BREAKING

मध्यप्रदेश भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत खंडेलवाल की बेटी का दुखद देहवसान हो गया, उनकी बेटी ‘ स्पेशल चाइल्ड ‘ थी और उसके बाद सोशल मीडिया शोकपूर्ण संदेशों से भर गया, हेमंत खंडेलवाल सादगी के पर्याय हैं, वे एक निहायत ही सहज, विनम्र और जमीन से जुड़े हुए नेता हैं, उन्होंने अपनी बेटी के देहांत का किसी तरह का कोई राजनीतिकरण नहीं किया, ये उनकी पारिवारिक अपूरणीय क्षति थी और उनका संयमित और सादगीपूर्ण आचरण प्रेरणास्पद है I

अभी कुछ दिन पहले मध्यप्रदेश शासन के एक वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री की माता जी का दुखद देहांत हो गया था, तब उनके जिले स्थित घर पर दुख प्रकट करने वालों तांता लग गया था I ‘ दुखी ‘ प्रबुद्ध लोग , व्यापारी वर्ग, अधिकारी, संत, धर्मगुरु और पत्रकार भी लाइन लगा के अपना दुख व्यक्त करने उनके गांव पहुंचे थे, मंत्री जी ने अपने दुख को सोशल मीडिया में पाट दिया था और उसके बाद मंत्री जी ने जिले के विशाल स्टेडियम में रसोई भोज का आयोजन किया था जिसमें हजारों ‘ शोक संतप्त ‘ लोग पहुंचे थे, दुख के मौके पर ऐसा भव्य रूप से दुख का प्रदर्शन इंसान के दिखावे की प्रवत्ति की ओर इंगित करता है, परिवार में मृत्यु आती है कुछ सिखाने, कुछ समझाने, जीवन को समझ, बोध और विवेक से जीने की ओर प्रेरित करने के लिये लेकिन औसत सांसारिक लोग आपदा को भी अवसर के रूप में देखते हैं I रसोई करना, गंगाजली पूजन तो हिंदू मान्यताएँ हैं, अपने करीबी लोगों को बुलाकर दुख साझा करना हमारी परंपरा रही है, लेकिन अपना अकूत पैसा, रुतबा दिखाकर हजारों लोगों को बुला कर शक्ति प्रदर्शन करना क्या हमारे गरीब समाज के लिये उचित है ? एक जन प्रतिनिधि ऐसा कर के जन मानस के बीच क्या संदेश दे रहे हैं ? क्या एक गरीब परिवार कर्ज ले के मृत्यू भोज करने को विवश नहीं होगा ? हमारे कई समाजों में तो मृत्यु भोज पर पूरी तरह से प्रतिबंध है और ये उचित भी है I

क्या नेताओं को मोदी जी से सीख नहीं लेना चाहिए कि उन्होंने अपनी माता जी के निधन पश्चात कार्यक्रमों को परिवार तक ही सीमित रखा ! दिखावे और राजनीतिक प्रचार – प्रसार से दूर रखा, अन्य समाज के शिक्षित और प्रबुद्ध लोगों को आगे आकर इन परंम्पराओं की महत्ताओं और आवश्यकता पर समाज को जागृत करना चाहिए लेकिन वरिष्ठ नेता भी अगर परंपराओं, कुरुतियों को बढ़ावा देने लगे तो ये तो शर्म की बात है ? दूसरी ओर हेमंत खंडेलवाल जी की बेटी का निधन हुए 9 – 10 दिन हो चुके हैं जब मैं उनकी फेसबुक वाल गया तो देखा कि उनकी दिवंगत बेटी के बारे में खंडेलवाल जी ने कोई भी बात साझा नहीं की है अलबत्ता उन्होंने इंदौर मे भीषण अग्नि दुर्घटना में मारे 8 लोगों को श्रद्धांजलि दी है एवं वे कांग्रेस के सज्जन सिंह वर्मा कि पत्नि के देहांत पर श्रद्धांजली अर्पित करते हुए देखे जा सकते हैं I लेकिन हमारे समाज में मौकापरस्त लोग दुख की घडी में भी अवसर ढूंढते रहते हैं और ये चाटुकार अपने घड़ियाली दुख प्रकट करने लगातार बेतूल पहुँच रहे हैं, पहुँच के कोशिश करते हैं कि हेमंत जी की नजरें इनायत हो जाएं और ये कोशिश भी करते हैं कि एकाध फोटो भी हेमंत जी के साथ में हो जाये या किसी भी नेता के साथ फोटो खिंच जाये बस और सोशल मीडिया पर फोटो अपलोड कर दें एवं अपनी कृत्रिम निष्ठा और संवेदनाएं खंडेलवाल जी के प्रति दर्शा सकें I

खंडेलवाल जी के प्रति संवेदनशीलता प्रकट करने सैकड़ों किलोमीटर जाने वालों से पूछा जाना चाहिए कि इतनी ही करुणा अगर हमारे समाज में व्याप्त है तो भारत में वृद्धाश्रम क्यों भरे हुए हैं , अनाथाश्रम क्यों लबालब हैं ? भारत से 5 लाख लड़कियाँ कहाँ गायब हैं ? रोज 25 – 30 लड़कियाँ क्यों दहेज के लिये मार दी जाती हैं ? रोज 100 बलात्कार क्यों होते हैं ? सोशल मीडिया पर एक पत्रकार महोदय को देखा कि वो खंडेलवाल जी के साथ फोटो खिचाने की अपनी तीव्र लालसा को रोक नहीं पाये और उनके बीच जबरन घुस गये I आम आदमी की ये गुलाम मानसिकता है कि बड़ा आदमी देखा कि नहीं उनकी रीढ़ की हड्डी 90 डिग्री के कोण पर झुक जाती है, ना तो उनका वजूद होता है ना इनकी कोई शख्सियत, बस चाटुकारिता ही धर्म होता है और अवसरवादिता उनका पेशा ?

ऐसे स्वार्थी लोग अपने गरीब रिश्तेदारों के यहाँ भी दुख प्रकट करने जाते होंगे ? ये सिर्फ वहीं अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं जहां से इन्हें दुख साझा करने से कुछ फायदा होता हो, गरीब रिश्तेदार से क्या मिलना है ? अपने मां – बाप को भी ये घर से निकाल देते हैं कि बुढ्ढा अब दुधारी गाय नहीं रह गया है , बोझ बन गया है ? समाज में अनेकों समस्याएं हैं, कुछ तो स्वार्थ से ऊपर उठकर समाज के लिये करो ? जैसे 80 साल पहले हम अंग्रेजों के गुलाम थे आज अंग्रेज नहीं तो और सही ? लगता है गुलामी, लालच, अवसरवादिता, चाटुकारिता, अंधभक्ति और चमचागिरी हमारे DNA में है I

Share.
Leave A Reply

Exit mobile version