बागेश्वर धाम सरकार धीरेंद्र शास्त्री यूं तो अक्सर विवादों में रहते हैं और पत्रकारों से पहले भी वो पंगा ले चुके हैं, लेकिन इस बार वो ” पत्रकारों की खुजली ” जैसा नया शब्द ढूंढ के लाये हैं , भिलाई ( छत्तीसगढ़ ) में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने पत्रकारों से कहा कि जिस पत्रकार को कोई खुजली हो तो प्रश्न पूछ सकता है ? ये पाखंडी बाबा मूर्ख श्रद्धालुओं की अंधविश्वास की खुजली मिटाते मिटाते सैकड़ों रुपए की मिल्कियत बना कर अज्ञानियों का बागेश्वर सरकार बना बैठा है , जिस मीडिया की वजह से मूर्खों का मूर्खाधिराज आज बड़ी बड़ी गाड़ियों में घूम रहा है, पाखंडी चोला पहन कर संसारियों जैसे हर अय्याशी के मजा ले रहा है, मीडिया के कारण ही तो मिली प्रसिद्धि के कारण विदेशों में भी अपनी फर्जी पर्चियों की दुकान चला रहा है !
पत्रकारों की खुजली का इस पाखंडी बाबा को मालूम नहीं है कि पत्रकार की खुजली नही होती, पत्रकार की उंगली होती है और मेरी सलाह है कि पाखंडी बाबा पत्रकारों की उंगली से दूर ही रहें अन्यथा पत्रकारों ने उंगली करनी शुरू कर दी तो धीरेंद्र शास्त्री को अपने जादुई चोले के अंदर से रिसते घावों से निकलते मवाद को छुपाना मुश्किल हो जायेगा , धीरेंद्र शास्त्री को पत्रकारों की खुजली की चिंता करने के बजाए अपने झूठ की बुनियाद पर टिके महल को देखना चाहिए, पत्रकार की उंगली से डरना चाहिए अन्यथा पत्रकार की उंगली चलने लगी तो सारे महल, चौबारे ताश के पत्ते की तरह धराशायी होते देर नहीं लगेगी I बागेश्वर धाम सरकार का अहंकार बहुत प्रबल हो गया है क्योंकि सत्ता के ताकतवर नेता इसकी टेकरी पर सर रगड़ते हैं, पुलिस और सरकारी अधिकारी इसके पैर पूजते हैं और अज्ञानी श्रद्धालु इस पाखंडी के पाखंड में उलझ के इसको प्रभु स्वरूप समझने लगे हैं !
बागेश्वर धाम सरकार को क्या मालूम नहीं कि पत्रकार चाहे तो किसी रेंगते प्राणी को फर्श से उठाकर अर्श तक पहुंचा दे या किसी उड़ते परिंदे को अर्श से फर्श तक पहुंचा दे, हिंदुस्तान में जाहिलपन, गवरई , मूर्खता का आलम ये है कि लोग किसी भी बेरोजगार को , जाहिल आदमी को बाबा मान के पूजने लगते हैं और बाबा भी अपनी अप्रत्याशित लोकप्रियता को पचा नहीं पाता और जब मीडिया की तिरछी नजर पड़ती है तो बाबा को रंग बिरंगे अहंकार के चोले की जगह कैदी का परिधान धारण करना पड़ता है , धीरेंद्र शास्त्री को पत्रकारों से बेइज्जती करने से पहले संत आशाराम, गुरमीत राम रहीम सिंह, नित्यानंद और रामपाल जैसे बाबाओं को याद कर लेना चाहिए I बागेश्वर धाम सरकार को याद रखना चाहिए कि पत्रकारों को जब खुजली होना शुरू होती है तो पत्रकार नासूर बन जाता है ! अंधविश्वास और जादूटोने को बढ़ावा देता, लोगों के शरीर से भूत और चुड़ैल भगाता धीरेंद्र शास्त्री जिस दिन पत्रकार के हत्थे चढ़ गया उस दिन पत्रकार बाबा के अंदर से सारे शैतान निकाल के ही अपनी खुजली को शांत करेगा !
धीरेंद्र शास्त्री जैसे हजारों – लाखों बाबा हिंदुस्तान में कुकुरमुत्ते की तरह उग आये हैं और हमारे देश को दीमक की तरह चाट चाट कर बर्बाद कर रहे हैं और दुख इस बात का है कि सत्तासीन नेता, पूँजीपति और सेलेब्रिटी भी अपने स्वार्थों के लिये इनके दरबारों में मत्था टेक रहे हैं , अज्ञानी जनता लुटी जा रही है, लगातार लुटी जा रही है, जिनको जनता अपना पालनहार , दुखहर्ता और सेवक समझ के पूज रही है वही बाबा, वही नेता, वही पूँजीपति जनता का नाश करने को आतुर हैं I
