पौरुष संस्था को विपिन नजर नहीं आता जिसने अपनी पत्नि निक्की को दहेज के लिये जिंदा जला दिया, क्या निक्की की दर्दनाक चीखें नहीं सुनी पौरुष संस्था ने ?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार आज भी रोज 20 – 22 महिलाएं दहेज के लिये मार दी जाती हैं लगभग हर घण्टे में एक ‘ शक्तिशाली नारी ‘ को ‘ अबला, निरीह , कमजोर पुरुष ‘ द्वारा मार डाला जाता है
इंदौर की पौरुष संस्था सस्ती पब्लिसिटी के लिये नौटंकी कर के दशहरे को सोनम को समर्पित करना चाहता है जबकि हर तरफ रावण रूपी लालची , अहंकारी , कामी, अत्याचारी भारत को खोखला कर रहे हैं I
मुक्ति की उड़ान / भोपाल
आज खबर देखी कि मध्यप्रदेश के संस्कारी शहर इंदौर में रावण की जगह सूर्पणखा के 10 सर वाले पुतले का दहन किया जायेगा और 10 – 11 क्रूर हत्यारी महिलाओं जैसे सोनम रघुवंशी, मुस्कान रस्तोगी या निकिता के चेहरों को नाम के साथ सूर्पणखा के दस सर प्रदर्शित किये जायेंगे , इंदौर के पीड़ित पुरुषों की एक संस्था हैं ‘ पौरुष ‘ , उसके अति उत्साहित अध्यक्ष ने ये प्रोपेगेंडा किया है और जगह जगह गली मोहल्लों, टी वी पर पुरुषों को अबला साबित करने में लगे हुए हैं कि पुरुषों पर अत्याचार हो रहा है बचाओ !!
रावण या मेघनाथ या सूर्पणखा किसी पुरुष या नारी का प्रतीक नहीं है , वो तो बुराई के प्रतीक हैं और हर वर्ष रावण रूपी बुराई याने अहंकार, काम, क्रोध, लोभ द्वेष और मोह का दहन किया है, शताब्दियों से पुरुषों ने महिलाओं पर अत्याचार किये हैं और आज भी बददस्तूर जारी हैं, सरकारी आंकड़ों के अनुसार आज भी रोज 20 – 22 महिलाएं दहेज के लिये मार दी जाती हैं लगभग हर घण्टे में एक ‘ शक्तिशाली नारी ‘ को ‘ अबला, निरीह , कमजोर पुरुष ‘ द्वारा मार डाला जाता है और ये तो सरकारी आंकडा है, असल में तो इसका कई गुना होगा ? पौरुष संस्था के अध्यक्ष को सूर्पणखायें दिख गयीं और समाज में विद्यमान रावण नहीं दिख रहे, वहां तो इनके मुंह, आँख, नाक सब बंद हो जाते हैं , वहां इनकी रीढ़ , लालच और भय के चलते झुकी रहती है ?
पौरुष संस्था को विपिन नजर नहीं आता जिसने अपनी पत्नि निक्की को दहेज के लिये जिंदा जला दिया, क्या निक्की की दर्दनाक चीखें नहीं सुनी पौरुष संस्था ने ? क्या पौरुष संस्था पवन गुप्ता, विनय शर्मा, मुकेश सिंह और अक्षय कुमार सिंह जैसे दरिंदो को भूल गयी जिन्होंने दिल्ली में निर्दोष निर्भया का बलात्कार किया ? सिर्फ बलात्कार करने से उन हिंसक और कामुक जानवरों की काम वासना शांत नहीं हुई थी बल्कि निर्भया के साथ इतनी बर्बरता की गयी कि उसकी तड़प – तड़प कर मौत हुई I क्या पौरुष संस्था को समाज में बैठे वो महिषासुर ( पूँजीपति ) नहीं दिखाई देते जो अपने लालच और अहंकार के चलते पहाड़ काट रहे हैं , पेड़ काट रहे हैं, पहाड़ों का सीना फाड़ कर रोड बना रहे हैं , होटेल्स बना रहे हैं, अय्याशी के अड्डे बना रहे हैं और उत्तराखंड के धराली में, वैष्णो देवी में, हिमाचल में पहाड़ धसने से, अति वृष्टि से हजारों लोगों की मौत का कारण बन रहे हैं I
क्या पौरुष संस्था को हाथरस में बैठा एक पाखंडी भोले बाबा उर्फ नारायण साकार हरि उर्फ सूरजपाल नहीं दिखता ? जिसने भारत में अंधविश्वास फैला रखा है और हाथरस में उसके सत्संग के दौरान भगदड़ मचने से 123 लोग मर गये ? हाथरस प्रशासन में बैठे प्रशासनिक अधिकारी क्या इतनी बड़ी संख्या में मारे गये लोगों की हत्त्या के दोषी नहीं ? लगाओ ना इनके चेहरे दशानन के सरों पर ? क्या पौरुष संस्था को खंडवा की अवैद्य रूप से चल रही पटाखा फेक्टरी में विस्फोट होने से दर्जनों लोगों के हत्त्या के दोषी , फैक्ट्री के मालिक राजेश अग्रवाल और सोमेश अग्रवाल नहीं दिखते जो अवैद्य रूप से पटाखे बना रहे थे, खंडवा के तत्कालीन भ्रष्टाचारी प्रशासनिक अधिकारी नहीं दिखते जो घूंस ले के मौत की फैक्ट्री चलने दे रहे थे ?
पौरुष संस्था को सिर्फ सोनम, मुस्कान दिख रही हैं ? उनको ललित मोदी नहीं दिख रहा ? नीरव मोदी, मेहुल चोकसी, विजय माल्या, नितिन संदेसरा नहीं दिख रहे जो बैंकों के हजारों करोड़ रुपए ले के भाग गये ? क्या ये रावण के रूप नहीं ? सेकड़ो महिलाओं के बलात्कारी प्रज्वल रेवन्ना को क्यों भूल गये संस्कारी पौरुष संस्था के अध्यक्ष ? क्या क्या लिखूँ ? चारों तरफ बेईमानों, ठगों , लालचियों , भृष्टाचारियों का बसेरा है, लेकिन पौरुष संस्था सस्ती पब्लिसिटी के लिये नौटंकी कर के दशहरे को सोनम को समर्पित करना चाहता है जबकि हर तरफ रावण रूपी लालची , अहंकारी , कामी, अत्याचारी भारत को खोखला कर रहे हैं I
