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बीता हुआ कल, याने 24 दिसंबर को दिन भर सोशल मीडिया पर और यूट्यूब में ( बिके हुए मीडिया में नहीं ) एक ही खबर चल रही थी कि हत्यारे और बलात्कारी बाहुबली नेता कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट ने जमानत दे दी, क्यों दे दी ? क्योंकि ये पूरा देश अनैतिकता की मंडी बना हुआ है, जो बोली लगा सकते हैं, उनके लिये काले कोट वाले, सफेद कॉलर वाले, खादी कुर्ते वाले , धर्म का चोला ओढ़े नकली धर्मगुरु और वर्दी पहने सब बिकने के लिये तैयार बैठे हैं ? उत्तर प्रदेश के एक नेता हैं ओमप्रकाश राजभर वो रेप पीड़िता को पुलिस द्वारा अमानवीय तरीके से इंडिया गेट से खदेड़ने पर हंस रहे थे, केमरे के सामने ? ऐसा अट्टाहस लगाया उन्होंने जैसे दुर्योधन ने द्रौपदी के चीरहरण के समय लगाया था ! जिस दिन जनता जाग गयी तो इन दुर्दांत नेताओं का वो हश्र करेगी जैसा भीम ने दुर्योधन का किया था ! सच के साथ कृष्ण ( जनार्दन ) हमेशा खड़े हैं बस कृष्ण को इंतज़ार है 100 गालियाँ पूरी होने का .. जिम्मेदार कुर्सियों पर अनेकों शिशुपाल बैठे हैं जो मान ही नहीं रहे हैं और जनता ( जनार्दन ) तैयार बैठी है सुदर्शन चक्र ले के !

दिन भर खबरें देखते रहा तो रात को सपने में दुर्दांत बलात्कारी कुलदीप सिंह सेंगर दिखता रहा, साथ में वो जांबाज लड़की दिखती रही और एक चाटुकार फिल्म निदेशक दिखता रहा जो लोगों के दिमाग में गोबर भर के खुद की जेब में पैसा भरने का काम करता है , मैंने सपने में देखा कि शिवेक अग्निहोत्री ने उन्नाव विवाद पर फिल्म बनाई है, उन्नाव बलात्कार केस में हवस है, मर्डर है, इमोशंस हैं, राजनीति है, हिंसा है, महिला शक्ति है, सब कुछ है .. मैं स्वपन में भोपाल शहर में सरकार की अरबों की जमीन पर बने बंसल प्लाजा में फिल्म देखने गया, बाहर पोस्टर लगा था जे. एल. नेहरू प्रोडक्शन कृत ” उन्नाव फाइल्स ” , निदेशक शिवेक अग्निहोत्री, स्टार : टंगना रनौत ( रेप पीड़ित की भूमिका में ) एवं प्रेमप्रकाश राजभर ( कुलदीप सेंगर की भूमिका में ) सिनेमा हाल खचाखच भरा था , कृष्ण की लीला अपरंपार है जो ” कश्मीर फाइल्स बनाता था वो ” उन्नाव फाइल्स ” बना रहा है, जो नारी नेहरू को गाली बकती थी वो अब उनके प्रोडक्शन में काम कर रही है ?

मैं सपना देख रहा हूँ कि विवेक अग्निहोत्री ने ” उन्नाव फाइल्स ” से खूब पैसा बनाया, शातिर फिल्मकार जो ठहरा ? लेकिन उसने पहली बार सच दिखाया ! एक मासूम और परेशान लड़की उन्नाव के विधायक कुलदीप सिंह सेंगर से नौकरी मांगने आती है , सेंगर उसके साथ बलात्कार करता है, गेंग रेप करवाता है, लड़की का अपहरण करवाता है और सोचता है कि वो विधायक है और उसका कोई भी कुछ नहीं बिगाड़ सकता है, लेकिन लड़की अपने पिता के साथ जाकर थाने में FIR लिखवाती है , कुलदीप सिंह सेंगर आगबबुला हो जाता है और उसके पिता को झूठे केस में जेल भेज कर केस वापिस करने का दबाव डालता है और सेंगर के गुंडे जेल के अंदर पीड़िता के पिता की मार मार के हत्त्या कर देते हैं ! लेकिन पीड़िता हिम्मत नहीं हारती, वो केस लड़ती है और मुख्यमंत्री योगी के घर के सामने आत्मदाह करने की कोशिश करती है, केस में शिकंजा सेंगर पर बढ़ने लगता है तो बहराया हुआ सेंगर पेशी पर आ रही पीड़िता की गाड़ी का एक्सीडेंट करा देता है जिसमे पीड़िता की बुआ, मौसी की मौत हो जाती है, पीड़िता का वकील और स्वयं पीड़िता भी गंभीर रूप से घायल हो जाती हैं !

पीड़िता फिर भी हिम्मत नहीं हारती और
जनता को कॉकरोच समझने वाले बाहुबली कुलदीप सिंह सेंगर को उसकी सही जगह याने जेल पहुंचा के दम लेती है ! ये फिल्म नहीं सच है, कुलदीप सिंह सेंगर ने सिर्फ एक नाबालिग लड़की का बलात्कार ही नहीं किया उसने 3 नृशंस हत्त्याएं भी की हैं ! और ऐसे दुर्दांत राक्षस के साथ हाई कोर्ट दयादृष्टि दिखा रहा है और कोर्ट उसकी आजीवन कारावास की सजा को सस्पेंड कर देता है , तर्क ये है कि 2019 में उसको सरकार के एक जिम्मेदार विधायक के रूप में सजा दी थी जिसमें आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है लेकिन कोर्ट के सामने ये तर्क दिया गया कि विधायक एक गैर जिम्मेदार सरकारी पद है जिसमें सजा कम से कम सात साल है और चूंकि कुलदीप सिंह पहले ही 7 साल से ज्यादा की सजा काट चुका है, इसलिए कोर्ट ने उसको जमानत दे देता है !

2012 – 2013 में निर्भया केस में हजारों – लाखों लोग पीड़िता को न्याय दिलाने के लिये इंडिया गेट पर केंडल मार्च में इकठ्ठे हुए थे ? जनता के दबाव के चलते ही चारों शैतानों को फांसी हुई थी ! क्या अब लोगों की संवेदनाएं खत्म हो चुकी हैं ? कल सिर्फ 4 महिलाएं ही पीड़िता के साथ इंडिया गेट पर धरने पर बैठी थीं ! ऐसा क्यों ? जनता को आगे आना चाहिए और सेंगर जैसे असुरों को पकड़कर सड़कों पर बेइज्जत करना चाहिए और फांसी की सजा की मांग करना चाहिए ! याद रखिये सेंगर जैसे लोग छुट्टे घूमेंगे तो तुम्हारी मां – बहनें भी सुरक्षित नहीं रहेंगी ! अन्याय, शोषण के खिलाफ आवाज उठाइये, सर उठा के सम्मान के साथ जीना सीखिये, कब तक अंधे – बहरे बनकर मूक दर्शक बने रहेंगे !

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