IRS ( भारतीय राजस्व सेवा ) अधिकारी प्रभा भंडारी को सी. बी. आई. ने 70 लाख रुपए की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है, 2016 बेच की IRS अधिकारी प्रभा भंडारी झांसी में सी. जी. एस. टी. में डिप्टी कमीश्नर की पोस्ट पर पदस्थ थीं ! खूब छापे मारती थीं प्रभा भंडारी ! छापे मारने का उद्दैश्य सरकार के खजाने में इजाफा करना नहीं होता था और ना ही बेईमान व्यापारियों को ये संदेश देना होता था कि ईमानदारी से जो टैक्स जनता से वसूला जाता है उसको सरकार को दो ताकि सरकार गरीबों के कल्याण के लिये विभिन्न सरकारी योजनाएं ला सके ! लेकिन इसके उलट सरकार में बैठी प्रभा भंडारी स्वयं ही बेईमान निकली , पता नहीं कितनी ही प्रभा भंडारी और पूजा सिंघल या समीर विश्नोई ने पूरे सरकारी तंत्र को दीमक की तरह खोखला कर दिया है ! दूसरों के प्रतिष्ठानों में छापा मारने वाली प्रभा भंडारी के यहां जब CBI ने छापा मारा तो 90 लाख रुपए केश मिला और सोने – चांदी के जेवर और करोड़ों रुपए के संपत्ति के कागजात मिले !
UPSC के रिजल्ट के दौरान चयनित उम्मीदवारों का ऐसा महिमामंडन किया जाता है जैसे IAS/ IPS / IRS / IFS बनने के बाद पता नहीं क्या कर लेंगे ये लोग ? यू. पी. एस. सी. में लगभग 1000 सरकारी उच्च पदों के लिये करीब 13- 14 लाख उम्मीदवार बैठते हैं , सही सुना आपने 1000 पद ! जिसमे से मुख्य रूप से IAS, IPS , IFS , IRS के लिये पद होते हैं , सफलता का प्रतिशत सिर्फ 0.1% है, और यही नौजवानों का सपना होता है ! लेकिन देश के नौजवानों को सच्चाई समझना होगा कि IAS / IPS / IRS / IFS के पास कोई जादुई छड़ी नहीं होती कि इनका जीवन सुख, सम्रद्धि, आनंद से परिपूर्ण होता है, जब ये तन्त्र में घुसते हैं तब ये अफसरों, नेताओं, मंत्रियों के गुलाम बनकर रह जाते हैं, बाहर कभी हकीकत आती नहीं क्योंकि जिस पद को पाने के लिये जीवन बर्बाद कर दिया हो .. उसकी कैसे आलोचना कर दें ? यूपीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण करने से लेकर प्रशिक्षण लेने तक तो वो क्रांतिकारी बने रहते हैं, समाज को बदलना है, सरकारी तंत्र को सुधारना है, भ्रष्टाचार को मिटाना है जैसे नारों के साथ वो साक्षात्कार देते रहते हैं उसके बाद तंत्र मे घुसते ही अहंकार , पैसा , पद, लालच का ऐसा रंग चढ़ता है कि तंत्र इनको ही कपट, बेईमानी की डगर पर डाल देता है और जीवन में शुरू होता है तनाव, डर और भय .. हमारी जो कल्पना थी कि सरकारी तंत्र एक वेलफेयर स्टेट है , लेकिन यथार्थ में ऐसा बिल्कुल नहीं नजर आता है, तथाकथित वेल्फेयर स्टेट एक लूट तंत्र में परिवर्तित हो चुका है , तो फिर नौकर शाही भी तो उसी तंत्र का हिस्सा है I
हरियाणा के IAS धर्मेंद्र सिंह , छत्तीसगढ़ के IAS अनिल टुटेजा , झारखंड की IAS पूजा सिंघल जैसे जाने कितने ही नौकर शाह भृष्टाचार के आरोपों से घिरे हुए हैं, मध्य प्रदेश केडर के टीनू जोशी और अरविंद जोशी दोनो IAS, अनाप शनाप कमाया, जब घर पर छापा पड़ा तो बिस्तर के नीचे, बाथरूम में जमीन के नीचे , हर जगह करोड़ों रुपए कैश मिला, दोनो पति पत्नि को जेल हुई ! एक ऐसे ओहदे पर पहुंचने के बाद जहां, इज्जत, शोहरत सब हासिल हो जाता है, वहां पहुंचकर ये अपना जीवन अहंकार, झूठी दौलत, भय और डर से भर लेते हैं I IAS, IPS , IFS , IRS बनने का सबसे बड़ा लालच है ऊपरी कमाई, ऐसी पढ़ाई लिखाई से क्या फायदा कि आदमी ईमान बेचने को तैयार हो जाए ?
क्या हमारा देश ठगों , बेइमानो, मक्कारो का देश बनता जा रहा है ? देश प्रेम के लिए कोई जगह नहीं , गरीबों , जरूरतमंदों, जर्जर शिक्षा, स्वास्थ्य की ओर कोई जिम्मेदारी नहीं , सरकारी ओहदा क्यों पाना है ? सिर्फ पैसे और पॉवर के लिए , जनता को लूटने के लिए ? ऐसा नहीं है कि सभी अधिकारी भृष्ट हैं, मुठ्ठी भर भारतीय प्रशासनिक अधिकारी और भारतीय पुलिस पुलिस सेवा के अधिकारियों ने विलक्षण सेवा भावना और ईमानदारी की मिसालें देश में कायम की हैं जैसे राजू नारायण स्वामी, अशोक खेमका, आर्मस्ट्रांग पाम , टी एन शेषन, दुर्गा शक्ति राजपाल, किरण बेदी के अलावा भी अनेकों अधिकारी निहायत ही ईमानदार हैं और निष्ठा पूर्वक अपने कर्तव्यों को निभाते हैं, लेकिन इनकी संख्या मुट्ठी भर है I
चील भी ऊंचे आसमान पर उड़ती है लेकिन उसकी नजर तो जमीन पर चूहे पर ही रहती है, मांस के टुकड़े पर ही रहती है .. ऐसी उड़ान से क्या फायदा ? जब जीवन को समझ जायेंगे ,खुद को समझ जायेंगे तो पैसा कितना चाहिए और क्यों चाहिए , ये भी समझ जायेंगे I
