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मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के 2 साल आज पूरे हो गये .. प्रदेश और राज्य में जश्न का माहौल है, आज मुख्यमंत्री ने पत्रकार वार्ता आयोजित कर अपने 2 साल के कार्यकाल की उपलब्धियों का ब्यौरा दिया , साथ में उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला और जगदीश देवड़ा भी उपस्थित थे, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल भी उपस्थित रहे ! डॉक्टर मोहन यादव के चेहरे पर उनके 2 साल की उपलब्धियों खनक थी, चमक थी , उल्लास था, खुशियाँ थीं ! आज मोहन यादव का दिन था, उनका दोषरहित वक्तत्वय अरसों तक याद रहेगा, पूरा व्याख्यान जैसे उनकी हृदय से निकल रहा था, ऐसा महसूस हो रहा था जैसे 2 साल के विकास कार्य मुख्यमंत्री की आँखों के सामने चल रहे हों और वो आँखों देखा हाल बयां कर रहे हों जैसे मुख्यमंत्री प्रदेश के हर विकास के साक्षी हों !

मुख्यमंत्री यादव ने प्रदेश के विकास के लिये बहुत परिश्रम किया है, नक्सल समस्या को पूरी तरह से खत्म करने का जो दावा है वो प्रदेश के लिये गौरव और खुशी की बात है, मोहन यादव के ही प्रयास रहे कि ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट, और रीजनल इन्वेस्टमेंट समिट के आयोजन के माध्यम से मध्यप्रदेश में हजारों करोड़ का निवेश हुआ है, युवाओं को नौकरी के अवसर मिले हैं, प्रदेश का आर्थिक विकास हुआ है, पर केपिटा आय में इजाफा हुआ है , प्रदेश खुशहाली की ओर अग्रसर हुआ है, अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने अपने सहयोगी मंत्रियों को, अफसरों को अनेकों बार धन्यवाद प्रेषित किया, जिन्होंने प्रदेश के विकास के भागीरथ प्रयास में उनका साथ दिया ! अपने सहयोगियों के प्रति कृतज्ञता प्रेषित करना मुख्यमंत्री के सहज स्वभाव को प्रदर्शित करता है !

जनसंपर्क संचालनालय के कमीश्नर दीपक सक्सेना, प्रेस कांफ्रेंस का संचालन कर रहे थे, पूरी पत्रकार वार्ता पर दीपक सक्सेना का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिख रहा था, 5 साल की मोहन सरकार की उपलब्धियों पर जनसंपर्क ने 2 – 4 बुकलेट प्रकाशित करीं हैं और पॉवर पॉइंट प्रेसेंटेशन भी तैयार किया, सभी तैयारियों में जनसंपर्क संचालनालय के कमीश्नर दीपक सक्सेना का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिख रहा था, प्रेसवार्ता अत्यंत ही व्यवस्थित थी, अंत में जब पत्रकारों को मुख्यमंत्री से सवाल पूछने का मौका आया तो मीडिया के बड़े बड़े स्थापित नामों को पुकारा गया और उनके सवाल मुख्य मंत्री के संबोधन का ही एक्स्टेंशन थे, औपचारिकता और चाटुकारिता की चाशनी मे डूबे हुए शब्द थे, जिनको सवाल या जिज्ञासा तो बिलकुल नहीं कहा जा सकता I

राष्ट्रीय हिंदी मेल के वरिष्ठ पत्रकार वी के दास ने जरूर एक वास्तविक प्रश्न पूछा और वरिष्ठ पत्रकार अवधेश भार्गव ने पत्रकारों की समस्या पर मुख्यमंत्री का ध्यानाकर्षण करने की कोशिश की , बाकी जिनको भी सवाल पूछने का मौका मिला उनको शायद सौरभ शर्मा का नाम ध्यान नहीं आया होगा? शायद वो छिंदवाड़ा मे मासूम 26 बच्चों की मौत को भूल गये होंगे ? ग्वालियर और इंदौर में पत्रकारों की पिटाई को भूल गये होंगे? सिवनी में 11 पुलिस वालों की लूट याद नहीं आई होगी, रायसेन और बरेली के टूटे पुल याद नहीं रहे होंगे .. मोहन सरकार ने काबिले तारीफ काम किये हैं इसमें कोई शक नहीं .. डॉक्टर मोहन यादव तो अपना धर्म निभा रहे हैं लेकिन पत्रकार अपना धर्म क्यों भूलते जा रहे हैं ? प्रदेश का चहुं विकास हर्षोउल्लास का विषय है लेकिन पत्रकारिता का गिरता स्तर अत्यंत चिंतनीय है I

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