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भोपाल : आँख के ब्रांडेड हॉस्पिटल में जाने का दुर्भाग्य प्राप्त हुआ या कहें कि कॉर्पोरेट में कार्यरत हमारे बच्चों द्वारा जबरदस्ती भेजा गया , मल्टीनेशनल कंपनीज में काम करने वाली पीढ़ी लाखों रुपए महीने की सेलरी पा रही हैं, वो भी मेडिकल इन्शुर्ड हैं और उनकी कृपा से हम जैसे मां बाप भी , खैर छोड़िये मुद्दे की बात है कि हम एक प्रतिष्ठित कॉर्पोरेट आई हॉस्पिटल में घुसे तो खराब आँखें भी चुन्धिया गयीं, मैने पत्नि से कहा कि लगता है हम गलती से किसी होटल में आ गये हैं ? पत्नि बोली देखो सामने दवाई की दुकान दिख रही है ? 5 स्टार होटल जैसा रिसेप्शन, रिसेप्शन के सामने 50 महंगी सी आयातित कुर्सियां लगी थीं .. सब खचाखच फुल , उस पर बैठे सब सज्जनता से बैठे हुए अपनी ( लुटने ) बारी का इंतजार कर रहे थे , सामने बड़ा सा रिसेप्शन काउंटर था जिसमे कोट पेंट टाई पहने 4 – 5 लड़के – लड़कियाँ वसूली करने बैठे थे !

एक काउंटर पर New Registration का बोर्ड लगा था, मैं गया तो उसने एक फॉर्म पकड़ा दिया , फॉर्म भर के दिया तो बोला बैठिये, आपका नाम पुकारा जायेगा I मैं भी आकर भीड़ का हिस्सा बन गया और बैठे बैठे सोचने लगा कि ये बकरे कितनी मासूमियत से हलाल होने के लिये बैठे हैं, सब के सब आज्ञाकारी बकरे, जब कसाई बोलेगा और ये गर्दन स्वयं ही नपवाने को तैयार हो जायेंगे ? मेरा नाम पुकारा गया , नपे तुले कदमों से पहुंचा तो रिसेप्शन पर बैठी लड़की ने रूखेपन से बोला 600 रुपए जमा कीजिये .. पैसे दिये तो उसने ब्रांडेड फाइल पकड़ा दी .. लुटने – लूटने की प्रक्रिया की शुरुआत हो चुकी थी , लड़की बोली की रूम नंबर 4 में जाकर आंख का प्रेशर चेक कराइये , रूम नंबर 4 में गये तो देखा वहां भी पचासों कुर्सियां लगी हैं, एक टेबल पर यूनिफॉर्म पहने एक लड़की बैठी थी .. फाइल लेकर बोली बैठिये आपका नाम पुकारा जायेगा .. मैं और मेरी पत्नि बैठ गये, भीड़ देखकर ऐसा लग रहा था कि जैसे मुफ्त में इलाज किया जा रहा है , ग्राहकों में कोई शिकवा नहीं, कोई गिला नहीं , कोई शिकायत नहीं .. मध्यम वर्गीय गुलामों को लूट लूट कर ही तो ये पूँजीपति देश के मालिक बन गये हैं I जितने बकरे यहां हलाल होने बैठे थे , उनके बच्चे इन्ही पूंजीपतियों के यहां तो गुलामी कर रहे हैं , ये बेईमान सेठ 100000 तनख्वाह देते हैं और 2000000 लाख कमाते हैं, 20 गुना ? जी हां, तभी तो एक से एक महामूर्ख मध्यमवर्गीय मूर्खों को लूट लूट कर लाखों बिलियन डॉलर के मालिक बने बैठे हैं ?

मैं भटक जाता हूं , शोषण, मूर्खता, बेईमानी, लूट देख कर मेरे अंदर का क्रांतिकारी बाहर आ जाता है, खैर आँखों का प्रेशर चेक होने के बाद मोहतरमा ने कहा पहली मंजिल पर रूम नंबर 104 में जाईये .. मैं आज्ञाकारी गुलाम की तरह पहली मंजिल पर पहुँचा तो देख कर मेरा सर चकरा गया .. वहां भी महंगी आयातित कुर्सियां लगी थी और एक 5 स्टार हॉस्पिटल की कर्मचारी यूनिफॉर्म पहने तैनात थी , फाइल देख कर मैडम बोली, आपकी आंख में दवाई डालेंगे , उसके बाद डॉक्टर देखेंगी, 1 घण्टे बैठने के बाद डॉक्टर ने बुलाया, मुझे ( बकरे ) को देखा , मुझे आँका ( Assess ) और बोली बैठिये .. बड़ी सी , महंगी सी मशीन से आँखों को चेक किया और बोली आप बाहर बैठिये आपको बुलाया जायेगा, थोड़ी देर बाद एक मोहतरमा आई और बोली रिसेप्शन पर जाइये, मैं रिसेप्शन पर पहुंचा तो मुझे 2000 रुपए जमा करने का बोला .. मैंने जमा किये तो बोला गया कि दूसरे तल पर जाईये, करता क्या नहीं करता .. पहुंचा तो देखा वहां भी करीब 50 महंगी आयातित कुर्सियां लगी हुई थीं .. हाउस फुल, मुर्गे ही मुर्गे … बकरे ही बकरे, वहां भी टेबल थी, परंतु इस बार एक लड़का बैठा था, उसने फाइल देखी, मुझे एक मशीन के सामने ले गया और एक कागज प्रिंट कर के फाइल में रख दिया और बोला नीचे 104 में चले जाइये, अब तक मैं समझ गया था कि ये एक सुनियोजित लूट है, बकरे को ऐसा सम्मोहित किया जाता है कि उसको लगता है कि वो एक ऐसी धर्मार्थ संस्था में आ गया है जहां सब उसकी निष्काम, निस्वार्थ सेवा में लगे हैं ?

थोड़ी देर बाद डॉक्टर ने बुलाया और बोली आपकी आंख में सूजन है आपको इंजेक्शन लगाना पड़ेगा .. आप बाहर बैठिये, आपको बुलाते हैं .. बैठाने, बुलाने, इंतजार करवाने का प्रपंच एक मनोवैज्ञानिक षड्यंत्र है, मरीज की चेतना को शून्य करने का नाटक .. खैर नाम पुकारा गया और बताया गया कि आप चौथे तल पर रूम नंबर 405 में जाइये .. थके हारे कदमों से वहां पहुंचा तो वहां भी पचासों कुर्सियां, पचासों लोग .. एक टेबल और टेबल के पीछे एक रोबोट नुमा लड़की, लड़की फाइल लेकर बोली आप बैठिये आपका नाम पुकारा जायेगा, अब मेरी सारी ऊर्जा खत्म हो चुकी थी, नाम पुकारा गया, कोई सीनियर डॉक्टर था .. डॉक्टर साहब बोले कि फलां इंजेक्शन लगाना पड़ेगा वगैरह वगैरह .. सब कुछ स्क्रिप्टेड है मैं समझ चुका था .. डॉक्टर बोले आप बाहर बैठिये .. थोड़ी देर में मैडम ने मुझे फाइल दी और बोली रूम नंबर 104 में जाइये .. मैंने कहा फिर से ? गया तो डॉक्टर मेडम बोली मैंने आपको सीनियर डॉक्टर के पास भेजा था .. मैंने मन में सोचा .. क्यों भेजा ? मेरे मन की बात जैसे डॉक्टर मैडम ने सुन ली थी .. डॉक्टर बोली सीनियर का डिसकशन पेशेंट ( ग्राहक ) से होना चाहिए ना ? मैंने सोचा चोर की दाढ़ी में तिनका ??

डॉक्टर मैडम बोली कि आप कॉउंसलर रूम में चले जाइये, वो आपको सब समझा देंगे ? मैं अब तक अपनी सोचने – समझने की शक्ति खो चुका था .. लुटता पिटता काउंसलर के रूम में पहुंचा तो देखा कि 2 – 3 राउंड टेबल लगी थीं, हर टेबल पर सजी संवरी ब्लेक सूट पहने काउंसलर बैठी थी जैसे कार के शो रूम में लगी रहती हैं, ग्राहक को बैठाया जाता है सौदेबाजी की जाती है, मुझे बैठाया गया और बताया कि 3 प्रकार के इंजेक्शन हैं हमारे शो रूम में एक 16000 का, दूसरा 23000 का और तीसरा 35000 का … सवाल आया कि आपको कौन सा लगवाना है ? मैंने सोचा कार थोड़ी है कि बता दूं मुझे ये वाली पसंद है ? सवाल ही बेहूदा था .. खैर पूरी 4 – 5 घंटे की कवायद काउंसलर रूम में आकर खत्म हुई .. संपूर्ण डील फाइनल हुई 45000 रुपए में ! काउंसलर बोली नीचे रिसेप्शन में जाइये 45000 रुपए जमा कराइये और रसीद ले आईये .. मैं अब तक पूरी तरह सम्मोहित हो चुका था .. मैं गुलामों की तरह बोला जी मेडम .. अभी लाया ?

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