हिंदुस्तान में बेहिसाब धूर्त कथावाचक हैं जो अज्ञानी जनता को झूठी – मूठी व्यर्थ धार्मिक कहानियाँ सुना – सुना के पैसा , ख्याति, यश, कीर्ति सब अर्जित कर लेते हैं ! इनके पास एक प्रोफेशनल PR टीम होती है जो इनका प्रचार – प्रसार करती है, इनके यू ट्यूब वीडियो बनाती है, बिल्कुल व्यवसायिक तरीके से इंस्टाग्राम रील बनाती है, कथा वाचक लाखों रुपए खर्च करते हैं ताकि इनके वीडियो, रील ज्यादा से ज्यादा जनमानस तक पहुँच सके I कथावाचक मंच से तो भले ही बोलते हों कि मोह, काम, माया से दूर रहना चाहिए लेकिन असल में ये खुद भोगी होते हैं, कामनाओं के कारण ही तो ये भोगी कथावाचक की भव्य दुकान सजाते हैं, एक एक कथा के लाखों रुपए लेते हैं ये हैं धर्म के नकली संरक्षक ! इंद्रेश उपाध्याय नामक भागवत कथाक़ार जो मंच से तो सात्विक बाते करते थे लेकिन करोड़ों रुपए अपनी शादी में फूंक के अब हास्यास्पद बयान दे रहे हैं , कामना के घोड़े पर सवार इंद्रेश उपाध्याय जितना मूर्ख जनता को समझ रहे थे लेकिन जनता उतनी मूर्ख है नहीं !
इंद्रेश उपाध्याय को हिंदुस्तान में धर्म भीरु जनता ‘ महाराज ‘ भी कहती है, इंद्रेश महाराज भागवत पुराण की कथा सुनाते हैं, वृंदावन में जन्मे इंद्रेश उपाध्याय के पिता भी वृंदावन में प्रसिद्ध कथा वाचक रहे हैं और उन्होंने इंद्रेश को शिक्षा देने के बजाए 10 साल की उम्र से ही कथा वाचक बनाने का प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया क्योंकि भारत में कथावाचक का धंधा बड़ा चोखा है, चोखा धंधा होने के कारण ऐसे ऐसे अंडु – पंडु कथा वाचक पैदा हो गये हैं जिनके पास ना तो सांसारिक ज्ञान है, ना दर्शन है, ना शिक्षा है, ना इनका विज्ञान से कोई संबंध है, ना इनका सनातन धर्म से कोई लेना – देना होता है ना अध्यात्म ( वास्तविक धर्म ) से इनका दूर दूर तक कोई वास्ता है, लेकिन ये कहानी बहुत अच्छी सुनाते हैं, सामने जो जनता इनको सुनने आती है वो भी अधिकांशतः अशिक्षित ही होती है, विश्वास, मान्यता, अंधविश्वास, रूढ़िवादिता, कुरुतियों और परंपरा को ही धर्म समझने वाली मूढ़ जनता इनको अपना धर्मगुरु बना लेती है, इनके पैर छूने लगती है, धूर्त कथावचकों के पास पैसा, सम्मान और अय्याशी के सभी साधन उपलब्ध होने लगते हैं, इनको सरकार का भी संरक्षण प्राप्त हो जाता है , पैसा बरसने लगता है, ताकत भी मिलने लगती है !
कथा वाचक हो या ढोंगी बाबा, इनकी लोकप्रियता को ये अपनी योग्यता समझ लेते हैं लेकर ये समझ नहीं पाते कि इनकी लोकप्रियता के पीछे अनपढ़ श्रोता होता है जो कथावाचक कि ऊलजलूल कहानियों मे रस लेने लगता है। इंद्रेश उपाध्याय जैसे लोकधर्मी कथावाचक मूढ़ जनता के अनर्गल विश्वासों को और मान्यताओं की जड़ों को और गहरा करते हैं ! लोकधर्म कहता है बस मान लो, सवाल नहीं करो , पुराणों में जो लिखा है वही सत्य है , बेहोशी में , नासमझी में, कामना में जीने का मतलब ही लोकधर्म है, हमारे पुराण अजीबो – गरीब कहानियों से भरे पड़े हैं और धूर्त कथावाचक यही कहानी सुना सुना के प्रसिद्धि पा लेते हैं !
इंद्रेश उपाध्याय अपने एक प्रवचन में कहते हैं कि ” मुझे कहीं भी ले जाओ लेकिन जहां विवाह हो रहा हो वहां मत ले जाना ? क्योंकि विवाह क्षेत्र में, विवाह क्रम में सब सांसारिक क्रियाएँ होती हैं , पता नहीं क्यों ? इतनी सांसारिक स्थितियों में मेरी इंद्रियाँ प्रसन्न नहीं होती ! ” लेकिन इस तरह की सीख देने वाले 27 साल की अल्प उम्र के इंद्रेश महाराज एक तलाकशुदा क्षिप्रा नाम की लड़की के इश्क में फंस जाते हैं, और उससे जयपुर के ताज आमेर पैलेस में अंबानी की तर्ज पर करोडो रुपए खर्च कर के राजशाही शादी करते हैं , फिल्म स्टार्स के कपड़े डिसाइन करने वाले प्रतिष्ठित सब्यसाची मुखर्जी इंद्रेश महाराज के कपड़े डिसाइन करते हैं , एक बड़ी इवेंट कंपनी इनकी शादी को भव्य बनाने के लिये नियुक्त की जाती हैं ! एक कथावाचक जया किशोरी भी शादी में शामिल होती हैं जो जानवरों की खाल से बना लाखों के बेग के साथ एयरपोर्ट पर दिखी थीं .. अनिरुद्धाचार्य , धीरेंद्र शास्त्री जैसे ढोंगी बाबा भी शादी में शरीक होते हैं I
इंस्टाग्राम पर शादी की भव्यता और फिजूल खर्ची देख के जनता खुद को ठगा सा महसूस करती है और इंद्रेश महाराज से सवाल जवाब करती हैं ! इंद्रेश महाराज कुछ दिन बाद प्रकट होते हैं और सारा इल्जाम जनता पर ही फोड़ देते हैं कि ये संसार निष्ठुर है , जिस जनता ने असाक्षर कथावाचक को सर पे बैठाया वो श्रद्धालुओं को ही कोस रहा है, अरे जब धर्मगुरु की कामनाओं पर ही बस नहीं हैं तो मंच से झूठ बोलने की क्या आवश्यकता थी ? इंद्रेश महाराज का अगला झूठ कि उनके पिताजी ने पिछले 50 साल से मूर्ख जनता को झूठी सच्ची धार्मिक कहानियाँ सुना के जो पैसा कमाया था, उनकी कामना थी कि वो अपने बेटे की शादी धूमधाम से करें ? जो आदमी 50 साल से लोगो का प्रवचन दे रहा था , उनके पैसों पर डाका डाल रहा था, क्या जनता को मालूम था कि उसकी कामना इतनी प्रबल थी कि वो भगवान के नाम पर जनता से लूटे गए पैसों को बेटे की शादी की अय्याशी में उड़ायेगा ?
इंद्रेश महाराज झूठ और फिजूल बातें करने के महाराज प्रतीत होते हैं, सफाई में कहते हैं कि शादी में लोगोँ को दिखा नही की अमीरो के अय्याशगाह ताज आमेर पैलेस में वैदिक रीति से शादी हुई थी ? महाराज जी हर शादी वैदिक रीति रिवाज से ही होती है ? और कहते हैं कि शादी में अध्यात्मिक माहौल था, महाराज तो इसके लिये 5 स्टार होटल क्यों गये ? वृंदावन के किसी मंदिर में विवाह कर लेते ? ये तो वो ही बात हो गयी कि अधनंगे, शराब के नशे में चूर कामुक संसारी लोग भजन पर डांस का रहे थे ? कुतर्क है कि शादी में बिना लहसुन – प्याज के सात्विक भोजन परोसा गया था, अरे महाराज तो इसके लिये करोड़ों रुपए क्यों खर्च कर दिये ? ये तो वो ही बात हो गयी कि साहब, विवाह समारोह में हमने सात्विक चिकन परोसा था बिना लहसुन – प्याज का ? क्या बचकाना बातें हैं ?
जनता ऐसे नकली धर्मगुरुओं और ढोंगी बाबाओं को पहचाने और इनके वीडियो देखने बंद करे, इनकी कथाओं का बहिष्कार करे, इनका सम्मान करना बंद करे , ये कामना से भरे बहुरूपिये हैं, इनके सानिध्य से तुम्हारा कुछ भी भला नही होने वाला हैं, ये विशुद्ध व्यापारी हैं और धर्म के नाम पर सिर्फ लूट – खसोट कर रहे हैं, सालों से भोली – भाली जनता इनके कुचक्र में फंसी हुई हैं ! बाबाओं से सतर्क रहें ये आपकी जेब पर डाका तो डाल ही रहे हैं साथ ही ये आपके मन में जहर भी भर रहे हैं I
