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समसामयिक , सारगर्भित मसलों पर महत्वपूर्ण चर्चा का सच क्या ??

कोई मंत्री या विधायक या सांसद या पार्टी अध्यक्ष या संघर्ष करता राजनेता या टीका लगाए उभरते छुटभैये नेता या जबरन किसी आयोग / मंडल / निगम के थोपे गये अध्यक्ष या कोई चाटुकार या पत्तलकार अपने से बड़े वाले माननीय से मिलते हैं तो गुलदस्ता पकड़ाते हुए फेसबुक पर एक फोटो जरूर चेंप देते हैं कि फलां – फलां से सौजन्य मुलाकात हुई और समसामयिक विषयों पर सारगर्भित और महत्वपूर्ण चर्चा हुई ?? एक कार्यक्रम के दौरान मैंने देखा कि एक पत्तलकार मुख्यमंत्री के साथ फोटो खिचानें को बड़ा बेचैन दिख रहा था , बेचैन पत्तलकार भीड़ में घुस गया और जैसे तैसे फोटो खिंचा ही ली और तुरंत फेसबुक पर चेंप दी कि आज मुख्यमंत्री से सौजन्य मुलाकात कर चर्चा की ! दो कौड़ी के चाटुकार को मुख्यमंत्री ने भले देखा तक ना हो ? आज तो अनोखी फोटो देखी कि रामेश्वर शर्मा पश्चिम बंगाल में मुख्य मंत्री मोहन यादव का गुलदस्ते से स्वागत कर रहे हैं , अरे क्या पंश्चिम बंगाल के भाजपा कार्यकर्ता ममता दीदी से डर कर भाग गये हैं ?? अरे भाई , पश्चिम बंगाल के चुनाव में तुम्हारा क्या काम ? खुद का प्रदेश तो सम्हाल लो, ध्यान तो दो कहीं दिन दहाड़े करोड़ों की लूट – खसोट – डकैती हो रही है कहीं विधायक का बेटा अहंकार में गरीब जनता को थार से रौंद रहा है ?

मैं आज तक समझ नहीं पाया कि समसामयिक , सारगर्भित मसलों पर महत्वपूर्ण चर्चा कब होती है ? चाटुकारों को बड़ी मशक्कतों और जिल्लतों के बाद बमुश्किल 30 सेकंड में इधर – उधर से जुगाड़ का गुलदस्ता माननीय को चेंपने का मौका मिलता है , माननीय तो देखते भी नहीं हैं इनकी तरफ, चेहरे पर खिसियाहट के भाव लिये, अहंकार के नशे में माननीय अपनी मुंडी दूसरी तरफ घुमा के लहराते हुए ऐंटीचैंबर में घुस जाते हैं , घुसते – घुसते अपने OSD को कुछ इशारा करते हैं और OSD गुलामों की तरह बदहवास वेटिंग रूम की तरफ भागता है और वहां से 2 – 3 टाई – सूट और हाथ में ब्रीफकेस लिये धन्ना सेठों को बुला के लाता है और उनको एंटी चैंबर में सुरक्षित रूप से धकिया देता है I

असल में सारगर्भित और समसामयिक विषय पर चर्चा तब होती है जब एक शिक्षा संस्थान का मालिक और सत्ता के नशे में चूर शिक्षा मंत्री मिलते हैं और चर्चा होती है कि सरकारी स्कूलों को कैसे बंद करना है और निजी स्कूलों को कैसे लूटने के लिये खुल्ला छोड़ना है I जब एक खदानों का मालिक और लालची खनिज मंत्री मिलते हैं और समसामयिक चर्चा ये होती कि कैसे मोटी रकमों के नीचे से जहरीली हवाओं को जनता के फेफड़ों को खराब करने के लिये छोड़ा जा सकता है I जब एक बेईमान मेडिकल कॉलेज या फाइव स्टार हॉस्पिटल का मालिक या दवाई फैक्टरी का मालिक और दंभी स्वास्थय मंत्री की मुलाकात होती है और सारगर्भित चर्चा कर मासूम बच्चों की मौतों की इबादत पर हस्ताक्षर किये जाते हैं I जब एक दारू के धंधे का बादशाह का मेल मिलाप आबकारी मंत्री से होता है और जहरीली शराबों का व्यापार फलता फूलता है और जब किसी अपराध की दुनिया की गंदी मछली, गृह मंत्री से सारगर्भित और समसामयिक विषय पर चर्चा करता है ? और हां जब नगरीय प्रशासन मंत्री 3 साल एक टेंडर पर ठेकेदार से महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा करता रहता है और उधर 35 आदमी टेंडर की देरी के भेंट चढ़ जाते हैं !

अब तो रूह कांपने लगी है समसमायिक विषयों से और सारगर्भित चर्चाओं से ? क्यों देश की जनता को ऐसी ‘ सौजन्य ‘ भेंटों की बलि चढ़ाते हो हुजूर ? सिलिंडर की और पेट्रोल पंपों की दुकानों में लंबी – लंबी लाइनों से जी घबराता है मिलार्ड, 52000 करोड़ के काले धन का आरोप ये इंगित करता है कि सत्ता पर नेता नहीं टोपी लगाए स्वयं दीमक विराजमान है जो अपनी ही कुर्सी खा रहा है I जब देश में महिलाओं पर बेइंतिहां जुल्म हो रहे हों तब वोटों के लिये नारी वंदन का ढोंग क्यों मालिक ? जब देश में मजदूरों को काम नहीं, उचित तनख्वाह नहीं , देश में शिक्षा संस्थान नहीं, शिक्षकों का मान नहीं, देश भारी कर्ज से दबा है, निर्यात नहीं, अंतर्राष्ट्रीय रूप से एक कंगाल देश , जिसके पास ना कोई नीति है ना कोई योजना, जहरीला पानी और जहरीली हवा और जहरीली दवा जब देश का दुर्भाग्य बन गयी हो तब क्यों भारत को धर्म के नाम पर उलझाये रखा है मिलार्ड !

दो नेता कलफ लगे झक सफेद कुर्ते पजामे पहन के , केनवास के जूते पहन के, बालों में तेल लगा के, दुल्हे की तरह पार्टी का गमछा डाल के सरकारी बंगले के सुसज्जित कमरे में बैठ के समसामयिक , सारगर्भित मसलों पर झूठी चर्चाएं करते फोटो सोशल मीडिया पर चिपकाते रहते हैं और देश बेवकूफ बनता रहता है , सत्ता के लिये इतना प्रपंच ठीक नहीं मिलार्ड देखना सत्ता की भूख कहीं भारत को हंगरी ( hungry ) ना बना दे !

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