असल में नेताओं को क्रिकेट से या कोई भी स्पोर्ट्स से कोई लेना देना नहीं है , उनको मतलब है क्रिकेट में अकूत पैसे को लूटने से !
नेता जी और उनके सपुत्र को विश्व पटल पर खेलों में भारत को एक शक्ति बनाने में कोई दिलचस्पी है ? बिल्कुल नहीं ! अहंकारी और खुदगर्ज नेताओं को सिर्फ अपने खोटे सिक्कों को चलाकर अपनी व्यक्तिगत तिजोरी भरनी है !
क्या आपको मालूम है कि भारत का कुल खेल बजट 400 मीलियन डॉलर है और चीन का 3.2 बीलियन डॉलर ! भारत से 8 गुना ? चीन में 1 लाख 70 हजार मैदान हैं और भारत में केवल 1000
मुक्ति की उड़ान / भोपाल
महा आर्यमन सिंधिया को MPCA ( मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन ) का निर्विरोध अध्यक्ष चुन लिया गया , 29 वर्षीय महा आर्यमन जो सोशल मीडिया में अपने आपको mahanaryaman ( महानआर्यमन ) लिखते हैं , अब तक के सबसे कम उम्र के अध्यक्ष हैं, इससे पहले महा आर्यमन के पिता ज्योतिरादित्य सिंधिया भी MPCA के अध्यक्ष रह चुके हैं और उससे पहले ज्योतिरादित्य के पिता माधवराव सिंधिया भी MPCA के अध्यक्ष रह चुके हैं , याने मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन सिंधिया परिवार की बपौती बन चुका है ? महा आर्यमन सिंधिया की क्या योग्यता है ? जो उन्हें इस पद पर चुना गया है, 400 गुलामों की देखरेख में 4000 करोड के महल में रहने वाले राजकुमार की योग्यता सिर्फ इतनी है कि वो जीवाजी राव, माधव राव का वारिस है ?
असल में नेताओं को क्रिकेट से या कोई भी स्पोर्ट्स से कोई लेना देना नहीं है , उनको मतलब है क्रिकेट में अकूत पैसे को लूटने से ! क्रिकेट का मैदान सिर्फ मैदान नहीं होता, उसमें कुबेर देवता निवास करते हैं ! अथाह धन है क्रिकेट में तभी तो लालची नेता, पूँजीपति, फिल्मी स्टार्स क्रिकेट के व्यवसाय में घुसे हुए हैं ? भारत के गृह मंत्री अमित शाह ने अपने पुत्र जय शाह को BCCI का सचिव बना दिया और अब वो ICC का अध्यक्ष है ? कितने ही पूर्व क्रिकेट खिलाडी , कोच, स्पोर्ट्स पर्सनालिटीस ने मैदान में संघर्ष किया है, पसीना बहाया है और क्रिकेट को इस मुकाम पर पहुंचाया है .. वो सब क्या निकम्मे हो गये ? और नेता जी के एक निठल्ले को हजारों करोड़ रुपये के BCCI में सचिव के पद पर बैठा दिया ? क्या नेता जी और उनके सपुत्र को भारत के खेलों से, खिलाडियों से या भारत को विश्व पटल पर खेलों में एक शक्ति बनाने में कोई दिलचस्पी है ? क्या उनके पास कोई योजना है ? बिल्कुल नहीं ! अहंकारी और खुदगर्ज नेताओं को सिर्फ अपने खोटे सिक्कों को चलाकर अपनी व्यक्तिगत तिजोरी भरनी है !
क्रिकेट खेल नही हैं वो एक पूर्णतः व्यापार में तब्दील हो चुका है I नेताओं , पूंजीपतियों और मीडिया के स्वार्थ ने क्रिकेट का भारत में इतना प्रचार – प्रसार किया कि भारत दूसरे खेलों में फिसड्डी होता गया , इतना पिछड़ गया है कि 2024 के ओलंपिक में भारत सिर्फ 6 पदक पर सिमट गया जिसमें 5 कांस्य और 1 सिल्वर है, 140 करोड़ लोगों के देश में एक भी गोल्ड नहीं ? शर्म आनी चाहिए ? पाकिस्तान भी हमसे मेडल टेली में ऊपर था जो हर मोर्चे पर हमसे बहुत पीछे है, चाहे आर्थिक हो या पॉपुलेशन का मोर्चा हो ! अमित शाह हों या ज्योतिरादित्य सिंधिया हों, क्यों नहीं अपने बेटों का हॉकी एसोसिएशन या एथलेटिक एसोसिएशन या जिमनास्ट एसोसिएशन का अध्यक्ष बना देते और अपनी अकूत लूटी हुई संपत्ति में से कुछ ऐसे खेलों को दे देते हैं जो मुफलिसी के चलते मरणासन्न अवस्था में पड़े हैं I घोर अपमानजनक बात ये है कि अमेरिका की एक अकेली जिमनास्ट पेरिस ओलंपिक में इतने पदक जीतती है जितने पदक 117 सदस्यीय भारतीय खिलाड़ी मिलकर भी नहीं जीत पाते हैं ! शर्म से डूब मरने वाली बात है कि नहीं ? इथियोपिया जैसा गरीब देश हमसे मेडल टैली में ऊपर था !
भारत का कुल खेलों का बजट 400 मिलियन डॉलर है , इससे ज्यादा तो इंडियन प्रीमियर लीग ( IPL ) में सिर्फ विज्ञापनों से कमाई हो जाती है, पेरिस ओलंपिक मे चीन ने अमेरिका के बराबर 40 गोल्ड मेडल जीते हैं , चीन की जनसंख्या भारत के बराबर है, आपको मालूम है कि चीन का कुल खेल बजट 3.2 बिलियन डॉलर है, भारत से 8 गुना ? चीन में 1 लाख 70 हजार मैदान हैं और भारत में केवल 1000 ? विश्वास हो रहा है , जिसमे से ज्यादतर क्रिकेट के मैदान हैं ! चीन मे खेलों का व्यापार 700 बिलियन डॉलर का है और भारत में सिर्फ 2 बिलियन डॉलर का है ? हमारे देश के नेताओं ने भारत को खेलों में शर्मनाक स्थिति में पहुंचा दिया है , सिर्फ खेलों में ही नहीं हर क्षेत्र में चाहे वो सामरिक हो, शिक्षा हो, टेक्नोलॉजी हो, विज्ञान हो, भारत की स्थिति अत्यंत शर्मनाक है ! हिंदुस्तान में सिर्फ धार्मिक पाखंड, लालची नेताओं और नकली गुरुओं का विकास हुआ है !
भारत के नेताओं की लालची प्रवृत्ति, , नौकर शाहों के भृष्ट आचरण , पूंजीपतियों के लोभ, नकली धर्म गुरुओं का वर्चस्व, मीडिया के झूठ और अशिक्षित जनता ने भारत को हर क्षेत्र में रसातल में पहुंचा दिया है, क्रिकेट का कोई भी एसोसियेशन हो चाहे शहर का हो, जिले का हो या प्रदेश का हो, हर जगह एक नाकाबिल नेता किसी पद पर बैठा मिलेगा जो पैसा खायेगा और खिलाडियों का शोषण करता मिलेगा .. ना उसे खेल से मतलब होता है ना खिलाडियों से , उसे सिर्फ पैसो से सरोकार होता है , MPCA के 70 साल के कार्यकाल मे सिर्फ 8 खिलाडी ही भारतीय टीम में पहुंच पाए हैं , नरेंद्र हरवानी को छोड़ के कोई भी खिलाड़ी कुछ ज्यादा कर भी नहीं पाया है I
भारत में स्पोर्ट्स व्यापार कुल 2 बिलियन डॉलर का है जिसमें से 85% व्यापार सिर्फ क्रिकेट से संबंधित चीजों का होता है, क्रिकेट ने भारत में सभी खेलों को बर्बाद कर दिया है, भारत के साथ जितने भी देश क्रिकेट खेलते हैं उनकी सबकी जनसंख्या मिला भी दी जाये फिर भी भारत की जनसंख्या ज्यादा होगी , चीन और अमेरिका क्रिकेट जैसे खेल से बाहर हैं और ये उनके लिये सौभाग्य की बात है ! भारत के जो भी खिलाडी ओलंपिक में पदक लाये हैं , वो उनके व्यक्तिगत प्रयासों और कोशिशों से हो पाया है , अभिनव बिंद्रा ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि वो ओलंपिक में गोल्ड मेडल इसलिए जीत पाये क्योंकि उनके पास उनकी स्वयं की शूटिंग रेंज थी ! भारत ने ओलंपिक में क्रिकेट को शामिल करवाने के लिये बहुत जोर लगाया लेकिन IOA ने कभी क्रिकेट को ओलंपिक में शामिल नहीं किया, IOA का कहना है कि ये कैसा खेल है जिसमें एक खिलाडी बॉल फेंकता है और दूसरा खिलाडी उसको मारता है और बाकी खिलाडी जेब में हाथ डाले खड़े रहते हैं, ये कोई खेल है ? ऐसा कैसा खेल है जिसमें टी टाइम होता है, लंच होता है और ड्रिंक्स होता है ?
