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भारत में पिछले कुछ सालों में धार्मिक उन्माद बहुत तेजी से बढ़ा है, अभी ईसाइयों के त्यौहार क्रिसमस पर धर्म के नाम पर भारत में दंगाइयों द्वारा चर्च के बाहर हंगामा किया गया , शॉपिंग मॉल में तोडफोड की गयी, सांता क्लॉज़ बने लोगोँ को धमकाया गया और क्रिसमस के नाम पर हो रहे सेलिब्रेशन में उत्पात मचाया गया ! मुसलमानों के त्यौहार चाहे वो ईद हो या मोहर्रम के अवसर पर दंगाई कभी मस्जिद पर चढ़ के बखेड़ा खड़ा करते हैं या मुस्लिमो को हड़काने और भड़काने की कोशिश करते हैं ! इन हादसों से देश में डर और भय के हालात बन गये हैं I ये सब हो रहा है धर्म के नाम पर , धर्म का मतलब तो होता है सत्य, धर्म याने अहंकार से मुक्त जीवन की ओर यात्रा लेकिन ऐसा लगता है कि अज्ञानियों ने धर्म को ही अहंकार का पर्याय बना लिया है I

जो लोग ये पागलपन कर रहे हैं, वे तो स्वयं को ही नहीं जानते कि वो हैं कौन ? ये जो भी दंगाई हैं इनके अंदर जो भी अधूरापन है, बेचैनी है , खोखलापन है, अज्ञान है, इसका हल ये अपने अंदर नहीं ढूंढते ? स्वयं के अंदर झांकना इतना आसान नही है, तो ये अपनी मूर्खता का ठीकरा किसी मस्जिद में जा के फोड़ते हैं या किसी चर्च के बाहर गाली – गलौज करते हैं I लेकिन अंदर का सूनापन या गंदगी किसी को तोड़ने से या फोड़ने से थोडी ना चली जाती है तो फिर धार्मिक उन्माद बढ़ता चला जाता है ! भारत में धर्म ध्वज पताका अधर्मियों के हाथों में आ गई है और यही कारण है कि भारत तेजी से पतन की ओर बढ़ रहा है !

मुग़लों में सबसे मजहबी बादशाह औरंगजेब था और जो बादशाह सबसे दुखी होकर मरा, वो भी औरंगजेब ही था , दुनिया और अवाम को दिखाने के लिये सारे काम वो ऐसे करता था जैसे वो दीन का बंदा हो , शाही खजाने से वो एक रुपए भी नहीं लेता था , अपना खर्चा चलाने के लिये वो टोपियां तैयार करवाता था , टोपियों को बेच के वो अपना व्यक्तिगत खर्चा चलाता था ! अपनी लंबी जिंदगी में उसने सैकड़ों – हजारों लोगोँ को काफिर बता के मरवा डाला ! खूब जिया औरंगजेब लेकिन बहुत बेजारी में मरा ! औरंगजेब ने बड़े भाई दारा शिखोह का गला काट के पिता के कदमों में रख दिया था , दारा शिखोह वो था जिसने उपनिषदों का फ़ारसी में अनुवाद कराया जिसके कारण उपनिषद यूरोप और दुनिया तक पहुंचे ! भाई को मारा और पिता शाहजहाँ को 8 साल कैद में रखा ! औरंगजेब ने जो कुछ भी किया, धर्म के नाम पर किया, धर्म के साथ ये बड़ी समस्या है I याद रखिये जो आदमी अपने आपको धार्मिक बोलना शुरू कर देता , अगर उसका धर्म साफ है, सही है , तब तो वो आसमानी रोशनी बन जायेगा , नहीं तो वो साधारण आदमी से भी नीचे गिर जाता है ! ” औरंगजेब जैसे शासकों का खामियाजा पूरे देश को भुगतना पड़ता है I ”

औरंगजेब को राज विरासत में मिला था तब हिंदुस्तान दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक व्यवस्था था , लेकिन औरंगजेब ने जो अधर्म किया था उसके बाद ( औरंगजेब की मृत्यु के बाद ) तो हिंदुस्तान सबसे गरीब देशों में खड़ा हो चुका था , जब धर्म गलत दिशा ले लेता है तो ऐसी व्यापक तबाही करता है जिसकी कोई इंतेहा नहीं होती ! यही हाल पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और ईरान का हुआ, 1970 तक ये देश क्या थे और उसके बाद ये देश ( धार्मिक ) इस्लामी हो गये और अब इन देशोँ के क्या हाल हैं किसी से छुपा नहीं है I धार्मिक होना बहुत खूबसूरत बात भी हो सकती है लेकिन जब धर्म का स्वरूप बिगड़ जाये तो देश की बर्बादी का कारण भी बन जाती है I जहां आज अफ़ग़ानिस्तान में लड़कियाँ स्कूल नहीं जा सकती, वहां कुछ दशक पहले काबुल यूनिवर्सिटी में महिलाएं प्रोफेसर हुआ करती थीं I कुछ दशक पहले ही कराची और काबुल को ‘ पेरिस ऑफ दि ईस्ट ‘ और वेनिस ऑफ दि ईस्ट ‘ बोला जाता था, लेकिन उसके बाद पाकिस्तान में जरनल जिया उल हक आ गये ? और यही बात ईरान पर लागू होती है, ईरान जैसा खुला देश एशिया में मिलना मुश्किल था लेकिन उसके बाद ईरान में इस्लामिक क्रांति हो गयी !

धर्म दुधारी तलवार हैं अगर सही से समझा गया तो ऊंचाइयों पर ले जायेगा , नहीं तो ऐसा गिरायेगा कि उठना असंभव हो जायेगा ! वही खतरा भारत के ऊपर मंडरा रहा है और बगल में बांग्लादेश में भी यही हो रहा है I भारत आज हर क्षेत्र में बुरी तरह पिछड़ चुका है, चाहे विज्ञान हो या टेक्नोलॉजी हो, खेल हों या सामरिक शक्ति की बात हो, शिक्षा की बात हो या स्वास्थ्य की या आर्थिक क्षेत्र हो, महिला सशक्तिकरण की बात हो, गरीबी हो, भुखमरी हो या पर केपिटा इन्कम की बात हो !

आज अमेरिका को देख लो, अमेरिका दुनिया का हर मामले में अग्रणी देश है .. क्यों ? क्योंकि अमेरिका के लिये बड़े से बड़े काम और ऊँचे से काम उन्होंने किये हैं जो यूरोप से, लेटिन अमेरिका से, चायना से, भारत से और पूरी दुनिया से माईग्रेट हो के अमेरिका गए थे , अमेरिका सभी धर्मों का आदर करता है, स्वागत करता है, यही कारण है कि अमेरिका सामरिक रूप से, आर्थिक रूप से, कलाओं के क्षेत्र में अग्रणी देश है, ज्ञान में भी अमेरिका का कोई सानी नहीं है, दुनिया की टॉप 100 यूनिवर्सिटीज में अमेरिका की 36 यूनिवर्सिटी हैं और भारत की शून्य ! संस्कृति में भी अमेरिका अग्रणी है , खेलों में भी अमेरिका अग्रणी है, ओलंपिक की पदक तालिका में वो नंबर वन रहता है और भारत फिसड्डी ! अमेरिका की सफलता के कई कारण हैं उनमें से एक है अमेरिका अपनी और विदेशी प्रतिभाओं को आमंत्रित करता है और सम्मान करता है और भारत विदेशी प्रतिभाओं के सम्मान की बात तो छोड़ो अपनी ही प्रतिभाओं का अपमान करता है , बदतमीजी करता है !

भारत में शिक्षा के मंदिरों को बंद किया जा रहा है उसकी जगह विशाल धार्मिक मंदिरों का निर्माण किया जा रहा हैं , हमें अमेरिका बनना है या पाकिस्तान, बांग्लादेश और इस्लामाबाद की राह पर चलना है ?

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