दशहरे की शाम का वक्त था मैं घर से निकल कर कुछ दूर ही चला था कि देखा ट्रैक्टर ट्रॉली पर विशाल देवी रखी हुई थी , ट्रॉली के आसपास नौजवानों की, युवतियो, महिलाओं और बच्चों की भीड थी, कानफोडू डी जे बज रहा था और उस धुन पर महिलाएं बेतरतीब ढंग से नाच रही थीं, नौजवान गुलाल फेंक रहे थे , सब धार्मिक डांस में मगन थे इस बात से बेखबर कि ट्रैफिक जाम हो चुका था , लेकिन जाम में फंसे सारे कथित शऱीफजादे अपना गुस्सा जब्त कर के चुपचाप खड़े थे, हिंदुस्तान में अगर धार्मिक जुलूस में व्यवधान पैदा करने की कोशिश करोगे तो तिलक लगाए भीड़ आपको देश द्रोही साबित करने में दो पल नहीं लगायेगी और हो सकता है आपको दोजख की सैर भी करा दे ! खैर उन्माद थमा मतलम धर्म नाम की अफीम का असर जब कम हुआ तो दो चार मफलर लपेटे धर्म के बेरोजगार ठेकेदार आये और हमे आगे बढ़ने का इशारा करने लगे जैसे हम पर एहसान कर रहे हों ? एहसान ही तो कर रहे थे वरना पुलिस भी इनसे बच के ही रहती है कि पता नही किस ‘ भाई साहब ‘ को तिलक धारी फोन घुमा दे ?
खैर दरअसल मैं त्यौहारी सीजन के दौरान जनता के बीच जाकर एक साधारण जिज्ञासु की तरह सोनम वांगचुक के बारे में बात करने की कोशिश करने के लिये घर से निकला था ! वहां देखा कि धार्मिक मनोरंजन में लिप्त श्रद्धालु अपने बच्चों को लेकर बड़े बड़े रावण दिखाने लाये हैं, बच्चे गुब्बारे, लकड़ी की तलवार और धनुष बाण लिये मस्ती कर रहे हैं, 60 साल से तो मैं देख रहा हूं कि यही हो रहा है रावण जलता है, अतिशबाजी होती है, कुछ भी नहीं बदला ? मोबाइल – इंटरनेट के जमाने में भी 4 , 6, 7 साल के बच्चों में रावण के जलने का क्रेज बना हुआ है I रावण जलाने वाला कार्यक्रम विशुद्ध राजनैतिक होता है, नेताओं ने इस पारंपरिक सांस्कृतिक कार्यक्रम को हाईजेक कर लिया है , पैसे लेकर मुख्यअतिथि बनाये एवं बुलाये जाते हैं I रावण जलाने के इस पूरे आडंबर भरे कार्यक्रम में स्टेज के ऊपर बैठे नेताओं के अपने स्वार्थ हैं और नीचे बैठी गरीब जनता के लिये विशुद्ध मनोरंजन ? ना तो किसी को रावण के अहंकार से कुछ सबक लेना है ना राम के धैर्य, पराक्रम और मर्यादित जीवन से कोई सीख !
खैर सोनम वांगचुक को अपने मन में लिये मैं भीड़ से सवाल दाग देता हूं कि सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी के बारे में आप क्या सोचते हैं ? जवाब बड़े ही चौकांने वाले थे ? कौन ? वो पाकिस्तानी गद्दार ? उसने अच्छा नहीं किया अपने पति को मार के ? नाम तो सुना सुना सा लगा रहा है ? आमिर खान ? थ्री इडियट वाला ? वो जिसने कश्मीर में दँगा फैला दिया ? मै वहाँ से सरपट भागा ! 9 दिन से चिकन – बकरे को तरस रहे धर्म परस्त लोग रेस्टोरेंट कि तरफ भाग रहे थे, मैं एक प्रसिद्ध रेस्टोरेंट के खचाखच भरे प्रतिक्षालय में इस सोच के साथ घुस जाता हूं कि शायद भरी जेब वाले सोनम वांगचुक के बारे में कुछ जानते हों लेकिन दुर्भाग्य से मुझे घोर निराशा मिली ? चिकन बकरे के दर्शन को तरसते भद्र लोग कहते है कि सोनम वांगचुक पाकिस्तान और चीन का एजेंट है, उसके अपने स्वार्थ हैं, सोनम वांगचुक लद्दाख पर कब्जा करना चाहता है वगैरह वगैरह वो सब बातें जो वो घर में लगे टी वी से अपने कानों और आँखों से सोख रहे थे !
सोनम वांगचुक एक शिक्षाविद् है, पर्यावरणविद् है, अविष्कारक हैं, वैज्ञानिक हैं, उनके नाम से सेकडों पेटेंट हैं, कई देशी और अंतर्राष्ट्रीय पुरुस्कार पा चुके हैं, पूरी दुनिया के देश उनको आमंत्रित करते हैं उनके ज्ञान, विज्ञान को सुनते हैं , क्लाईमेट चेंज के भयानक खतरे को वो भांप चुके हैं लेकिन भारतीय सरकार ने उन्हें देशद्रोही करार दिये जाकर जेल में डाल दिया है, कारण है की सोनम वांगचुक लद्दाख के पर्यावरण के प्रति चिंतित हैं, खनिज संपद्दा को लूटने के लिये पहाड़ों को खोदने के वो सख्त विरोधी हैं और लद्दाख की पूर्ण स्वायत्तता के लिये पिछले 2 सालों से संघर्षरत हैं ! क्लाईमेट चेंज से सिर्फ लद्दाख को खतरा नहीं है, अभी ही पूरा देश भुगत रहा है और आने वाले वर्षों में तो आदमी इस क्लाईमेट चेंज के कहर के कारण तड़प – तड़प के मरेगा ! अगले लेख मे हम चर्चा करेंगे कि सोनम वांगचुक का संघर्ष पूरे देश को बचाने के लिये है लेकिन भारत सरकार उनके इस संघर्ष को क्यों दबाना चाहती है ? देश द्रोही कौन है ? अगले लेख में करेंगे विस्तार से चर्चा !
