आज अखबार में शोकसभा का रंगीन इश्तिहार देखा ! शोकसभा का कार्यक्रम 5 स्टार होटल ताज में रखा गया था, ये जो दिखावा करने वाले तथाकथित लोग होते हैं ना ये फाइव स्टार तमाशे का कोई मौका नहीं चूकते ! रोना भी है तो कारपेट वाले हाल में, जहां बड़े – बड़े झूमर लगे हों, टाई – बो लगे साफ सुथरे मैनेजर हों, फाइव स्टार खाना हो, शोक तभी प्रदर्शित हो पाता है ना जब चिकन सूप से किसी मासूम जानवर की आहें निकल रही हों , शोक सभा की फूलों आदि से सजावट के लिये इवेंट मैनेजमेंट कंपनी को हायर किया जाता है, आगे आगे देखिये शमशान भी किसी फाइव स्टार होटल के कोर्ट यार्ड में बनाये जायेंगे, वेलकम ड्रिंक के साथ आपका स्वागत होगा, इवेंट मैनेजर द्वारा सुनियोजित तरीके अंतिम संस्कार का आयोजन किया जायेगा और नाते, रिशतेदार होटल की शीशा लगी बालकनी से बियर और चाय की चुस्की लेते हुए लाइव अंतिम संस्कार देखेंगे , क्योंकि मूर्खो के पास पैसा आ रहा है !
जैसे वेडिंग प्लानर होते हैं वैसे ही लास्ट रिचुअल्स इवेंट प्लानर की डिमांड भी बहुत होने वाली है, 5 स्टार होटल जैसे वेडिंग हाल बनाते हैं वैसे ही लास्ट रिचुअल्स ओपन कोर्ट यार्ड भी बनाएंगे, सारे काम जैसे पंडित, कर्म कांडी पूजा, लकड़ी आदि लास्ट रिचुअल्स इवेंट प्लानर करेगा, शमशान में सेलफी पॉइंट भी होगा, LED वाल होगी, रोने धोने के लिये ग्लिसरीन होगी, शीशे से अंतिम क्रिया का लाइव देखने के बाद डिसाइनर सफेद कपड़ों में, ऊँची ऊँची हील वाली जूती पहने और आयातित काले चश्मे लगाये, अमीरजादे और अमीरजादियाँ आयेंगे और कुछ लास्ट रिचुअल्स कर के सेलफी पॉइंट पर फोटो खिंचवा के 5 स्टार होटल में भोजन ठूंसकर घर को प्रस्थान करेंगे I
ना तो इन दिखावा जीवी चेतना शून्य लोगों के उत्सव में कोई खुशी होती है ना इनके शोकसभा में कोई दुख , सिर्फ पैसा ही इनके जीवन का मापदण्ड होता है, सिर्फ पैसे को ही जीवन में महत्व देने वाले के जीवन का लक्ष्य सिर्फ पैसा कमाना ही रह जाता है, फिर हर चीज, जीवन की हर घटना – दुर्घटना को वो पैसे से ही तौलता है , थ्री ईडियट में करीना का मंगेतर सुहास टंडन याद है ना ? ऐसे सुहास टंडन पैसों को जेब में नहीं दिमाग में ले के घूम रहे हैं और ऐसे लोग पैसों को नहीं बल्कि पैसा इनको मेनेज कर रहा है I ऐसे धनपशु शोक या दुख को नहीं समझते, दुख को भी अपने खोखले ऐश्वर्य के नीचे दबा देना चाहते हैं, नकली जीवन जीते जीते इनका उठना, बैठना, रोना, हंसना सब कुछ नाटकीय सा हो जाता है I
भोपाल का एक शिक्षा माफिया, अथाह पैसा है उसके पास चलते पुर्जे ( बेईमान ) के पास , एक बार उसके घर जाना हुआ तो देखा 10 फीट ऊँची दीवार , ज़ूम वाले CCTV केमरे के पीछे एक डरा हुआ, सहमा हुआ बेईमान पैसे वाला रहता है, पैसा तो सुकून पाने के लिये कमाया जाता है ? पैसे से कार खरीदी जा सकती है लेकिन कार को चला के कहां ले जाना है ये तो बोध, समझ और ज्ञान से आता है ? दरअसल हिंदुस्तान में सरस्वती के बगैर लक्ष्मी आ गयीं हैं और पश्चिम देशों में पहले सरस्वती आई उसके बाद लक्ष्मी आई तभी तो वो विकसित देश हैं और तभी तो हिंदुस्तान में मूर्खो, जाहिलों को लूटकर महामूर्ख लाखों बिलियन डॉलर के मालिक बने बैठे हैं I
किसी सिग्नल वाले चौराहे पर ध्यान से देखना की एक मर्सिडीज का कांच खटखटाता भिखारी और मर्सिडीज के अंदर बैठा अमीरजादा एक जैसे नहीं हैं ? एक बाहरी तौर पर भिखारी है एक आंतरिक रूप से भिखारी है, मर्सिडीज के अंदर बैठा भी तो मर्सिडीज दिखा के ही तो मांगता है कि कोई तो मुझे इज्जत दे दो, सम्मान दे दो क्योंकि उसके पास दिखावे के अलावा कुछ नहीं होता , ना तो विद्या होती है, ना आत्मज्ञान होता है ना ही विवेक I मेरे पास आज एक फोन आया कि सोनी जी फलां की शोक सभा में चल रहे हो ? मैंने कहा कि मैं तो उनको जानता नहीं ? सामने वाला बोला वो कौन अजमेरा जी जो जानता था ? बस जाना है और सोशल मीडिया में एक उदास सी फोटो डालना है कि ” अजमेरा जी की शोक सभा में होटल ताज जाकर मृतात्मा को फूल अर्पित किये ” , इससे समाज में साख बढ़ती है, समझ रहे हो ना सोनी जी 😲
