जोड़ियाँ स्वर्ग में नहीं बनती, जोड़ियाँ स्वार्थ वश बनती हैं ! ज्यादातर रिश्ते लड़की की सुंदरता और रंग – रौगन देख कर बनते हैं एवं लड़के की नौकरी, तनख्वाह और संपत्ति देख कर बनते हैं और हां अधिकांश जोड़े खुदगर्जी और अहंकार से बने रिश्तों के साथ नर्क भुगतते हैं I अरेंज मैरिज याने माता पिता की माया का ताना – बाना और लव ( सो काल्ड ) मैरिज याने लड़का – लड़की की नासमझी का मायाजाल ! शादी ब्याह याने लड़की के लिये मुख्य रूप से सुरक्षा के साथ शारीरिक इच्छाओं की पूर्ति होती है और लड़के के लिये शादी की मंशा विपरीत लिंगी से मुख्यता काम वासना की पूर्ति ही होता है I शादी की पूरी व्यवस्था में प्रेम कहाँ है ? बिना प्रेम के दो इंसान जीवन कैसे व्यतीत कर सकते हैं ? तो फिर स्त्री – पुरुष के बीच झगड़े, क्लेश, मारपीट होती है ? फेमिली कोर्ट मे पैर रखने की जगह नहीं होती है .. न्यायालय में चारों तरफ युवा , आँखों में जलन लिये और सीने में तूफान लिये थके थके कदमों से जीवन को बर्बाद होते देखते रहते हैं ! कोर्ट की अंतहीन पेशियाँ, वकीलों की नोच – खसोट और दोनों पक्षों के सफेद – काले झूठों के पुलिंदे लड़का हो या लड़की दोनों की जीने की इच्छा को ही खत्म कर देती है I
तभी तो न्याय या कहें मुक्ति ( तलाक़ ) के इंतज़ार में कभी पुरुष फंदे पर झूलने को मजबूर हो जाता है या स्त्री अपना संयम खो कर नीले ड्रम का इस्तेमाल कर लेती है ? क्योंकि शादी के भव्य, खर्चीले आयोजन में तो सैकड़ों – हजारों दोस्त, रिश्तेदार भागीदार बनते हैं लेकिन शादी के बाद की यातना तो अकेले ही भुगतना पड़ती है I जब रिश्ते की बुनियाद ही खोखली हो तो रिश्ता कैसे चलेगा ? चलेगा भी तो दुख, पीड़ा, तनाव के साथ ? विदेशों में तलाक़ दर बहुत ज्यादा है और भारत में सिर्फ 1% , हमारे देश के संस्कारी लोग इसे हिंदुस्तान की संस्कृति और संस्कार की दुहाई देकर दंभ भरते हैं लेकिन सच तो ये है कि हिंदुस्तान में बहुतायत में असफल विवाह चल रहे हैं, कहीं मजबूरी में, कहीं समाज के भय से या कहीं औरत की आर्थिक निर्भरता के चलते ! भारत में बहुत ही भयानक और विस्फोटक पारिवारिक और सामाजिक स्थिति है I
अभी ताजा ताजा भोपाल में एक कांग्रेस नेता महेंद्र सिंह चौहान और शिखा सिंह का एक मामला सुर्खियों आया है I शिखा सिंह एक प्राइवेट बैंक में मैनेजर है , शिखा सिंह ने पुलिस स्टेशन में दिये आवेदन में बताया है कि उसकी शादी 19 साल पहले उससे 20 साल बड़े महेंद्र सिंह चौहान से हुई थी , शादी के समय महेंद्र सिंह चौहान के दो लड़के थे I शिखा सिंह के अनुसार शादी के 2 साल बाद ही महेंद्र सिंह चौहान उससे मार पीट करने लगे थे और उससे पैसे की मांग करते थे I शिखा के अनुसार महेंद्र सिंह चौहान ने उसे जान से मारने की भी कोशिश की थी I आश्चर्य की बात है कि 2003 में शिखा के मां बाप ने शिखा की शादी एक IAS से कराई थी, लेकिन शादी के 2 – 3 साल बाद ही शिखा ने उस IAS से बाकायदा तलाक़ लेकर 2007 में उससे 20 साल बड़े महेंद्र सिंह चौहान से दूसरी शादी की थी I
आज शादी के 19 साल बाद शिखा सिंह को महेंद्र सिंह चौहान ने घर से निकाल दिया है और तलाक़ का नोटिस भी दे दिया है, शिखा द्वारा दिये गये बयान के अनुसार उसकी पहली शादी भी महेंद्र सिंह चौहान की मीठी मीठी बातों की वजह से और पति के विरुद्ध भड़काने के कारण टूटी थी I शिखा सिंह के अनुसार जब महेंद्र सिंह चौहान उसको अपनी बातों मे उलझा रहा था तब उसके दोनों लड़के भी शिखा को उसके मां – बाप के झगड़ों के बारे में बताते थे कि पिछले 10 सालों से उनके पिता महेंद्र सिंह चौहान और उनकी मां के बीच किसी तरह के कोई संबंध नहीं थे I इस पूरी पटकथा में एक बात समझ आती है कि शिखा सिंह की शादी एक IAS से उसकी मर्जी के बिना कर दी गयी थी, IAS होना संपूर्णता की गारंटी तो नहीं हो सकता ? या शादी के बाद शिखा को लगा होगा कि IAS के साथ वो जीवन पर्यंत साथ नहीं रह सकती है I
हो सकता है शिखा सिंह ने अपने परिवार से IAS महोदय से अलग होने की चर्चा की हो लेकिन शायद परिवार ने शिखा को तवज्जो ना दी हो ! उसके बाद अकेली, दुखी महसूस कर रही शिखा सिंह गुमसुम रहती हो I महेंद्र सिंह चौहान बैंक में आते – जाते रहते होंगे तो गुमसुम शिखा को देखते होंगे, आदमी जात की निगाहें तो ऐसी ही दुखी नारियों की तलाश में रहती हैं और अपनी लच्छेदार बातों से शिखा को क्लीन बोल्ड कर दिया हो I शिखा सिंह को लगा होगा की पैसे वाला नेता है, पहुँच वाला है, कल को मुख्य मंत्री भी बन सकता है ? हो सकता है शिखा सिंह के सामने ऐसे भी कई उदाहरण हों, जिसमे युवा लड़कियों ने उम्रदराज पुरुषों से शादी की थी और उनको लगता हो कि वो शादियाँ कामयाब हैं I
इस मामले का कानूनी पहलू कुछ भी हो लेकिन ये तो पक्का है कि शिखा सिंह को ना अपने पहले पति से प्रेम था ना ही महेंद्र सिंह चौहान से था, एक नापसंद रिश्ते से निकलने के लिये उसने दूसरा रिश्ता बनाया लेकिन वो दूसरे रिश्ते के मकड़ जाल में फंस के रह गयी , दूसरी ओर महेंद्र सिंह चौहान शायद अपनी पहली पत्नि को सबक सिखाने के उलट फेर में ऐसे फंसे की शिखा सिंह उनके गले का फंदा बन गयी I जो भी हो, ऐसा प्रतीत होता कि महेंद्र सिंह चौहान ना ही अपनी पहली पत्नि के वफादार रहे, ना ही दूसरी पत्नि शिखा के हो सके, याद रखिये जिसने भी जीवन में बेईमानी, पैसा, स्वार्थ, ओहदा, अहंकार, काम वासना , भोग – विलास को सत्य, ईमानदारी और प्रेम ऊपर रखा है उसको जीवन ऐसा पीटता है कि फिर वो कहीं का नहीं रहता I
संगति वो करो जो तुम्हारी मुक्ति का कारण बन सके , चाहे शिखा सिंह हो या महेंद्र सिंह चौहान दोनों ही अपने अपने पूर्व रिश्तों से , अपनी अपनी संगति से परेशान थे, दोनों एक दूसरे से मिले थे ताकि अपने दुखों को साझा कर सके या अपने दुखों से आजादी पा सकें लेकिन दोनों अपने अपने ही स्वार्थों के कुचक्र में ऐसे फंसे कि दोनों एक दूसरे के लिये अपार दुख, पीड़ा, बदनामी और स्याह जिंदगी के गवाह बन बैठे हैं I
