हमारी पौराणिक कथाओं में कोई भी असुर तपस्या कर के, देवों से अमर होने का वर मांग लेता था ! एक कथा है जो भगवान शिव और भस्मासुर के बीच की है I भस्मासुर ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की, शिव जी प्रसन्न हो गये तो भस्मासुर ने उनसे वरदान मांगा कि “वह जिसके सिर पर भी अपना हाथ रखेगा, वह जलकर भस्म हो जाएगा।” भोलेनाथ ने उसे यह वरदान दे दिया ! वरदान मिलते ही भस्मासुर अहंकार में आ गया और शिवजी की ही परीक्षा लेने के लिए उनके सिर पर हाथ रखने के लिए उनके पीछे दौड़ पड़ा, तब भगवान शिव को अपनी जान बचाने के लिए भागना पड़ा था , किसी तरह महादेव अपनी जान बचाते हैं और भस्मासुर को भस्म करते हैं I कथा से मुख्य सीख ये मिलती है हमको खुद से खुद को बचाना होगा, हमारी कामनाएं , हमारा अहंकार ही अंततः हमारे विनाश का कारण बनती हैं .. प्रभु से कोई वरदान मांगना है तो यही मांगना है कि ” प्रभु मुझे, मुझ से बचा ” I
मध्य प्रदेश में भी भस्मासुर ही भस्मासुर नजर आ रहे है, जनता ने उन्हें राज करने का वरदान तो दिया है लेकिन जिस जनता ने उन्हें विधायक, मंत्री बनाया है वो ही जनता को अपनी थार से कुचलने को व्याकुल दिखाई दे रहे हैं, कहीँ मंत्री का भाई महिला सरकारी अधिकारी के दांत तोड़ने की बात करता है तो दूसरी ओर एक कद्दावर नेता ( कैबिनेट मंत्री ) के अपने ही विधानसभा क्षेत्र के 2 दर्जन मतदाताओं ( जनता ) की मौत जहरीले पानी पीने से हो गयी जबकि मौत का कारण मंत्री के ही विभाग की लापरवाही थी ? लेकिन मजाल है कि मंत्री जी इस्तीफा दे दें ? वरिष्ठ मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने तो जनता की मांगों और आवेदनों को ही ‘भीख’ बता दिया । उन्होंने कहा था कि लोगों को सरकार से मांगने की आदत हो गई है, जो कि अच्छी बात नहीं है I जिन्होंने इनको मंत्री बनाया अब वो भिखारी हो गये ? भाजपा के ही बड़े वाले याने वरिष्ठ पी डबल्यू डी मंत्री राकेश सिंह बोलते हैं कि ” जब तक सड़कें रहेंगी, तब तक गड्ढे होते रहेंगे।” याने जनता का धर्म है गड्ढों पर चलना ? मंत्री जी को तो वरदान मिल गया है महलों में रहने का .. लेकिन जनता तुम भुगतो ? राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने मंच से ‘लाडली बहनों’ को संबोधित करते हुए कहा था कि अगर सरकारी आयोजनों में लाभार्थी बहनें नहीं आएंगी, तो वे आगे से इस योजना के लाभ से वंचित हो सकती हैं याने 1000 रुपए महीने में खरीद लिया गया है लाडली बहनों को और उन्हें धमकाया जा रहा है , जिन लाडली बहनों के कारण सत्ता सुख मिल रहा है, नेताओं द्वारा उन्ही का शोषण किया जा रहा है , डराया जा रहा है !
अभी 1 – 2 दिन पहले 230 विधायकों के अविवादित बादशाह यानी मुख्यमंत्री मोहन यादव बिफर पड़े और विपक्षी नेता जीतू पटवारी को अमर्यादित भाषा में गरियाने लगे ? जीतू पटवारी ने तो सिर्फ शुद्ध हिंदी में ‘ अभिनंदन ‘ शब्द से मोहन लाल यादव को संबोधित किया था लेकिन बादशाह तो बदले में नेता विपक्ष को ‘ टपोरी लाल ‘ कहने लगे ? मोहन यादव बोलते हैं कि जीतू पटवारी मध्यप्रदेश में सत्ता पाने के मुंगेरी लाल के हसीन सपने देख रहे हैं बल्कि सच तो ये ये है कि 2023 में एक मुंगेरी लाल के हसीन सपने अचानक से पूरे हो गये थे ? फिर मोहन यादव वही घिसे पिटे 25 साल पुराने दिग्विजय सिंह के कथित गुनाहों को गिनाने लगे ? दिग्विजय कार्यकाल के बदले 25 साल सत्ता तो भोग ली ? अब और कितना भुनाओगे ? दिग्विजय कार्यकाल नहीं हो गया अमिताभ की सूर्यवंशम हो गयी जो अब बिल्कुल भी नहीं झिलती ? फिर बोलने लगे कि मध्यप्रदेश कांग्रेस के इतिहास में जीतू पटवारी जैसा ‘ रद्दी ‘ अध्यक्ष नहीं हुआ ? रद्दी की ‘ रिसेल वैल्यू ‘ तो होती है और शायद मुख्यमंत्री जी का जीतू पटवारी की ‘ वैल्यू ‘ से विश्वास डगमगा गया है और उन्होंने जीतू पटवारी से घृणा के ऊपर व्याख्यान ही दे डाला ?
मध्य प्रदेश की राजनीति में अनेकों भस्मासुर पैदा हो गये हैं जिनकी छत्रछाया में ना फैक्ट्रियां सुरक्षित हैं ना पुल , ना जनता, ना बच्चे, ना मजदूर ? मध्य प्रदेश में ये क्या हो रहा है ? जनता को आसानी से घरेलू सिलिंडर नहीं मिल रहा है लेकिन सब ठीक ही है ? महंगाई चरम पर है लेकिन सब ठीक ही है ? पीने के पानी की किल्लत है लेकिन सब ठीक ही है ? 50 नौकर शाह सरकारी तंत्र में बैठ के सरकारी तंत्र का दुरपयोग कर सरकार के सैकड़ों करोड़ रुपए बर्बाद कर के जमीनों की खरीद -फरोक्त में अपनी जेबें भर रहे हैं , लेकिन सब ठीक ही है ? भोपाल से हजारों नकली सीरप की शीशियाँ बरामद की गयी हैं , लेकिन सब ठीक ही है ? पुलिस खुद ही करोड़ों रुपए की लूट की हिस्सेदार बनती है लेकिन सब ठीक ही है ? छिंदवाड़ा में दर्जनों बच्चे नकली कफ सीरप पीने से मर गये लेकिन सब ठीक ही है ? देवास और हरदा में अवैद्य पटाखा फैक्ट्रियों में दर्जनों मजदूर बेमौत मारे जा रहे हैं , लेकिन सब ठीक ही है ? जनता मल – मूत्र का पानी पीने को मजबूर है मरने को मजबूर है , लेकिन सब ठीक ही है ? रायसेन में और जबलपुर हाईवे पर पुल टूट रहें हैं, लोग मर रहे हैं लेकिन सब ठीक ही है ?
शेरों का झुंड अगर आदमखोर हो जाये और शिकार करने के पहले अगर बंदर उछल कूद करता है तो ये अवाम के लिये शुभ है I बाकी जनता अपना शुभ भी जानती है और लाभ भी, लेकिन इतना अवश्य है कि जनता के आदर्श ही अगर अमर्यादित भाषा में एक दूसरे को नीचा दिखाने का प्रयास करने लगेंगे तो ये प्रदेश की जनता और प्रदेश की राजनीति के लिये चिंता का विषय है ?
