पंडित प्रदीप मिश्रा का ये दावा कि गंडकी नदी किनारे के रुद्राक्ष से मनुष्य के कष्टों का निवारण होता है ये बिलकुल सफेद झूठ है
अंध श्रद्धालुओं को ये समझना चाहिए कि कष्ट तुम्हारे नहीं, पंडित प्रदीप मिश्रा के दूर हो रहे है
पंडित प्रदीप मिश्रा अपनी पीढ़ियों के लिये जमा कर रहे हैं और मूर्ख भक्तो को शमशान भेजकर हमेशा के लिये उनके कष्ट दूर कर रहे हैं I
अज्ञानी भक्त उनके मात्र ग्राहक हैं, ये पूरा प्रपंच लूटने और लुटने का है, धर्म को हिंदुस्तान में कामना और कारोबार का पर्याय बना दिया गया है
तुम्हारे कष्ट किसी मोती, मूंगा, पन्ना, रुद्राक्ष को धारण करने से दूर नहीं होंगे , तुम्हारा कष्ट हैं तुम्हारी अज्ञानता , तुम्हारी अशिक्षा I
तुम्हारे कष्ट, तुम्हारी बेचैनी, तनाव, दुख तुम्हारे गलत जीवन जीने से आते हैं, तुम्हारी अनर्गल मान्यताओं, कुरुतियों और सड़ी – गली परंपराओं से आते हैं
मुक्ति की उड़ान / भोपाल
कुबेश्वर धाम सीहोर की सुपर हिट नौटंकी ‘ रुद्राक्ष महोत्सव ‘ के बेनर के अंतर्गत निर्माता , निदेशक, फाइनेंसर, डिस्ट्रिब्यूटर, पटकथा लेखक, अभिनेता पंडित प्रदीप मिश्रा हर वर्ष निशुल्क रुद्राक्ष का वितरण करते हैं और पूरे देश से अनपढ़ और अंधविश्वासी जनता ‘ फ्री ‘ के रुद्राक्ष लेने के लिये टूट पड़ती है और भीड़ में भगदड़ से दर्दनाक मौतें होती रहती हैं, हर वर्ष मासूम लोग मारे जाते हैं , इस बार तो अभी तक 7 भक्तों के मौत की पुष्टि हो चुकी है I अभिनेता पंडित प्रदीप मिश्रा कुशल नेता की तरह पूरे देश में विभिन्न मंचों से ‘ रुद्राक्ष महोत्सव ‘ का झूठा प्रचार प्रसार करते रहते हैं और पब्लिसिटी ये कह कर करते हैं की वो गंडकी नदी ( नेपाल – भारत बार्डर ) किनारे के रुद्राक्ष , भक्तों को उपलब्ध कराते हैं , इन विशेष रुद्राक्ष से इंसान के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं लेकिन दैनिक भास्कर ने 21 मई 2023 में एक विस्तृत स्टोरी की थी, दैनिक भास्कर की टीम ने सच्चाई का पता लगाने के लिये भारत नेपाल बॉर्डर और नेपाल की गंडकी नदी के किनारे किनारे 600 किलोमीटर की यात्रा की और पता लगाया की गंडकी नदी किनारे रुद्राक्ष की खेती होती ही नहीं है I
सच तो ये है कि गंडकी नदी के किनारे से नहीं , बल्कि नेपाल तिब्बत बोर्डर से पंडित मिश्रा को 48 लाख रुद्राक्ष सप्लाई किये गये थे जिसकी कीमत लगभग 30 लाख भारतीय रुपए थी याने एक रुद्राक्ष की कीमत 1 रुपए से भी कम थी I सोचिये कि व्यापारी पंडित प्रदीप मिश्रा 30 लाख रुपए का निवेश क्या अंधभक्तो के कष्टों को दूर करने के लिये कर रहा है ? अक्षर शत्रुओं ये को समझना चाहिए कि कष्ट तुम्हारे नहीं पंडित प्रदीप मिश्रा के दूर हो रहे है, एक एक कथा के पंडित जी लाखों रुपए की फीस लेते हैं और कुबेश्वर धाम में निवेश करते है, पंडित प्रदीप मिश्रा अपनी पीढ़ियों के लिये जमा कर रहे हैं और मूर्ख भक्तो को शमशान भेजकर हमेशा के लिये उनके कष्ट दूर कर रहे हैं I
पंडित प्रदीप मिश्रा का ये दावा कि गंडकी नदी किनारे के रुद्राक्ष से मनुष्य के कष्टों का निवारण होता है ये बिलकुल सफेद झूठ है , दूसरी बात ये है की रुद्राक्ष का वितरण एक पब्लिसिटी स्टंट है ताकि लोग कुबेश्वर् धाम आयें और पंडित प्रदीप मिश्रा और उनके साथ धंधेबाजों का पूरा गिरोह, श्रद्धालुओं से अंधविश्वास के नाम पर मोटी रकम की उगाही कर पाएँ , पंडित प्रदीप मिश्रा विशुद्ध रूप से एक व्यापारी है और अंधश्रद्धालु और अज्ञानी उनके मात्र ग्राहक हैं, ये पूरा प्रपंच लूटने और लुटने का है, धर्म को हिंदुस्तान में कामना और कारोबार का पर्याय बना दिया गया है I धर्म के नाम पर परंपरा, रूढ़िवादिता, कहानियाँ और कामना पूर्ति का एक कुचक्र रचा गया है, पौराणिक धर्म चोखा व्यापार है जो मान्यता पर चलता है, बस मान लो कि रुद्राक्ष एक अध्यात्मिक बीज है या फल है और उससे तुम्हारे कष्ट दूर होते हैं, अरे क्यों मान लें ? क्या ये बात गीता में लिखी है ? उपनिषदों में लिखी है ? कहाँ लिखा है ? किसने बोला है ? जरा पता तो करो ? जरा जानने की कोशिश तो करो ? क्यों बेमौत मरने को चले आते हो ?
पंडित प्रदीप मिश्रा अंध श्रद्धालुओं की दर्दनाक मौत का दोषी है, लेकिन वो जनता की मौत पर पश्चताप करने के बजाए , ये साबित करना चाहता है कि जिनकी मौत हुई वो बूढ़े थे, बीमार थे, कमजोर थे, वकील जैसी जुबान में अहंकार की भाषा बोलने वाला व्यापारी कथा वाचक को भक्तों से नाम मात्र की संवेदना नहीं है I नेता भी डरे हुए हैं, पंडित प्रदीप मिश्रा के खिलाफ कोई भी कार्यवाही करने से भयभीत हैं क्योंकि पंडित प्रदीप मिश्रा के पास मूर्ख भक्तों का वोट बैंक जो है I सनातन धर्म के केंद्रीय ग्रंथ हैं उपनिषद , जिसमें श्रीमद्भगवादगीता भी शामिल है, जो हमारे वेदों के ही तो शुद्ध रूप हैं I असल अध्यात्मिक दर्शन है जानना, समझना, बोध ( आत्मज्ञान ) स्वयं को जानना, जब खुद को जान लोगे तो जगत को भी जान लोगे, जगत के मिथ्या को समझने लगोगे, फिर पंडित मिश्रा के सारे प्रपंच बिलकुल साफ साफ दिखायी देने लगेंगे , फिर नेताओं के झूठ और दिखावे की समाज सेवा की कलई बिल्कुल ठीक ठीक तरह से दिखने लगेगी , फिर धोख़ा नहीं खाओगे, फिर समझ जाओगे की रुद्राक्ष एक साधारण बीज भर है, कोई जादू नहीं की उसको धारण करने से तुम्हारे कष्ट दूर हो जायेंगे ?
ना तो तुम्हारे कष्ट किसी मोती, मूंगा, पन्ना, पुखराज, हीरा, नीलम को धारण करने से दूर होंगे ना ही रुद्राक्ष धारण करने से , तुम्हारा कष्ट है, तुम्हारी अज्ञानता , तुम्हारी अशिक्षा I तुम्हारे कष्ट, तुम्हारी बेचैनी, तनाव, दुख , तुम्हारे गलत जीवन जीने से आते हैं, तुम्हारी अनर्गल मान्यताओं, कुरुतियों और सड़ी – गली परंपराओं से आते हैं, तुमको धर्म के ठेकेदारों ने घिसी पिटी संस्कृति और लोकधर्म जिसमे कांवड यात्रा जैसे ढोंग शामिल हैं के अजीब से पाखंड में ढकेल दिया है, जहां तुम बेमौत मारे जा रहे हो कभी हाथरस में , कभी महाकुम्भ में, कभी मनसा देवी हरिद्वार में I सिर्फ, ज्ञान, शिक्षा और असल अध्यात्मिक दर्शन ही तुम्हें मुक्ति और आनंद दे सकते हैं I हटाओ अपने जीवन से इन नकली बाबाओं को, अगर सरकार इनको अपने स्वार्थ के लिये सरंक्षण दे रही है तो कम से कम तुम तो इनकी कथाओं ( व्यापार ) का बहिष्कार कर सकते हो , जहां जहां सनातन धर्म के नाम पर लालची बाबा कुछ भी झूठ बोलें , वहीं इनके चेहरे पर कालिख पोतो ..
हिंदुस्तान में बाबाओं , नेताओं , सत्ता की गोदी में बैठी मीडिया , नौकरशाहों और पूंजीपतियों के संगठित षड्यंत्र द्वारा तुमको लूटा जा रहा है, तुमको कभी धर्म के नाम पर पाखंड थोपा जा रहा है या धर्म के नाम पर नफरत की अफीम खिलाई जा रही है .. होश में आओ वरना दूसरे अंध श्रद्धालुओं की तरह तुम भी यूं ही बेमौत मारे जाते रहोगे I
