आज का अखबार नये वर्ष के रंग बिरंगे विज्ञापनों से भरा पड़ा था, कोई होटल शराब पिला रहा है , कोई मुर्गा, कोई बकरा काट के खिला रहा था, हर होटल रंगीनियों में डुबो देने का वादा कर रहा है लेकिन अय्याशियों के विज्ञापनों के परे दो समाचार ऐसे थे कि जैसे किसी ने मझे स्वर्ग की रंगीनियों से निकाल कर नर्क में फेंक दिया हो , खबरें दिल दहला देने वाली हैं, दर्दनाक हैं I इंदौर में दैनिक भास्कर के अनुसार 10 आम आदमी दूषित पानी पीने से मर गये हैं और दर्जनों लोग अस्पताल में भर्ती हैं और दूसरी तरफ जबलपुर में 50 नौजवान जहरीली शराब पीने से बेमौत मर गये हैं I
अखबार पढ़ के मनोज कुमार की ‘ उपकार ‘ फिल्म का वो गाना याद आ गया , जब यूं ही रंगीनियों में शराब, कबाब, नशा, हुस्न और धुएं के बीच गाना चल रहा होता है कि ” गुलाबी रात गुलाबी, गुलाबी रात की हर बात गुलाबी ” , और फिल्म मे समानांतर ही दूसरी तरफ गरीबी, कुंठा, दुख, निराशा,कष्ट, पीड़ा और वेदना के दृश्य के बीच गाना चल रहा होता है कि ” काली ये काली रात है , काली रात की हर बात काली , ये हाल रहा तो दुनिया में , भारत की कहानी क्या होगी ” ,1967 में बनी फिल्म का गाना मेरी आँखों के सामने घूम रहा है, एक तरफ आज पूरे भारत में नये साल के बहाने से अय्याशी के नये कीर्तिमान रचे जायेंगे और दूसरी तरफ इंदौर के उन 10 लोगों के परिवार पर क्या बीत रही होगी ? घर में बैठे बैठे पानी पीने से ही जिंदगी ने धोख़ा दे दिया ? पिछले 7 दिनों से भागीरथपुरा इंदौर के रहवासी जिम्मेदार अधिकारियों से गंदे पानी की शिकायत कर रहे थे लेकिन कीड़े – मकोड़ों की सुनवाई क्यों हो ? सिर्फ एक वोट ही तो उसके पास, अब तो उस गरीब का वोट भी खरीद लिया जाता है , याद रखिये अगर चुनाव में वोटर अपना वोट नहीं बेचता तो आज भागीरथपुरा के नागरिक जिंदा होते !
अगर सरकार और सरकारी तंत्र जनता को साफ पानी नही पिला सकता है , साफ हवा नहीं दे सकता है तो धिक्कार है ऐसे तंत्र पर ? साफ पानी देना सरकार की जिम्मेदारी है , जल कार्य समिति की जिम्मेदारी है, लेकिन इधर लोग बेमौत मर रहे थे और उधर जल कार्य समिति के अध्यक्ष अभिषेक बबलू शर्मा , इंदौर के एक रिज़ॉर्ट में पार्टी कर रहे थे साथ में इंदौर के महापौर भार्गव जी भी जनता की समस्या सुलझाने के बजाए रिजॉर्ट में जनता के पैसों से मौज कर रहे थे और 100 रुपए की बॉटल में बंद साफ पानी पी रहे थे ! जनता के पैसो से लाखों रुपए महीने की तनख्वाह लेने वाले , सरकारी महलों में रहने वाले , सरकारी गाड़ियों और सरकारी नौकरों के साथ भोग विलास का जीवन बिताते ये नौकरशाह क्या उसी जनता की सुपारी ले के बैठे हैं ? अभी छिंदवाड़ा में 26 मासूम बच्चों की मौत और इंदौर में ही दो दुधमुंहे बच्चों की चूहे के कुतरने से हुई मौत की सिहरन खत्म भी नहीं हुई थी की भागीरथपुरा इंदौर में तो बेशर्मी की सारी हदें ही पार हो गयी हैं !
पुल टूट रहे हैं, बसें जल रही हैं, ट्रक नो एंट्री में घुस जाते हैं, लोग मर रहे हैं , कुएं के ऊपर मँदिर बन जाते हैं, स्लेब गिरने से दर्जनों लोग मर जाते हैं , जबलपुर में 50 युवा पिछले 3 – 4 महीनों में नकली शराब पीने से मर जाते हैं , चारों तरफ भ्रष्टाचार है, बेईमानी है, सरकारी नौकर अपना ईमान धरम बेच चुके हैं , आर्थिक भ्रष्टाचार तक तो ठीक था लेकिन अब लालची, कपटी, निष्ठुर अधिकारी जनता की जान तक के सौदे करने लगे हैं ! अब जनता को नफरत, धर्म, जाति से उठ कर अपने शोषण के खिलाफ अलख जगाना होगा, कुछ पैसों मे वोट बेच देने का प्रायश्चित करना होगा, अपने परिवार, अपने बच्चों की जान का सौदा करना बंद करो और सरकार से, अधिकारियों से सवाल करो ? जिम्मेदारों से अपने परिवार जनों की हत्त्या का हिसाब लो, जब तक उनको जेल की सीखचों के पीछे ना डाल दो … तब तक चैन से नहीं जीने की कसम खाओ !
अभी अभी खबर आई है कि NDTV के वरिष्ठ पत्रकार अनुराग द्वारी की आत्मा जाग गयी है और उन्होंने कैलाश विजयवर्गीय की बदतमीजी का जवाब उन्ही के तरीके से दिया है, पत्रकार भी अपनी रीढ़ सीधी कर लें अन्यथा उनके परिवार को यमराज का कोई विशेष स्नेह नहीं है, पत्रकार भी अपने परिवार की जान का सौदा करना बंद करें, कुछ पैसों के लिये चाटुकारिता करने का वक्त गया , अब पत्रकारिता का धर्म निभाएं .. याद रहे, जान है तो जहान है !
