Breaking News

भोपाल में मेट्रो रेल चलने की खुशियाँ

भोपाल में मेट्रो रेल का उद्घाटन हुआ, लाखों – करोड़ों रुपए के विज्ञापन देकर और लाखों रुपए उद्घाटन इवेंट पर खर्च करके सरकार द्वारा जश्न का माहौल बनाने की कोशिश की गयी ! भाड़े पर लाये लोग भास्कर के केमरे के सामने नाच – गा रहे थे कि मेट्रो ट्रेन चल गयी ! सुबह की पहली ट्रेन से यात्रा कर रहे लोग ऐसे भावुक हो रहे थे जैसे छिंदवाड़ा मे नकली कफ सिरप पीने से मारे गये दर्जनों बच्चों को यमराज ने मध्यप्रदेश की धरती पर इस नोट के साथ वापिस भेज दिये कि सरकार की नाकामी और अधिकारियों / डॉक्टरों की लालच की सजा मासूम बच्चों को क्यों दी जाये ? लोग ऐसे नाच गा रहे थे जैसे चूहों के समाज ने फैसला पारित किया हो कि अस्पताल के निकम्म्मे अधिकारियों की सजा दुधमुहेँ बच्चों को क्यों दी जाये ? जानवरों को भी तंत्र की दुर्दशा पर तरस आ रहा होगा लेकिन इंसान अपने लालच, कामनाओं और भोगवाद के चलते पशुओं से भी बदतर हो चुका है !

जनता के 8000 करोड़ रुपए लगे हैं भोपाल मेट्रो ट्रेन में, कौन चलेगा ? क्यों चलेगा ? मीडिया की खबरें हैं कि इंदौर में मेट्रो ट्रेन पूरी तरह से फ्लॉप हो गयी हैं तो फिर भोपाल में तो चलने का सवाल ही नहीं ? भोपाल सिटी बस के नाम पर पहले प्राइवेट मिनी बसें चलती थीं, प्रेशर होर्न बजा – बजा के सड़कों पर एक दूसरे से स्पर्धा करती बेतरतीब मिनी बसों ने जनता पर बेजा कहर ढाया, ढोरों जैसे भोपालियों को मिनी बस में भर लिया जाता था, बहुत ही घुटन, पीड़ा, तकलीफ भरा दौर था वो , शायद यही कारण था कि मिनी बसें नहीं चल पाई I खैर उसके बाद आई सुगम बसें, सरकारी बसें, लेकिन सरकारी व्यवस्था चल नहीं पाई और फिर लायी गयीं BCLL ( भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड ) , जिसने भोपाल में 24 रूट पर GPS और CCTV युक्त 368 बसें चलायी, जिसके लिए सैकड़ों करोड़ रुपए खर्च कर के BRTS लगाया गया I

आज कुछ सालों में ही जनता के सैकड़ों करोड़ रुपए बर्बाद कर के जनता को क्या मिला ? खटारा बसें , जेबकतरों , छिछोरों का अड्डा बन चुकी हैं ये BCLL की बसें, कंडक्टरों की दादागिरी और मारपीट का सबब बन चुकी बसें अब भोपालियों का सर दर्द बन चुकी हैं ! BRTS उखड़ चुका है, 24 रूटों पर शुरू हुई बसें अब सिर्फ 6 रूटस् पर चल रही हैं और वो भी बंद होने की कगार पर हैं, सरकार में बैठे जिम्मेदार निकम्मे नौकर शाह 40 साल से शहर में ढंग की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था नहीं दे सके ? BRTS में 500 करोड़ से ज्यादा खर्च हुआ लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात ? ऐसा ही उद्घाटन 2010 में भी हुआ होगा, चमचमाती 368 बसें आई होंगी, ऐसे ही भाड़े के टट्टू नाचे होंगे ?

आज फिर लोग नाच रहे हैं, भोपाल और देश की प्रगति देख कर प्रफुल्लित हो रहे हैं, भावुक हो रहे हैं , ये वही लोग हैं जो हर तकलीफ में सुख और मजे ढूंढ लेते हैं , बच्चे की नौकरी नहीं लग रही है तो क्या हुआ, पार्टी के पार्षद ने मेट्रो स्टेशन के नीचे एक गुमठी दिला दी है पकोड़े तलने के लिए ? पत्नि को 1500 रुपए मिल ही रहे हैं ? याद नहीं कि सैर – सपाटा में 10 रुपए की टिकट क्या रख दी सरकार ने कि सैर – सपाटा सुनसान हो गया ! सरकार ये कैसे सोच सकती है कि भोपाली हर तीसरे मेट्रो स्टेशन के लिये 40 रुपए देगा ? दूसरी बात ये है कि आराम – परस्त भोपाली मेट्रो स्टेशन चढ़ने – उतरने में ही इतना हांफ जायेगा कि फिर उसकी जेब में हाथ डाल कर पैसे निकालने की ताकत रह जायेगी ? भोपाल को मेट्रो ट्रेन की कतई जरूरत नहीं है , मेट्रो से तो पूजीपतियों और नेताओं के गठजोड़ को जो दोहन करना था कर लिया गया है, उनको जो हासिल करना था वो डकार चुके हैं ! अब भोपाल के अज्ञानी अपनी ही बर्बादी पर नाच रहे है तो उनको कौन रोक सकता है ? ये तो वही बात हो गयी कि अघोरी सब कुछ चाट के झूठन छोड़ गये और हम झूठन को ही स्वार्थवश माथे का चंदन समझ रहे हैं ?

About muktikiudaan.com