पिछले दिनों इंदौर में एक भीषण दुर्घटना में 3 युवाओं की मौत हो गई , कार में 2 युवतियाँ और 2 युवक सवार थे, 25 – 26 साल के चारों युवा नशे में धुत्त थे, जिसमें से 2 युवकों और 1 युवती की घटना स्थल पर ही मौत हो गयी थी I युवा तथाकथित इज्जतदार घरों से वास्ता रखते थे, इनके पिता पैसे और रुतबे में इन्दौर के अग्रणी लोगों में शुमार थे ! मृतकों में प्रेरणा बच्चन के पिता बाला बच्चन मध्यप्रदेश शासन में गृह मंत्री रह चुके हैं और प्रखर कासलीवाल के पिता कांग्रेस के बड़े नेता हैं I मान संधू के पिता भी इन्दौर के प्रतिष्ठित ट्रांस्पोर्ट व्यवसायी हैं ! शराब , सिगरेट, ड्रग्स की लत युवाओं की दर्दनाक मौतों का कारण बन रही है , मध्यप्रदेश नशे के कारोबार का प्रमुख अड्डा बनता जा रहा है। कुछ दिन पूर्व प्रदेश में करोड़ों रुपए के ड्रग्स कारोबार का खुलासा होने के बाद अब पुलिस थाने के पास नशे के धंधे की खबर हैरान करती है। मध्य प्रदेश ही क्या पूरे भारत मे सूखे नशे और एम. डी. ड्रग्स का कारोबार सैकड़ों – हजारों , लाखों करोड़ रुपए का हो चुका है , आखिर युवा क्यों नशे के आदी हो रहे हैं ?
समाज की नजरों में नशे करने वाले लोग आसामान्य होते हैं और हमारा प्रबुद्ध समाज , नशेड़ियों को समाज की सामान्य धारा में वापिस लाना चाहता है ? समाज ये मानता है कि जो साधारण होश है , वो जीवन जीने के लिये उपयुक्त है I जब मनुष्य की चेतना का साधारण होश जीवन मे आनंद लाता है तो क्यों हिंदुस्तान के करोड़ों लोग नशे के आदी हैं और क्यों नशे में आनंद ढूंढ रहे हैं ? अर्थशास्त्री कहते हैं नशा ठीक नहीं, समाजशास्त्री कहते हैं कि नशा करना नाश का कारण है तो फिर युवा क्यों आनंद से जीवन जीना नही चाहते ? जवानी दहकना चाहती है लेकिन समाज के घिसे पिटे ढर्रे युवाओं में कुंठा पैदा कर रहे हैं ? जवानी कुछ करना चाहती है, कुछ नया , कुछ सार्थक , कुछ अनोखा, लेकिन दुर्भाग्य से साधारण होश में जीते सामाजिक परंपराओं, मान्यताओं और अंधविश्वास को निभाते तथाकथित ज्ञानी और सांसारिक लोग , युवाओं को अपने घिसे पिटे समाज के बंधनों में बांधना चाहते हैं ! युवा क्या करे ? तो युवा नशे की एक काल्पनिक में दुनिया में प्रवेश कर लेता है और सुकून ढूंढने की कोशिश करता है I
क्या साधारण होश में जीते लोग नशेड़ी नहीं हैं ? अंधाधुंध पैसे के पीछे भागते लोग नशेड़ी नही हैं ? कॉलेज, यूनिवर्सिटी में पैसे की दौड़ और प्लेसमेंट का खेल नशा नहीं है ? कोई इज्जत का नशा कर रहा है, किसी को हर जगह इज्जत चाहिए ? ये नशा नहीं है ? कोई मां युवा बच्चों के पीछे लगी है कि अब नौकरी लग गयी है अब शादी कर ले, शादी हो जाती है तो पीछे लग जाती है कि बच्चे कर ले ? क्या इस माँ को नशेड़ी नहीं कहें ? कोई युवा गलत नौकरी कर रहा है तो वो नशा करेगा ? जो गलत शादी में फंस गया है तो वो नशा करेगा ? क्या युवा देख नही रहे कि समाज मे धर्म के नाम पर सिर्फ कामनाओं की पूर्ति का खेल हो रहा है ? धर्म के पाखंडी ठेकेदार बलात्कार के आरोप में जेल मे सड़ रहे हैं ? क्या ये नशाखोरी नहीं है ? घरों में क्या चल रहा है ? भाई – भाई एक दूसरे के खून के प्यासे है ? युवा देख रहे हैं कि बाप घर में तो आदर्श की बातें करता है और कार्यालय में भृष्टाचार करता है ? क्या ये बेहोशी के लक्षण नहीं हैं ? रोज दर्जनों लड़कियाँ दहेज की आग में जला दी जाती हैं, अब तो शादी शुदा लड़के भी फांसी लगाने को मजबूर हैं ? ये जानलेवा नशा नहीं है ?
जिन नेताओ को हम अपना आदर्श मानते हैं वो हमें साफ पानी और स्वच्छ हवा तक नहीं दे पा रहे हैं, हमारे नेता पर्यावरण और क्लाइमेट चेंज की बात नहीं कर रहे , क्या हमारे नेता नशेबाज नहीं ? हिंदुस्तान की 90 प्रतिशत अवाम किसी ना किसी नशे में धुत्त है चाहे वो धर्म का हो, मान्यताओं का हो, कुरुतियों का हो, संस्कृति का हो , पैसे का हो, इज्जत का हो, बेईमानी का हो, अशिक्षा का हो, जाति का हो , अहंकार का हो, ओहदे और पद का हो .. पूरा देश अंधविश्वास के नशे में डूबा हुआ है .. हम क्यों युवाओं के ऊपर अपनी घटिया परंपराओं और मान्यताओं को थोपना चाहते हैं .. क्यों हम युवाओं को एक बंधी – बंधाई सामाजिक बेड़ियों में बांधना चाहते हैं ? उन्हें बंधनों से भागकर नशे में डूबने से रोकिये .. युवाओं को जीने दीजिये, कुछ सार्थक करने का मौका दीजिये .. विवेक , बोध और समझ से स्वयं भी जियें और युवाओं को भी मुक्ति दीजिये I
