सुनेत्रा पवार ने अपने पति के अनायास निधन के बाद तीसरे दिन ही महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री की शपथ लेकर देश को लगभग चौका ही दिया , हमारे नकली समाज में इस तरह के निर्लज्जता का प्रदर्शन निषेध माना जाता है ! हां हमारे तथाकथित आदर्श परिवारों में चोरी छुपे सारी मर्यादाएं तोड़ी जाती रहती हैं, परिवारों में षड्यंत्र रचे जाते रहे हैं और रचे जाते रहेंगे लेकिन सब कुछ झीने परदे के पीछे किया जाता है , झूठ को सच बताकर पेश किया जाता है लेकिन सुनेत्रा पवार ने अपने स्वार्थों के लिये सिंहासन को और झूठ को प्राथमिकता देते हुए तथाकथित हिंदू पारिवारिक मूल्यों का धारशायी कर के रख दिया है ! संस्कृति वादी लोग विलाप कर रहे हैं कि 13 दिन रुक नहीं सकती थी सुनेत्रा पवार ? अपने घोटालेबाज पति को इतनी सी श्रद्धांजली तो दे ही सकती थी ! अजित पवार का पूरा जीवन झूठ को समर्पित रहा , सत्य ईमानदारी से उनका दूर तक वास्ता नहीं था, अपने चाचा शरद पवार और बहन सुप्रिया सुले को भी अजित पवार ने स्वार्थ वश धोखा ही दिया था ! सुनेत्रा पवार ने भी तो पति की खातिर जीवन भर झूठ और मक्कारी का साथ दिया है I
सुनेत्रा पवार ने सत्ता पाने के लिये , अपने दिवंगत पति और बच्चों के गुनाहों को छुपाने के लिये झूठ का साथ देने के लिये हड़बड़ी में उप मुख्यमंत्री बनने का फैसला लिया है , याद रखिये जो सत्य के साथ नहीं वहां महाभारत होना तय है, जो कृष्ण के साथ नहीं वहां नाश अवश्यंभावी हो जाता है I महाभारत में अगर कर्ण कृष्ण ( सत्य ) के साथ होता तो क्या महाभारत होता ? अगर भीष्म दुर्योधन ( झूठ ) का साथ नहीं देते तो क्या महाभारत होता ? अगर बाप भृष्टाचारी है, झूठा है , बेईमान है और आप उसका साथ इसलिए दे रहे हैं कि वो आपका बाप है तो इसका मतलब है कि आपने अपने बाप को सत्य से ऊपर मान रखा है , जबकि सच ये है कि सत्य ही सबका बाप है I हमारे प्रचलित धर्म और संस्कृति ने रिश्तों को हमेशा सत्य से ऊपर रखा है I महाभारत में जब अर्जुन अपने रिश्तदारों पर धनुष चलाने को तैयार नही था, जब अर्जुन के हाथ कांप रहे थे तब सारथी बने श्री कृष्ण अर्जुन को यही तो समझाते हैं कि धर्म ( सत्य ) रिश्तो से ऊपर होता है और अर्जुन को आदेश देते हैं कि उठाओ धनुष और चलाओ बाण ! रामायण में विभीषण अपने दुष्ट भाई का साथ ना देकर श्री राम का साथ देते हैं तो हमारा समाज विभीषण को भला बुरा कहता है ? क्योँ ? क्योंकि हमारे प्रचलित धर्म में श्री राम से ऊपर रिश्ते हैं ? विभीषण के लिये अगर झूठ, भृष्टता, दुष्टता, अहंकारी सत्ता प्राथमिकता में श्री राम से ऊपर होती तो हमारे नकली समाज में और प्रचलित धर्म में विभीषण भी स्वीकृत होते I
महाभारत तो तय थी क्योंकि द्रोणाचार्य और कृपाचार्य इसलिए दुर्योधन का साथ दे रहे थे क्योंकि वो सरकारी मुलाजिम थे, चूंकि उनका जीवन यापन हस्तिनापुर के खजाने से चलता था इसलिए वो झूठ, अन्याय का साथ देने को मजबूर थे ? जब तुम्हारे स्वार्थ राज्य से , राष्ट्र से ऊपर हो जाएं तो महाभारत तय है, तब राष्ट्र का नाश अपरिहार्य हो जाता है I जब भीष्म अपनी प्रतिज्ञा को देश से ऊपर रखकर अनाचार का साथ दे तो सत्यानाश होना निश्चित है I जब कर्ण अपने राज्य और जनता से ज्यादा प्रमुखता अपनी दोस्ती को देकर देश के साथ धोख़ा करे तो तबाही होना अनिवार्य हो जाता है I जब दुर्योधन श्री कृष्ण याने सत्य से दूर होकर शकुनि जैसे दुराचारियों के साथ मिलकर हस्तिनापुर को दांव पर लगाने को तैयार हो तो महाभारत तो होना अटल है I जब अर्जुन अन्याय और झूठ के खिलाफ सत्य ( श्री कृष्ण ) के साथ खड़ा हो और अर्जुन को देशद्रोही बताया जाये तो हस्तिनापुर का विनाश तो पक्का ही था I
जब हस्तिनापुर का तंत्र और प्रजा द्रौपदी के चीरहरण और पांडवो के साथ हुए अन्याय को चुपचाप देखती रहे और दुर्योधन के अनाचार और अहंकार को समर्थन देती रहे तो महाभारत होगा ही , जब दरबार में बैठे दरबारियों और प्रजा की निष्ठा सत्य के साथ ना होकर अपने छोटे छोटे स्वार्थों पर केंद्रित हो, लालच और प्रलोभनों पर लक्ष्यित हो तो राष्ट्र का पतन सुनिश्चित है I सुनेत्रा पवार ने स्पष्ट कर दिया है कि झूठ, प्रपंच, अनाचार और भृष्टता ही उनकें परिवार की समृद्धि और सत्ता पाने के आधार हैं और इसके लिये वो किसी राज्य क्या राष्ट्र को भी दांव में लगा सकती हैं और दुर्भाग्य ये है कि जनता अपने विनाश को देख कर भी मूक दर्शक बनी हुई है ?
