को वो भृष्टाचारी नहीं दिखते जिनकी लापरवाही, लालच और बेईमानी के चलते हरदा में पटाखे की फेक्टरी में 13 बेगुनाह लोग जलकर अकाल मौत मर जाते हैं ? सरकारी मुलाजिमों , नौकर शाहों की ऐसी क्रूरता कि चंद हराम के पैसोंं की हवस के लिये छिंदवाड़ा में 26 मासूम और निरीह बच्चों की बलि दे दी जाती है I इंदौर के सरकार के एम. वाय. अस्पताल में दो दुधमुहे बच्चों को चूहे कुतर कुतर कर मार डालते हैं ? ये कैसा प्रबंधन है , ये कैसे हृदयहीन, निर्दयी लोग हैं .. क्या ये निर्मम लोग इंसान कहलाने लायक हैं ? इंदौर के बेलेश्वर महादेव मन्दिर में अवैध रूप से बना स्लेब टूटने से बावड़ी में गिरने से 36 लोग अकाल मृत्यु की गोद में समा जाते हैं ? कैसे हो जाता है अवैद्य निर्माण ?
क्या हिंदुस्तान में हर जगह चाहे वो सरकारी दफ्तर हो या न्यायालय हो, मंदिर हो, आयोग हो, शिक्षा के मंदिर हों , सरकारी अस्पताल हो, पुलिस विभाग हो या जांच एजेंसी हों सभी जगह धूर्त, धोखेबाज बेईमान नहीं बैठे हैं ? हरदा में पटाखा फैक्टरी ब्लास्ट में क्या कलेक्टर , तहसीलदार , एस डी एम दोषी नहीं ? कैसे एक अवैद्य पटाखा फैक्टरी चल रही थी ? 13 लोग मर गये, क्या किसी को सजा मिली ? छिंदवाड़ा कफ सीरप कांड में 26 बच्चे मर गये , जिसमें छोटी मछलियों को पकड के औपचारिकता कर दी गयी ? बड़े मगरमच्छों का क्या हुआ ? एम वाय अस्पताल में दो दुधमुहे बच्चों को चूहे नोंच गये लेकिन सजा के रूप में डॉक्टर को बस उसके पद से हटा दिया गया ? इंदौर के बेलेश्वर महादेव मन्दिर में 36 मौतों के बाद सिर्फ नगर निगम मे 1 – 2 कर्मचारियों के निलंबन की कार्यवाही कर के खानापूर्ती कर दी गयी I अब जब इंदौर में मलमूत्र का पानी पीने से 15 लोग मर गये हैं तब भी सिर्फ नगर निगम के दो अफसरों का निलंबन हुआ हैं और नगर निगम आयुक्त का ट्रांसफर .. बस ! हो गया दिखावा, सजा देने की रस्म अदायगी कर दी गयी !
तंत्र और तंत्र के जिम्मेदार लोगों की लापरवाही से लोग लगातार मर रहे हैं, मैंने ऊपर 90 लोगों की अकाल मौत का ब्यौरा दिया, क्या बड़े बड़े पदों पर विराजमान नौकर शाह, जनसेवक निर्दोष हैं ? क्यों नहीं इन पर कार्यवाही होती ? कौन बचा रहा है तंत्र में बैठे दोषियों को ? क्यों नहीं ये लोग शर्मिंदा होते ? 90 लोगों की लाश पर बैठ कर इनको लज्जा या पश्चताप नहीं होता ? क्यों ये लोग बेशर्मों की तरह अपने पदों से चिपके रहते है ? क्यों नहीं इनको अपराध बोध होता है ? क्यों नहीं ये खुद ही इस्तीफा दे देते ? जनता से नहीं तो प्रभु से डरना चाहिए ? यही कारण है कि हादसे बढ़ते जा रहे हैं ! जनता मरती रहे और दोषी ,जनता के ही टैक्स के पैसोंं से सरकारी गाड़ियों और हेलिकॉप्टर में बैठकर पोहा जलेबी खायें ? मिनरल पानी पियें , अमरूद और मटर खाये और ठहाका लगाते फोटो खिंचवायें और फेसबुक में डालें ?
जनता को ही आगे आना होगा और सरकारी पैसों पर अय्याशी करते नौकरशाहों और तथाकथित जनसेवकों को कहना होगा कि बहुत हो गया .. ” हमें बख्शो ” ! अगर सरकारी ओहदों पर बैठे अहंकारियों का लालच और अहंकार उनको पश्चताप करने से रोक रहा है तो अगले दशहरे में रावण के दस सरों पर सरकारी तंत्र में बैठे मौतों के जिम्मेदारों के फोटो लगाकर इनके पुतलों का दहन करो , बाजारों में इनके पोस्टर लगाओ, केंडल मार्च निकालो और तब तक आंदोलन करो जब तक जिम्मेदार अपने पद से इस्तीफा ना दे दें और पश्चताप ना कर लें ! इस नर्क से सिर्फ तुम ही तुमको निकाल सकते हो .. 🙏
