10 साल पहले असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का नाम कोलकाता के सारदा वित्तीय समूह घोटाले में आने के बाद वो जेल जाने के भय से कांग्रेस को धोख़ा दे के शुद्धिकरण के लिये भाजपा में शामिल हो गये थे , हिमंता बिस्वा सरमा का घोटालों से और अपनों को धोख़ा देने का पुराना रिकॉर्ड है और भाजपा में शामिल होकर हिंदू – मुसलमान नफरत की राजनीति कर के असम की जनता को पिछले 10 साल से धोख़ा दे रहे हैं , याद रखिये सारदा वित्तीय समूह घोटाला कोई छोटा मोटा राजनीतिक घौटाला नहीं था, सैकड़ों – हजारों करोड़ रुपए के घोटाले ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में भूचाल ला दिया था ! आज कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा ने जब हिमंता बिस्वा सरमा पर व्योमिंग अमेरिका में 52000 करोड़ रुपए के काले धन के निवेश, दुबई में प्रोपर्टी और 3 देशों के पासपोर्ट रखने का आरोप लगाया तो हिमंता बिस्वा सरमा छटपटाने और फुफकारने लग गये, अभद्र भाषा का उपयोग करने लगे ! और पवन खेड़ा को गिरफ्तार करने असमिया पुलिस को दिल्ली भेज दिया !
52000 करोड़ रुपए के काले धन का आरोप मय कागजातों के लगना बहुत गंभीर है, सरकार को इसकी गंभीरता से जांच करनी चाहिए, 52000 करोड़ रुपए से असम की 2.50 करोड़ गरीब जनता को 20000 – 20000 रुपए बांटे जा सकते हैं, आसाम में 8600 स्कूल खोले जा सकते हैं ? 52000 करोड़ रुपए से असम का 25% कर्ज कम हो सकता है ! अगर इन आरोप में सच्चाई है तो इसका मतलब हिमंता बिस्वा सरमा ने असम को पूरी तरह लूट कर निचोड़ लिया है और ऐसे भ्रष्ट नेता का आजाद घूमने का कोई अधिकार नहीं है लेकिन फिलहाल तो पवन खेड़ा को अपराधी बनाने का प्रयास किया जा रहा है
हम हिंदुस्तानी घर में बैठे बैठे सोचते हैं कि नेताओं ने देश को बर्बाद कर दिया है , हमारे दुख, कष्ट और बेचैनी के लिये हम राजनेताओं पर सारा ठीकरा फोड़ देते हैं लेकिन हम भूल जाते हैं कि हमने ही तो इन घटिया , लोभी और घोटालेबाज नेताओं को सत्ता सौंपी है ? हिंदुस्तान में लोकतंत्र तो है लेकिन मतदाताओं के पास ज्ञान नहीं है ? शिक्षा नहीं है ? बिना शिक्षा के लोकतंत्र किसी भी देश के लिये अभिशाप है !
दुनिया में भारत भृष्टाचार के मामले में 91वें नंबर पर है और प्रेस फ्रीडम में 180 देशों में 161वें स्थान पर है और लोकतंत्र में हमको फ्लॉड डेमोक्रेसी (Flawed Democracy) या त्रुटिपूर्ण/दोषपूर्ण लोकतंत्र की श्रेणी में रखा गया है ! भारत में शिक्षा के इतने बुरे हालात हैं कि ASAR ( Annual Status of Education Report ) के ग्रामीण क्षेत्रों में किये सर्वे के अनुसार 9 वीं से 12 वीं कक्षा के बच्चों को जोड़ – घटाना – प्रतिशत जैसे बुनियादी अंक गणित के सवाल तक हल करने नहीं आते ? वैसे तो देश में साक्षरता 80% है लेकिन अपना नाम लिख लेने से आदमी शिक्षित नहीं हो जाता ? हिंदुस्तान में बमुश्किल 25 प्रतिशत लोग सही मायने में शिक्षित हों तो भी बड़ी बात है ? अब ये 25% शिक्षित मतदाता तो वोट देते नहीं हैं ? और बाकी के 75 प्रतिशत अशिक्षित भारतीय मतदाता हेमंता बिस्वा सरमा जैसे नेताओं को चुनते हैं, वो कहावत भी है ना कि जैसी जनता वैसे ही उसके नेता होते हैं ?
जनता अपने ही जैसे या निचले स्तर के आदमी को नेता चुनती है, जनता अपने से बेहतर शिक्षित, बुद्धिमान आदमी को कभी नेता नहीं चुनती , अगर नेता पढ़ा लिखा भी होता है तो चुनाव जीतने के लिये मूर्खों जैसी हरकत करता है और जनता को संदेश देता है कि मैं भी तुम्हारे बीच का ही हूं ? मूर्ख, अनपढ़ और अज्ञानी ! तभी तो भारत की राजनीतिक पार्टियां और नेता महामूर्खों जैसी बातें करते हैं, लालू यादव ने तो गंवारों जैसी हरकतें कर कर के बिहार को 15 साल बेवकूफ बनाया ! कभी नेता कहते हैं कि अगर तुमने हमारी पार्टी को वोट नहीं दिया तो मुसलमान तुम्हारी भैसें ले जायेंगे ? और बुद्धिहीन जनता महाघटिया स्वार्थी, लालची नेताओं के निकृष्ट बयानों में फंस भी जाती है ! अभी एक नेता कहता है कि तुम हमे वोट दोगे तो उनकी पार्टी तुम्हें मुफ्त गधा और बकरी या गाय और भैंस देगी ? अब ये क्या बाहियात बयान है ? कभी नेता जी ने अच्छी शिक्षा देने की बात की है ?
नेताओं को मालूम है की जनता अगर शिक्षित हो गयी तो उनकी नेतागिरी की दुकानदारी बंद हो जायेगी ! तो वो धर्म, नफरत, अंधविश्वास और पाखंड में जनता को फंसाये रहते हैं या और गरीब और अनपढ़ मतदाताओं का वोट खरीद लेते हैं, मुफ्त शराब पिला के, साड़ियां दे के या केश पैसे दे के .. आजकल तो हजारों रुपए महिलाओं के खाते में डालने का रिवाज चल गया है क्योंकि शातिर नेता जानते हैं कि महिलाओं को बेवकूफ बनाना तुलनात्मक रूप से आसान होता है ! भ्रष्ट नेताओं को हराम के पैसे की इतनी आदत लग चुकी है कि कांग्रेस के पवन खेड़ा , असम के महाभ्रष्ट मुख्यमंत्री के काले धन का पर्दाफ़ाश करते हैं तो गालीबाज मुख्यमंत्री अपना आपा खो देता है और पवन खेड़ा को गाली बकता है, विपक्ष के नेता और सांसद राहुल गाँधी और वयोवृद्ध नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को पागल कहता है, भारतीय राजनीति का ऐसा पतन हुआ है कि सुअर भी सोचता होगा कि वो नाली में बेहतर स्थिति में है !
हेमंता बिस्वा सरमा यहीं नहीं रुकते वो आरोपों की विवेचना नहीं कराते बल्कि अपनी गुलाम पुलिस को पवन खेड़ा को डराने के लिये दिल्ली पहुँचा देते हैं , भारत में आम जनता को एक FIR लिखवाने में पसीने निकल जाते हैं और सालों साल विवेचना और कोर्ट में में चालान जमा करवाने में पुलिस आम जनता का हौसले को ही तोड़ देती है वो ही पुलिस 24 घंटे में ताबड़तोड़ कार्यवाही कर देती है ? भारत में जंगल राज आ गया है, हिंदुस्तान को प्रपंची और लालची नेताओं की नहीं अध्यात्मिक गुरु की जरूरत है जो जनता के पीछे पीछे नहीं, आगे चले , जनता का नेतृत्व करे, जनता को बताये कि जनता के लिये क्या अच्छा है क्या बुरा है !
