जीवन में अगर बहुत आगे जाना है तो अपनी राह खुद रोशन करनी पड़ेगी , खुद जलना होगा तब राह रोशन होगी : कृष्णा गौर
श्रीमति कृष्णा गौर मध्यप्रदेश शासन में , पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की राज्यमंत्री ( स्वतंत्र प्रभार ) हैं , कृष्णा गौर का जैसा नाम है वैसा ही काम है, वे मध्य प्रदेश का एक चर्चित नाम हैं , कृष्णा गौर का व्यक्तिव इतना सहज , सरल , मोहक, मृदुभाषी है कि कोई भी उनसे आकर्षित हुए बिना नहीं रह सकता है I श्रीमती कृष्णा गौर गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र में खासी लोकप्रिय हैं और उनकी लोकप्रियता का अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है कि वे 2023 में हुए विधानसभा चुनाव में भोपाल जिले में सर्वाधिक मतों से जीतने वाली उम्मीदवार थीं I
इंदौर के काछी मोहल्ले में एक संयुक्त परिवार में पली – बढ़ी एक जिज्ञासु लड़की कृष्णा गौर के बड़े भाई गोपाल यादव के अनुसार कि कृष्णा गौर 10 भाई बहन हैं, वो बताते हैं कि कृष्णा को गरबे का बहुत शौक था, कृष्णा गौर की स्कूली शिक्षा इंदौर में हुई और ओल्ड जीडीसी कॉलेज से उन्होंने भूगोल में एम. ए. किया था और उसी दौरान उन्होंने छात्रसंघ का चुनाव भी लड़ा था I कृष्णा गौर के भाई गोपाल यादव के अनुसार वो सभी भाई बहनों को साथ लेकर चलती थी, भाई बहनों में कोई झगडा हो जाता था तो उनको समझाती थी, बचपन से ही वो परिपक्व थी, जिज्ञासु थी और जो ठान लेती थी वो कर के रहती थी I
कृष्णा गौर की शादी मध्य प्रदेश के दिग्गज नेता बाबूलाल गौर के सुपुत्र पुरुषोत्तम गौर से हुई थी, कृष्णा गौर के भाई के अनुसार उनके बहनोई स्व. पुरुषोत्तम गौर को एक परफेक्ट लड़की चाहिए थी और जब उनकी मुलाकात कृष्णा से हुई तो तुरंत शादी पक्की हो गई I कृष्णा गौर को अपने पिता की सामाजिक और धार्मिक गतिविधियां बहुत पसंद थी और जब कृष्णा गौर शादी के बाद ससुराल आई तो करीब से राजनैतिक माहौल को देखा और कृष्णा गौर ने उस माहौल को तेजी से अपना लिया I ये देख कर गौर साहब भी बहू को राजनीति के गुर सिखाने लगे थे I
जब कृष्णा गौर से पूछा कि मध्य प्रदेश पर्यटन के अध्यक्ष चुने जाने से लेकर और महापोर बनने से लेकर अब मंत्री बनने तक के सफर में वो क्या टर्निंग पॉइंट था कि आप सक्रिय राजनीति में आई क्योंकि आपका क्षेत्र तो बिलकुल अलग था I कृष्णा गौर कहती हैं कि ” चिठिया हो तो हर कोई बाचे, भाग ना बाचे कोय ” किसी ने किसी का भाग्य नहीं देखा होता है कि आगे क्या होने वाला है, कृष्णा गौर तो अपने छोटे से परिवार में बहुत खुश थी, बाबूलाल गौर जी अपनी राजनीति में व्यस्त रहते थे, दो छोटे छोटे प्यारे बच्चे थे लेकिन जब बाबूलाल गौर प्रदेश की कमान संभाले हुए थे तब ही उनके पति का असमय निधन हो जाता है और कृष्णा गौर के लिये जैसे सब कुछ खत्म हो जाता है I तब स्व बाबूलाल गौर ने कृष्णा गौर से कहा था कि तुम्हें जीवन में बहुत लंबी दूरी तय करनी है , तुम्हें बहुत सारे काम करना है, ये सुख दुख अपने लिये नहीं हैं , क्षेत्र की जनता का सुख दुख अपने से बड़ा है I
उसके बाद नारी शक्ति के रूप में कृष्णा गौर ने हिम्मत नहीं हारी, खुद को सम्हालते हुए पिता बाबूलाल गौर जी को भी सम्हाला, बच्चों को सम्हाला और धैर्य पूर्वक स्थिति को नियंत्रण में रखा, उसके बाद पार्टी ने अवसर दिये, उनको घर से बाहर निकाला और आज कृष्णा गौर एक परिपक्व नेता, एक मंत्री के नाते प्रदेश की जनता की सेवा कर रही हैं I मध्य प्रदेश की राजनीति के पुरोधा पूर्व सीएम स्वर्गीय बाबूलाल गौर की पुत्रवधू श्रीमति कृष्णा गौर अपने ससुर की राजनीतिक विरासत को बखूबी आगे बढ़ा रही हैं साथ ही उन्होंने मध्य प्रदेश की राजनीति में अपनी एक अलग पहचान बना ली है, बाबूलाल गौर ने गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र से लगातार 10 बार जीत दर्ज की थी और उसी गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र से कृष्णा गौर भी दो बार लगातार जीत दर्ज कर चुकी हैं कृष्णा गौर आज जिस मुकाम पर पहुंची हैं वो उनके ससुर के ही अशीर्वचन हैं , स्व. बाबूलाल गौर, कृष्णा गौर को कहा करते थे कि राजनीति एक बहुत दुर्गम क्षेत्र है और इसमें हमको कई बार लहूलुहान होना पड़ता है और राजनीति में सफलता प्राप्त करने के लिये हमें अपना सर्वस्व न्योच्छावर करना पड़ेगा और उन्होंने ये भी कहा था कि किसी नाम के सहारे कुछ दूर तो चला जा सकता है लेकिन ज्यादा दूर नहीं जा सकता I कृष्णा गौर का मानना है की जीवन में अगर बहुत आगे जाना है तो अपनी राह खुद रोशन करनी पड़ेगी , खुद जलना होगा तब राह रोशन होगी I बाबूजी ( बाबूलाल गौर ) के ही आशीर्वचन हैं कि आज कृष्णा गौर ने मध्य प्रदेश की राजनीति में अपनी एक अलग छवि निर्मित कर ली है I
उन्होंने 2023 के विधानसभा चुनाव में गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र में रिकॉर्ड 106000 से भी ज्यादा मतों से जीत दर्ज की थी। विधानसभा क्षेत्र में भाभी और दीदी के नाम से मशहूर मंत्री श्रीमति कृष्णा गौर सुबह से ही जनता जनार्दन से मुलाकात करना शुरू कर देती हैं, दोपहर में वे विधानसभा क्षेत्र के दौरे पर रहती हैं और शाम को वापस लौटकर फिर लोगों की समस्या सुनती हैं l वे हमेशा सहज रूप से उपलब्ध रहती हैं l वह एक-एक कार्यकर्ता को नाम से पुकारती हैं जो एक नेता के लिए बड़ा मुश्किल काम होता है l वे सामाजिक सरोकार और महिला सशक्तिकरण के लिए निरंतर समर्पित रहती हैं I
( मुक्ति की उड़ान पत्रिका के मार्च 2026 अंक ” महिला सशक्तिकरण विशेषांक ” से उद्धृत लेख )
